Monday, March 3, 2014

सामाजिक भूमिका में लोक भारती उत्तर प्रदेश की पहल - अशोक सिंह

लोक भारती उत्तर प्रदेश ने 
समाज की आशाओ-अपेक्षाओं के अनुरूप कुछ आवश्यक कदम आगे बढ़ाये हैं, जो इस प्रकार हैं -
लोक भारती द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु 2006 में 1500 विद्यालयों, महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रमों द्वारा एक लाख छात्रों एवं शिक्षकों के साथ प्रभावी कदम बढ़ाए -


शुद्व वायु के लिए आवश्यक 33 प्रतिशत भूभाग पर वृक्षावरण की सर्वप्रथम पहल लखनऊ से हुई तथा हेतु  2011 में नैमिषारण्य तथा उसके चैरासी कोसी परिक्रमा पथ पर 84 हजार देववृक्ष रोपण के संकल्प के साथ सीतापुर व हरदोई जिलों के 108 गावों में एक माह की जागरूकता यात्रा व तीन माह तक देववृक्ष अभियान चलाया। परिणामस्वरूप सामाजिक सहयोग से 40 हजार तथा वन विभाग द्वारा 20 हजार पौधे तत्काल सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के साथ लगाये गये तथा 2013 तक शेष 24 हजार पौधों के रोपण के साथ 84 हजार वृक्षारोपण का लक्ष्य पूरा करने से यह अभियान पे्ररक उदाहरण सिद्ध हुआ।

इसी प्रेरणा से लखनऊ के निकट चन्द्रिका देवी क्षेत्र में 20 हजार पौधारोपण के साथ ही विविध प्रकार की विलुप्त हो रही प्रजातियों के पौधों के रोपण व संरक्षण का कार्य प्रारम्भ हुआ,

वहीं मथुरा जिले के वृन्दावन क्षेत्र में यमुना किनारे, गंगा तट पर श्रंगवेरपुर व गोमती की सहायक सई नदी क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान हेतु अनेकों हाथ आगे आये। इस दिशा में तरू-सिंचन, हरियाली-पखवारा, पौध-भण्डारा, वृक्षारोपण-यज्ञ, हरियाली-चूनर, हरियाली-चादर एवं वृक्ष-डोली जैसे अनेक प्रकार के पे्ररणादायी आयोजन प्रारम्भ हुए। इस अभियान की सफलता में एक लाख पौधा लगाने का संकल्प लेकर 70 हजार तक लगा लेने में सफल तथा वृक्षों के लिए कृत संकल्पित अनेक विभूतियों का महत्वपूर्ण योगदान है।
शुद्ध वायु के बाद, जल हमारी दूसरी अति आवश्यक आवश्यकता है। इस विषय को समझने-समझाने के लिए मासिक पत्रिका लोक सम्मान के जल विशेषांक से कार्य प्रारम्भ करके, विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, परिणामकारी कार्यों का प्रत्यक्ष दर्शन-भ्रमण एवं अध्ययन जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गये, जिससे संकल्प जाग्रत हुआ और प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाई देने लगे। नगरों में वर्षा जल एवं भूगर्भ जल-भरण (री-चार्ज) व्यवस्थाओं के निर्माण, नई कालोनियों में घरेलू मल-मूत्र शोधन संयन्त्रों की स्थापना, जल-संकट से जूझते बुन्देलखण्ड के महोबा जिले में परम्परागत तालाबों की सामाजिक सहयोग से खुदाई-सफाई एवं 100 खेतों में तालाब निर्माण एवं महोबा व बांदा जिले में वर्ष 2014 में एक-एक हजार तालाब निर्माण का संकल्प जैसे उत्साहवर्धक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।

जल का सम्बन्ध वर्षा के साथ ही ग्लैशियरों, भूगर्भ-जल एवं नदियों से भी है। अतः लोक भारती भूगर्भ जल-स्रोतों से बहने वाली गोमती संरक्षण अभियान के साथ ही, ग्लैशियरों से बहने वाली गंगा के संरक्षण हेतु गंगोत्री से गंगा सागर तक आयोजित दो यात्राओं में सहयोग के अनुभव के साथ इस निश्चय पर पहुँची कि, यदि गंगा को स्वच्छ जल-युक्त रखना है, तो गंगा में मिलने वाली सभी नदियों पर कार्य करना होगा। अतएव संस्था ने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड की सभी नदियों एवं उन पर कार्यरत व्यक्तियों, समूहों की सूची बनाकर सम्पर्क किया और 22, 23 जनवरी, 2011 को लखनऊ में ‘‘माँ गंगा समग्र चिन्तन गोष्ठी’’ का आयोजन कर 42 जिलों तथा 20 नदियों के 250 प्रतिनिधियों को जोड़कर इस अभियान को आगे बढ़ाया।

‘‘माँ गंगा समग्र चिन्तन गोष्ठी’’ में ही लोक भारती ने प्रत्यक्ष कार्यानुभव हेतु 960 किमी॰ मैदानी भाग में बहकर गंगा में मिलने वाली लखनऊ की जीवन रेखा, आदिगंगा गोमती के अध्ययन एवं सामाजिक जागरूकता हेतु एक सप्ताह की गोमती-गंगा यात्रा का निश्चय किया, जो 28 मार्च से 3 अप्रैल, 2011 को गोमती प्रवाह के 13 जिलों में होती हुई 33 स्थानों पर गोमती मित्र-मण्डलों के निर्माण के साथ सम्पन्न हुई।

गोमती यात्रा के परिणामस्वरूप गोमती संरक्षण के प्रति समाज में आयी जागरूकता और प्रदेश सरकार को सौंपी गई कार्ययोजना रिर्पोट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी गोमती संरक्षण के लिए प्रेरित किया, परिणामतः यात्रा के एक सप्ताह के अन्दर ही पीलीभीत जिले के गोमती उद्गम स्थल माधौटाण्डा में प्रदेश सरकार के सचिव द्वारा जिलाधिकारी, तहसीलदार एवं सिचाई विभाग के अधिकारियों के साथ निरीक्षण और पीलीभीत से लखनऊ तक गोमती को सुजला व प्रदूषण मुक्त रखने की कार्ययोजना बनाई और तत्काल जून, 2011 तक उसका क्रियान्वयन भी प्रारम्भ हो गया, जिसके अन्र्तगत पीलीभीत में 47 किमी॰, शाहजहांपुर में 16 किमी॰ गोमती क्षेत्र की नाप, चिन्हीकरण और खुदाई का कार्य किया गया। सरकार द्वारा अपने गोमती संरक्षण के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उस समय सभी समाचार पत्रों में पूरे-पूरे पृष्ठ के विज्ञापन भी छपवाए गए।
प्रदेश में सरकार परिवर्तन से गोमती संरक्षण अभियान में आयी शिथिलता के बाद भी लोक भारती द्वारा पूरे गोमती क्षेत्र में स्वच्छता अभियानों, जल के लैब-परीक्षणों, तट, घाट एवं एस॰टी॰पी॰ के सामाजिक निरीक्षणों, उपवास, संगोष्ठी, ज्ञापन, प्रतिनिधि मण्डलों के मिलन, पत्राचार, समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में लेखन, वृक्षारोपण, आरती, दीपोत्सव जैसे सामाजिक व प्रशासनिक जारूकता के विविध कार्यों द्वारा प्रेरणा की निरन्तर लौ जलाये रखी।

परिणामतः अनेक व्यक्तियों व संगठनों ने भी गोमती संरक्षण अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान जोड़ा, जिससे गंगा और गोमती के साथ ही सई, तमसा, ससुर खदेरी, हिन्डन, मनोरमा, रामगंगा, यमुना आदि प्रदेश की अन्य नदियों के संरक्षण अभियानों में भी तेजी आयी।

 जिसका प्रभाव राजनैतिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों पर भी हुआ और शासन के अधिकारियों ने भी जल, जल-स्रोत एवं छोटी नदियों के संरक्षण के लिए कुछ कदम आगे बढ़ाये। जून, 2013 में मऊ जिले की जिलाधिकारी द्वारा तमसा तथा फतेहपुर जिले में स्वामी विज्ञानानन्द जी की प्रेरणा व जिलाधिकारी की लगन से ससुर खदेरी नदी पर 36 किमी॰ तक मनरेगा द्वारा खुदाई का कार्य सम्पन्न हुआ, जिससे 3 किमी॰ दूरी तक के गावों के कुओं का जल स्तर बढ़ गया। इसके साथ ही महोबा जिले में सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जिलाधिकारी की अग्रणी भूमिका से जिले के प्रसिद्ध सरोवर तीर्थ सागर की हजारों लोगों ने निरन्तर लगकर खुदाई व सफाई का कार्य किया।
लखनऊ में भी लोक भारती के निरन्तर प्रयत्न के परिणामस्वरूप 3 दिसम्बर, 2014 को लखनऊ में शासन द्वारा जल-स्रोत संरक्षण हेतु एक अभूतपूर्व क्रियान्वयन कार्यशाला का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी), उ॰प्र॰ शासन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ, जिसमें प्रदेश में 50 नदियों एवं जल-स्रोतों पर कार्य करने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों तथा 50 जिलों से जिलाधिकारी, सी॰डी॰ओ॰ व समकक्ष अधिकारियों के साथ ही प्रदेश के ग्राम विकास एवं भूमि संरक्षण विभाग के सचिव, ग्राम विकास व मनरेगा के आयुक्त व सम्बन्धित अधिकारी सम्मिलित हुए और प्रदेश भर में जल-स्रोतों, झीलों, तालाबों व सिकुड़ती नदियों की खुदाई तथा उन पर वर्षा जल संग्रहण के लिए स्थान-स्थान पर जलबंध (चेक डैम) बनाने की योजना पर विचार व क्रियान्वयन का संकल्प लिया गया।

प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही पीलीभीत जिले में तत्काल पुनः सर्वेक्षण एवं परियोजना पर कार्य प्रारम्भ हुआ, वहीं महोबा एवं बांदा जिले में एक-एक हजार खेत तालाब बनाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं व प्रशासन, दोनों की निरन्तर सक्रियता इस अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वायु, जल-स्रोत एवं नदियों के संरक्षण के साथ ही खाद्यान्न की गुणवत्तापूर्ण उत्पादकता एवं मृदा संरक्षण आवश्यक है, इस हेतु लोक भारती ने 2012 से सम्पूर्ण उत्तर भारत में शास्वत खेती (जीरो बजट प्राकृतिक खेती) के प्रसार हेतु व्यापक व सघन अभियान चला रखा है, जिसके अन्र्तगत अभी तक 8 स्थानों पर बडे़-बड़े प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन सम्पन्न हुए हैं, जिनमें आठ प्रदेशों के 50 से अधिक जिलों के लगभग 4000 किसानों नें प्रशिक्षण प्राप्त कर, माॅडल कृषि क्षेत्र विकसित किए हैं, जो इस कृषि-विधा के विस्तार में सहायक होगे।

इस अभियान से किसान स्वावलम्बी, कृषि भूमि की उर्वरा-शक्ति का सम्वर्धन, गुणवत्ता-युक्त खाद्यान्न की उपलब्धता, उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई में केवल 10 प्रतिशत जल उपयोग से भू-गर्भ स्तर में बढ़त तथा जैवविविधता का संरक्षण सम्वर्धन होगा। यह कार्य एक देशी गाय से 15 से 20 एकड़ खेती सम्भव है। अतः किसान गाय पालेगा, जिससे देशी गाय प्रत्येक किसान और किसानी का अभिन्न अंग बनेगी, उसका संरक्षण व संवर्धन सुनिश्चित होगा।
यह अभियान निरन्तर आगे बढ़ रहा है, जिसके आगामी कार्यक्रम भी निश्चित हैं- (एक) 21 से 23 मार्च, 2014 को गुरूकुल कुरूक्षेत्र, हरियाणा, (दो) 1 से 5 अप्रैल, 2014 को  परमार्थ आश्रम, ऋषीकेश, उत्तराखण्ड (तीन) 31 मई से 4 जून, 2014 को बस्ती, उत्तर प्रदेश तथा (चार) इस अभियान को आगे बढ़ाने हेतु  21 से 27 फरवरी, 2014 को शाहजहाँपुर जिले में ‘कामधेनु अवतरण यात्रा’’ का आयोजन किया जा रहा है।
इस प्रकार लोक भारती विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यक्तियों, विशेषज्ञों एवं शासन-प्रशासन तथा विभिन्न सम्बन्धित संस्थानों, प्रतिष्ठानों को सहभागी बनाते हुए निरन्तर आगे बढते हुए निम्नांकित आयामों-अभियानों में संलग्न है। (1) मेरा गाँव-मेरा तीर्थ, (2) पर्यावरण संरक्षण, (3) वृक्षारोपण एवं हरियाली पखवारा (4) जल एवं नदी संरक्षण, (5) गंगा-समग्र एवं गोमती संरक्षण, (6) जीरो बजट प्राकृतिक खेती (7) ग्रामीण तकनीकी विकास एवं प्रसार, (8) व्यक्तित्व विकास एवं गौरव सम्मान, (9) स्वयंसेवी संस्थाओं के मध्य समन्वय, (10) साहित्य एवं मासिक पत्रिका ‘लोक सम्मान’ का प्रकाशन तथा (11) समय के साथ गतिमानता व लोक भारती से सम्पर्क एवं विविध आयामों की जानकारी के लिए lokbhartiindia.com/ebharati.in पर जुड़ा जा सकता है।
लोक भारती का ध्येय मन्त्र है -    
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे शन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चिद् दुखः भग्भवेत।।