गंगा की भांति पूज्य नर्मदा भी भारत के लोगों की जीवन रेखा है, जो अपने उद्गम स्थल अमर कंटक से चलकर सत्पुड़ा और विन्ध्य की पर्वत श्रफखलाओं में बहती प्रदेश के 18 जिलों (अनूपपुर, डिण्डौरी, मण्डला, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, होसंगाबाद, हरदा, देवास, खण्डवा, खरगौन, बडवानी, धार, अलिराजपुर, नर्मदा, बडोदा, नंदूरवार एवं भरूच,) से होती हुई 1320 कि.मी. की यात्रा करके भरूच नामक स्थल पर सागर में मिल जाती है। नर्मदा का बहाव पूर्व से पश्चिम की ओर है तथा इसकी 13 अन्य सहायक नदियां हैं, जो निरन्तर इसके जलवृद्धि में सहायक रहती है। नर्मदा के तटीय क्षेत्र में पड़ने वाली पर्वश्रंखलाओं व वनो में 1200 प्रकार की दुर्लभ वनष्पितियाँ, 76 वन्य प्राणि प्रजातियाँ तथां 276 पक्षी प्रातियाँ पाई जाती हैं। इसके तटीय क्षेत्र के जंगलो की आयु का अनुमान यहाँ प्राप्त पेड़़ों के 6.5 करोड़ वर्ष पुरातन अवशेषों से लगाया जा सकता है। मध्य प्रदेश की यह पुरातन जीवनधारा सामाजिक व आर्थिक विकास का भी बहुत बड़ा स्रोत है। अतः इसके ऊपर संचालित पाँच विद्युत परियोजनायें इस प्रकार हैं- (1) रानी अवन्तीवाई परियोजना, (2) इन्दिरा सागर परियोजना, (3) आंेकारेश्वर बहुउद्देश्ीय परियोजना, (4) महेश्वर जल विद्युत परियोजना तथा (5) सरदार सरोवर परियोजना हैं। ऐसी समृद्धि देने वाली नर्मदा के संबन्ध में ग्रन्थों में कहा गया है- ‘‘समुद्रः सरितः सर्वा, कल्पे-कल्पे क्षयं गताः। सप्त कल्पक्षये क्षीणे नमस्तो तेन नर्मदा। त्वदीयं पाद पंकजम् नमामि देवि नर्मदे।।’’ ऐसी देवी नर्मदा के प्रति सामाजिक जागरूकता पैदा करने व उसे पवित्र, स्वच्छ व सुजला बनाये रखने के लिए पिछले दिनों मध्य प्रदेश के गायत्री परिवार ने ‘‘नर्मदांचल शुद्धि अभयान’ प्रारम्भ किया, जिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार हैं। अभियन के प्रारम्भ में ही इसके चार लक्ष्य निर्धारित किये गये- (1) नर्मदा जल शुद्धि, (2) नर्मदा तट शुद्धि, (3) तटीय ग्राम शुद्धि तथा (4) औचित्यपूर्ण तीर्थ सेवन। इसके साथ ही अभियान द्वारा संपन्न कार्य एवं कार्यक्रमों से आने वाले चार परिणामों का लक्ष्य भी पूर्व में ही सुनिश्चित किया गया, जो इस प्रकार है- (1) निर्मल जल, (2) सुवासित पवित्र तट, (3) सुसंस्कारी ग्राम तीर्थ तथा (4) परिव्राजक तीर्थ यात्री व्यवस्था। उपरोक्त लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, कार्यकर्ताओं को निरन्तर ऊर्जा प्रदान करने वाले शक्ति केन्द्र के रूप में इस क्षेत्र में पहले से ही स्थापित गायत्री शक्ति पीठ (1) अमरकंटक, (2) डिण्डौरी, (3) मण्डला, (4) जबलपुर, (5) बरमान, (6) होसंगाबाद, (7) हरादा, (8) आंकारेश्वर, (9) बडवानी, (10) जोबट, एवं (11) खण्डवा में हैं। नर्मदा के प्रदूषण के कारणों का विचार कर उनके निराकरण हेतु छः सूत्रों का निधारित किया गया,- 1. गंदे पानी के निस्तारण हेतु फिल्टरेशन प्लांट। 2. जन जागरण से नदी में प्रतिमा व पूजन सामिग्री विसर्जन पर रोक। 3. तटीय खेत्रों में उर्वरक/कीटनाशकों के विकल्पों का उपयोग। 4. नर्मदा को राज्य धरोहर घेषित किया जाये। 5. राज्य की जीवन रेखा का सम्मान। 6. तटों पर पालीथीन प्रयोगा पर पूर्ण रोक। उक्त लक्ष्य को लेकर गायत्री परिवार द्वारा स्थानीय समस्त सहयोगी संगठनो व व्यक्तियों के साथ मिल कर इस प्रकार अीिायन को सफल बनाने के लिए काय्र किया। नर्मदा तटीय ग्राम तीर्थ - तटीय ग्रामों को आदर्श गांव, स्वच्छ, स्वस्थ, व्यसन मुक्त, सुसंस्कारों, स्वावलम्वी एवं सुशिक्षित ग्राम निर्माण। 1. कृषि प्रधान एवं ऋषि प्रधान संस्कृति का जागरण। 2. वायोग्राम-गोवंश आधारित खेती का प्रचार। 3. ग्रामों में नर्मदा मण्डलों की स्थापना। बाल संस्कर शालाओं की स्थापना। प्रदूषण निवारण शुद्धि के उपाय - 1. गंदे पानी का निस्तारण पर फिल्टरेशन प्लांट। 2. जनजागरण से प्रतिमा एवं पूजन सामिग्री पर रोक। 3. तटीय क्षेत्रों में उर्वरक एवं कीटनाशकों के विकल्प। 4. राज्य की धरोहर घोषित करना। 5. राज्य की जीवन रेखा का सम्मन। 6. तटों पर पालीथीन के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबन्ध। 7. तटों/घाटों की स्वच्छता। 8. घाटों पर मल-मूत्र विसर्जन व्यवस्था हेतु सुलभ शौचायलों की स्थापना। 9. स्वच्छता हेतु नियमित श्रमदान। 10. नगरपालिका/पंचायत द्वारा नियमित स्वच्छता। 11. तटों को र्तीर्थ बनाना/सम्मान का भाव विकसित करना। 12. सुगन्धित/छायादार वृक्षों का रोपण। 13. घाट निर्माण। हरितिमा संबर्धन के उपाय - 1. तटीय बनों को काटने से बचाने हेतु सरकारी व सामाजिक प्रयास हों। 2. तटों पर सघन वृक्षारोपण हेतु स्थान चिन्हित हों। फूलदार/फलदार वृक्ष लगें। 3. परती भूमि में नीम, हरड़, बहेड़ा जैसे औषधीय पौधें के साथ ही पंचवटी के पौधे आंवला, पीपल, बरगद, अशोक व बेल का वृक्षारोपड़ हो। 4. श्रीराम उपवन की भी रूपरेखा बने। 5. सामाजिक संगठनों की हो सकिृय भूमिका। 6. ग्राम तीर्थ योजना हो साकार। आदर्श गांव कैसा हो - 1. हर गांव में बने नर्मदा प्रज्ञा मण्डल, उभरे नर्मदा के प्रति सच्ची श्रद्धा। 2. हर गांव मंे खुले बाल संस्कार शाला, बच्चे बनें संस्कारवान। 3. युवामण्डल आगे आयें गांव को बनायें व्यसन मुक्त। 4. व्यक्तिगत एवं साजिक स्वच्छता के प्रति बढ़े जागरूकता। 5. पूर्ण साक्षरता हो लक्ष्य, सब पढ़ें, सब बढ़ें। 6. गौ आधरित हो स्वावलंबन। सहयोगी परिक्रमा वासी - 1. परिक्रमा वासियों के सदावर्त की शक्तिपीठों पर हो व्यवस्था। 2. शक्ति पीठों पर चलें सत्र, ‘‘तीर्थ सेवक क्यों और कैसे’’? 3. जागरूक और इच्छुक परिक्रमा वासियों के सहयोग से दीवार लेखन, नर्मदा मण्डल गठन, ग्राम तीर्थ योजना, संस्कार शाला का क्रम गांव-गांव तक पहूंचे। औचित्यपूर्ण सउद्देश्य परिक्रमा - 1. नमर्दा तीर्थ सेवन क्यों व कैसे। 2. परिक्रमा वासियों को दिशा वोध। 3.शक्ति पीठों पर एक घटें की संध्या कक्षा नर्मदा महिमा कथा। 3. तीर्थ सेवन के अनुशासनों से परिचय। 4. औचित्तयपूर्ण तीर्थ यात्राओं के आयोजन। 5. दीबार लेखन, ग्राम गोष्ठी, कथा-वार्ता का प्रचलन। 6. सत्साहित्य का प्रचार-प्रसार। आओ करें संकल्प - 1. व्यक्ति गत रूप से साबुन व सैप्पू का प्रयोग नर्मदा स्नान में न करें। 2. पूजन सामिग्री, निमल्य, टूटी मूर्तियां विसर्जित नहीं करेंगे। 4. पालीथीन का प्रयोग विलकुल नहीं करें। 5. तीर्थें पर मल-मूत्र त्याग से बचंेगे। 6. तटों पर मूत्र त्याग से बचेंगे। 7. खेतों में कीट नाशकों/रसायनकों का प्रयेग कम करेंगे। 8. अपने बाहनों को नर्मदा में नहीें घोयेंगे। नर्मदा प्रज्ञा मण्डल कैसे बनें?, क्या करें? - 1. प्रत्येक गांव के श्रृद्धावान आगे आयें मण्डल बनायें। 2. कमसे कम पांच लोग मण्डल में हों। 3. करें साप्ताहिक स्वच्छता तटों पर। 4. साप्ताहिक सत्संग में बने सत्संग जागरूकता की योजना। 5. गांवों में चलायें बाल संस्कार शाला। 6. व्यसनमुक्त गांव का करें संकल्प/प्रयाश। 7. समीपस्थ गायत्री शक्ति पीठ से पायें मार्ग दर्शन। 8. गौवंश आधारित ग्राम विकास को करें साकार। सहयोग के क्षेत्र की व्यवस्थायें - 1. प्रान्तस्तरीय नमर्दाचंल शुद्धि अभियान समिति का गठन। 2. चार आन्दोलनों की चार उप समितियां। साधन - 1. दो स्थायी वाहन-नर्मदा रथ एवं एक अन्य। 2. पूर्ण समयदानी दल। 3. एक प्रभारी पूर्ण कालिक। 4. दीवार लेखन सामिग्री। 5. साहित्य। 6. प्रशिक्षण तन्त्र। सहयोग के क्षेत्र की व्यवस्थायें - 1. प्रान्तस्तरीय नमर्दाचंल शुद्धि अभियान समिति का गठन। 2. चार आन्दोलनों की चार उप समितियां। ु





