गोमती में घट रहे जल की मात्रा में बढोत्तरी जल क्षेत्र संरक्षण (Water Bodies) कर के सरलता से की जा सकती है। लखनऊ से ऊपर गोमती के करीब 26 जल क्षेत्र पड़ते है, जिनका नाम इस प्रकार है -
1. अनदा इब्राहिमपुर, 2. अनदा इब्राहिमपुर, 3. मढि़या घाट, 4. प्रेमपुर, 5. तुलसीपुर, 6. चैखडुआ, घाट, 7. चैखडुआ, 8. अरबापुर, 9. धारकुंवा, 10. धारकुवा, 11. हरनी कलान, 12. सखौरा, 13. तौकालपुर, 14. खाजा डाबर, 15. बिन्द्रा बन, 16. बिन्द्रा बन, 17. नबी नगर, 18. फतेहपुर, 19. बहादुरपुर, 20. डौडिंया झील, 21. पट्टी, 22. मरहिया, 23. मरौली, 24. तेरवा, 25. रामकोट तथा 26. धाना खेड़ा हैं,
जिनमे से 7 प्रमुख जल क्षेत्र है जिनका विवरण इस प्रकार है -क्र॰ नाम जल क्षमता(M3) गोमती से लिंक चैनल लम्बाई
1. खाजा डाबर 35.33 100 मीटर
2. बहादुरपुर 71.03 1.05 किमी॰
3. डोडिंया झील 10.93 250 मीटर
4. पट्टी 11.66 550 मीटर
5. मरहीया 22.54 100 मीटर
6. रामकोट 26.66 2.1 किमी॰
7. धाना खेरा 24.52 3.0 किमी॰
उपरोक्त जल क्षेत्रों में क्र॰-1. सीतापुर जिले में है तथा शेष सभी हरदोई जिले में पड़ते हैं। यदि इन जल क्षेत्रों की मनरेगा से खुदाई एवं सफाई करा दी जाये तो लखनऊ में मार्च से जून के महीनों में भी जल उपलब्ध रहेगा। इसके अतिरिक्त गोमती की 15 सहायक नदियांँ हैं, जिनमें से कुछ नदियाँ अब वर्षाकाल के बाद सूख जाती हैं, जिनमें पहले पूरे वर्ष भूगर्भ जल-स्रोत चलते रहते थे और नदियांँ सदानीरा बनी रहती थीं। यदि उपरोक्त नदियों तथा उनके निकटस्थ जल क्षेत्रों की खुदाई तथा आवश्यकता अनुसार चेकडैम बना दिये जायें तो यह नदियांँ पुनः सदानीरा होकर गोमती को भी जल युक्त रखने में सक्षम होे सकेंगी.





