जल का रिश्ता तो मानव से उल्टे अनुपात में होता है। जनसंख्या ज्यों-ज्यो बढ़ती है, जल का अभाव त्यो-त्यों होता है।। जल का उपयोग करे मानव, तो जीवन में रसधार बहे। जल को बेकार गंवाया तो। मानव सचमुच लाचार रहे।। सच्ची प्रगति का सार है जल, जन-जीवन का आधार है जल।। जल को नहीं व्यर्थ करे कोई, जल का संरक्षण धर्म बने। जल की महिमा समझाना हो, मानव का सुन्दर कर्म बने।। जल है पूजा जल है भक्ति, जल ईश्वर का वरदान सदा। मानव-जीवन का मूल तत्व, जल है शक्ति का नाम सदा।। धरती का प्राणाधार है जल, जल बिना नहीं जीवन-संबल।। ु - सौजन्य से जल विज्ञान संस्थान, जल विज्ञान भवन, रूड़की, उत्तराखण्ड।





