धरती का बढ़ता पारा आज दुनियाँ की सबसे बड़ी चिन्ता है। अन्धाधुन्ध विकास की इस दौड़ नें मानव समेत धरती के समूचे अस्तित्व को खतरे में ड़ाल दिया है, पर अभी भी उम्मीद की चंद किरणें बाकी हैं। अपनी जीवन शैली में बदलाव लाकर पर्यावरण से सामित्य स्थापित कर सकते हैं। ऐसे ही एक बदलाव है, परिवहन के साधन के रूप में साइकिल को अपनाना। साइकिल न केवल पर्यावरण हितैषी है, बल्कि इससे हमारी सेहत की रखवाली भी बखूबी होती है। उच्च रक्तचाप की शिकायत हो या फिर मोटापे और डाइविटीज की, साइकिल की सवारी करना रामवाण साबित हो रहा है। साइकिल को अपनाकर मोटर वाहनों से निकलने वाले विषैले उत्सर्जन की मात्रा में कमी लायी जा सकती है। इसीलिए साइकिल को 21वी सदी की आदर्श सवारी माना जा रहा है। ज्यादा समय नही बीता जब गांवों की गरीब लड़कियां छठी, सातवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती थीं, क्योंकि गांव से 5-7 कि.मी. दूर स्कूल जाने के लिए उनके पास कोई सस्ता साधन नहीं था। इसके निराकरण के लिए नागपुर नगर पालिका ने इस व्यवहारिक समस्या का आसान समाधान निकाला और 57 साइकिल खरीद कर ‘‘साइकिल बैंक’’ की शुरूआत की। गरीबी रेखा के नीचे बसर करने वाले परिवारों की कक्षा 8 की लड़कियों को इस बैंक ने निशुल्क साइकिलें उपलब्ध कराईं, प्रयोग सफल रहा और जिन लड़कियों नें पढ़ाई बंद कर दी थी, वह स्कूल पढ़ने जाने लगीं। इस बीच तामिलनाडु के पट्टिकोई जिले में एक दिलचस्प उदाहरण देखने को मिला। यहाँ महिलाओं के लिए चलाये जा रहे साक्षरता अभियान में उन्हें साक्षरता ज्ञान के साथ साइकिल चलाना भी सिखाया गया, ताकि वे अपनी पढ़ाई-लिखाई का अपने जीवन में सदुपयोग कर सकें। देेखते-देखते जिले के 370 गांवों की हजारों महिलाओं ने साइकिल चलाना सीख लिया। आज यहाँ लगभग 50 हजार महिलाएँ बड़े गर्व और शान के साथ साइकिल की सवारी करती हैं। महाराष्ट्र का पुणे शहर जो एक ओर अपनी आधुनिकता के लिए प्रसिद्ध है वहीं संभ्रान्त व्यवसायों से जुड़े लोग बड़े आराम से सड़क पर आते-जाते दिखाई देंते हैं, क्योंकि यहाँ साइकिल सम्मान और शान की सवारी है। यहाँ साइकिल सवार को उपेक्षा या नीची निगाह से नहीं देखा जाता, बल्कि उन्हें विचारशील और जागरूक नागरिक माना जाता है। नागरिकों की इस सार्थक सोच में बदलाव लाने का काम यहाँ पर 1998 में गठित डाक्टरों की एक संस्था ने किया। संस्था के सदस्य डाक्टरों नें लोगों के सामने उदाहरण पेश करते हुए अपने अस्पताल/क्लीनिक पर साइकिल पर आना-जाना शुरू किया। साथ ही रोजाना साइकिल चलाने से सेहत के फायदों के बारे में प्रचारित-प्रसारित किया। डाक्टर समुदाय के संदेशों को लोगों ने गंभीरता से लिया, इस पर भरोसा किया और जल्दी ही अन्य व्यवसाय के लोगों ने भी साइकिल को अपना लिया, जिसमें व्यवसायी, प्रोफेसर, अवकाश प्राप्त अधिकारी और महिलायें भी हैं। इससे पुणे शहर के वायु प्रदूषण में कमी दिखाई देने लगी है। इसका प्रभाव देश के अन्य बडे शहरों मे भी पड़ा। मुम्बई में 2008 में युवाओं नें इस अभियान को आगे बढ़ने का बीडा़ उठाया। साइकिल के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए यह युवक रंगबिरंगे कपड़े पहन कर संगीत के साथ सैकड़ों के समूह में सड़कों पर निकले, जिससे यहाँ के लोगों में पर्यावरण प्रदूषण से संघर्ष का एक नया उत्साह पैदा हुआ। जिसके असर से देश के महानगर दिल्ली, जयपुर जैसे अन्य नगरों के युवको में भी साइकिल सवारी कर जागरूकता रैलियां निकालीं। नगरो के इन युवको का कहना है, ‘‘भारत में साइकिल को गरीब लोगों के यातायात का साधन माना जाता रहा है। हम लोगों को बताते हैं कि अगर आपके पास एक अच्छी बाइक है और इसके बाबजूद आप साइकिल चला रहे हैं, तो यह शर्म की नहीं सम्मान की बात है।’’ जर्मनी जिसने दुनियां को मर्सिडीज, आडो जैसी शानदार गाडियां दीं, उसके एक छोटे से शहर वाबेन ने पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक पहल करते हुए अपने शहर में कारों पर प्रतिबन्ध लगा दिया है, जिससे 57 प्रतिशत लोगों ने अपनी कारें बेंच दी हैं। शहर में परिवहन के लिए सायकिल के अतिरिक्त ट्राम एक अच्छा साधन है। लम्बी दूरी की यात्रा के लिए जिन्होने गाडि़यां रखी हैं, उनकी कार पार्किग के लिए शहर से बाहर व्यवस्था की गई है। शहर में कार पार्किग के स्थान पर फूलदार क्यारियां बनाई गई हैं। अब शहर में वाहनों के शोर व उनके प्रदूषण के स्थान पर फूलों की महक व सायकिल की घंटियां सुनाई देंगी। कार खरीदने की हैसियत रखने वाले नीदरलैंड के निवासियों के लिए सायकिल चलाना सामान्य सी बात है। यहाँ जन संख्या से अधिक सायकिले हैं। यहाँ की कुल आबादी 163 लाख है, जबकि सायकिलों की संख्या 180 लाख से अधिक है। यहाँ सायकिल उच्च वर्ग का फैशन स्टेटस बन गई है। कुछ सायकिलें छोटे मोटर वाली हैं। यहाँ के लोगों ने पेट्रोल की बढ़ती कीमत, पर्यावरण की चिन्ता और स्वास्थ्य पर छाये संकट का हल सायकिल के रूप में निकाल लिया है। भारत, जर्मनी, नीदरलैंड के साथ ही चीन के लोगों ने भी साइकिल को प्रमुखता दी है। इस निमिŸा पर्यावरण प्रेमियों का कहना है, ‘‘साइकिल से अधिक पर्यावरण और स्वास्थ्य रक्षक कोई सवारी नहीं हो सकती, हमारे पास पर्यावरण को बचाने का यह एक महत्वपूर्ण साधन है।’’ ु





