Sunday, March 2, 2014

वर्षा जल संचयन एवं संभरण की नवीन प्रणाली - महेन्द्र मोदी

हमारी धरती माता कहती है- 1. तुम मुझमें 5 हजार रूपये का जल निवेश करो, मैं तुम्हें समृद्धि दूँगी। 2. पानी पखवारा (जल पक्ष) मनाइए, समृद्धि की सीढ़ी चढि़ए। 3. अवश्यक रूप से हर घर तथा हर खेत में रीचार्ज कुआॅ तैयार करें। 4. जो जल संवर्धन करें, चलें हमारे साथ। कार्य योजना - सभी आयवर्ग के नागरिकों के लिए रीचार्ज कुआँ व अन्य जल संचय प्रणाली- 1. रीचार्ज प्रणाली में बोरिंग करने के लिए जो खर्च किया जाता है वह अनावश्यक है। 2. रीचार्ज टैंक के नीचे वाले फ्लोर में सीमेन्ट, ईंट और कंक्रीट का प्रयोग करके निर्बाध पुनरावेशन (फ्री रीचार्ज) बन्द कर दिया जाता है। यह अनावश्यक है। इसके खर्च को रोकिये, बचत बढ़ाइए। 3. नीचे के फ्लोर को पक्का करने से रीचार्ज की गति अत्यन्त धीमी हो जाती है। पानी डायरेक्ट मिट्टी में रीचार्ज करने से रीचार्ज क्षेत्र लगभग 100 गुना बढ़ जाता है। मैंने स्वयं रीचार्ज कुआँ क्वार्टर नं0 14, पुलिस एन्क्लेव, विभूति खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ में तैयार करके अनुभव से यह निष्कर्ष निकाला है। 4. अभी तक अभियन्ता रीचार्ज टैंक प्रणाली के जो माॅडल बताते हैं उसमें न्यूनतम 20 हजार रूपये से लेकर 1 लाख रूपये तक व्यय हो सकते हैं। मेरे द्वारा डिजाइन किये गये माडल पर होने वाला व्यय न्यूनतम 1 हजार रूपये से लेकर अधिकतम 15 हजार रूपये होंगे। उ0प्र0 में यह व्यय अधिकतम 08 हजार रूपये होगा। यानी परम्परागत डिजाइन को लागू करना देश की 80-85 प्रतिशत आबादी के वस की बात नहीं है। जबकि मेरे द्वारा बताये हुए डिजाइन को शतप्रतिशत आबादी लागू कर सकती है, जिनके पास अपनी जमीन है। 5. धार्मिक स्थलों के नाम पर नदियों पर अतिक्रमण तत्काल बन्द किया जाना आवश्यक है। गोमती नदी तथा अन्य नदियों की न्यूनतम और अधिकतम चैड़ाई पारिभाषित/निश्चित की जानी चाहिए। ऽ छत पर की बारिश के पानी का घरेलू उपयोगः- सावधानियाॅ- 1. जमीन के अन्दर का पानी प्रदूषण युक्त हो सकता है जिसमें मेटल, आरसेनिक, फ्लोराइड, टिन, डाई, विभिन्न प्रकार के रसायन, सीवर लाइन से लीक किया हुआ पानी या खारा पानी तथा प्रदूषित पानी हो सकता है। ऐसे क्षेत्रों के लिए बारिश का पानी वरदान है। 2. छत पर बारिश के मौसम के पहले सफाई करें। 3. छत पर जाने वाले व्यक्ति, व्यक्तिगत सफाई व हाथ पैरों की सफाई पर ध्यान दें। बरसात में जूते-चप्पल छत के दरवाजे के पहले ही उतार दें। 4. (क) छत पर के बारिश का पानी कन्डुइट पाइप से नीचे उतारने के पहले पाइप के मुहाने पर अथवा पानी छत से नीचे उतारने के बाद विशेष इन्तजाम किये जायें। (ख) इसके लिए पाइप के मुहाने ;ब्ंजबीउमदज ।तमंद्ध पर एक शटर होगा, एक फिल्टर होगा और (ग) चूना या ब्लीचिंग पाउडर होगा। (घ) फिल्टर के लिए स्टील की जाली का प्रयोग किया जाये, लोहे का नहीं, ताकि जंग नहीं लगने पाये। (ड) जाली को नये साफ व सफेद टेरीकाॅट कपड़े से अच्छी तरफ कवर कर लें। इससे धूलकण, कीड़े आदि छन जायेंगे। (च) सफेद कपड़े के पीछे स्टील की जाली के स्थान पर मच्छरदानी की जाली या चीनी की बोरी का टुकडा भी लगाए जा सकते हैं। 5. सफेद कपड़ा आवश्यकतानुसार बदलते रहें ताकि पानी के रिसाव/फिल्टर की गति नहीं रूके। 6. बारिश समाप्त होते ही शटर (ऊपरे से नीचे खिसकने वाला) बन्द कर दिया जाये ताकि किसी भी प्रकार की गन्दगी पाइप से होकर नीचे टंकी में नहीं आने पावे। 7. स्नानागार व रसोई में उपयोग किया गया पानी रीचार्ज कुआँ में गादछट होकर ले जायें। इसे तमबलबसम भी कर सकते हैं। 8. छत पर के पानी को उपयोग में लाया जा सकता है। इसके लिए हर फ्लोर के आवासीय ब्लाक के बाथरूम में एक पानी की टंकी स्थापित कर दी जाये। जो सतह से 6 से 7 फिट तक ऊपर स्थापित की गयी हो। इसके लिए तिपाया या चैपाया पिलर लगाया जाए। टंकी की गहराई मात्र 2 फीट की हो जिसकी सफाई की जा सके। 9. (क) पुलिस एन्क्लेव विभूति खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ में प्रथम मंजिल पर रहने वाले हर अधिकारी के लिए टेरेस बना है। इसी टेरेस पर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रत्येक ब्लाक की पहली मंजिल के निवासियों के लिए 6 से 7 फिट की ऊंचाई पर पानी की टंकी लगा ली जाये। दूसरी मंजिल की छत का पानी इस टंकी में उतारा जाएगा। (ख) सबसे ऊपरी मंजिल की छत पर का पानी सबसे ऊपरी मंजिल के बाथरूम में टंकी लगाकर इकट्ठा किया जा सकता है। 10. (क) भूतल (ळतवनदक थ्सववत) पर रहने वाले परिवार प्रथम मंजिल पर के टेरेस पर के पानी को अथवा सबसे ऊपर वाले फ्लोर के पानी को इसी प्रकार 6 से 7 फिट की ऊँचाई पर अथवा पहली मंजिल के टेेरेस पर पानी टंकी रखकर बारिश का पानी अपने बाथरूम अथवा किचन में ले जा सकते हैं जिसे इसी प्रकार फिल्टर करें। (ख) चूना या ब्लीचिंग पाउडर ब्ंसबपनउ ीलचवबीसवतपजम ;ब्ंवबसद्ध पानी शुद्ध करने के लिए इस्तेमाल में लाएॅ। 1 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर से 200 लीटर पानी शुद्ध होता है। 11. शहरों में आर0ओ0, सिस्टम या एक्वागार्ड सामान्यतः इस्तेमाल में लाये जाते हैं यह भी काम आयेगें लेकिन बारिश के पानी के लिए इसका होना आवश्यक नहीं है। ऽ जल संचय की उन्नत तकनीक - 1. सभी आय वर्ग के नागरिकों के लिए जल संचयः- जल संचय की अवधारणा को सामान्यतः ’वाटर हार्वेस्टिंग’ शब्द समूह से समझा जाता है। लेकिन मेरे विचार से ’वाटर हार्वेस्टिंग उपयुक्त शब्द नहीें है। हार्वेस्टिंग में खेती की बुवाई, फसलों की उपज और कटाई की प्रक्रिया सम्मिलित है, जिसमें एक बीज से कई दाने या कई फल तैयार हो जाते हैं। जल संचय की प्रक्रिया में ऐसा कुछ भी नही है। 2. (क) रिचार्ज कुआँ को इस प्रकार समझा जा सकता है कि इनवर्टर या इमरजेंसी लाइट को कुछ घन्टे चलाने के बाद सिस्टम में प्रकाश ऊर्जा डिस्चार्ज हो जाती है। पुनः विद्युत उर्जा से इमरजेंसी लाइट को रीचार्ज करते है। उसे शुद्ध हिन्दी में कहा जाए तो विद्युत उर्जा से प्रकाश उर्जा पैदा करने के लिए उर्जा का पुर्नभरण (रीचार्ज) करते है। जल संचय प्रणाली के पीछे भी मुख्य बात इतनी ही हंै कि धरती माता के पेट में जो जल है उसका आपने अत्यधिक दोहन कर लिया है। धरती माता ने कहना शुरु कर दिया कि अब मेरी कोख में पानी नहीं है। (ख) अतः आप अपने स्वयं की जरुरत या समाज की जरुरत के लिए धरती माता की कोख में पानी भरना शुरु कर दें जो वर्षा के समय 70-80 प्रतिशत बेकार वह कर नाला, नदी और फिर समुद्र में चला जाता है शेष पानी में आधा भाप बनकर उड़ जाता है। जल संचय प्रणाली विकसित करके आप धरती माता की ’कोख’ में पानी भरना शुरु करेंगे जिसे हिन्दी में ’जल धारक स्तर’ (।ुनपमित) कहते हैं। (ग) भूजल संचय प्रणाली को पानी ’रीचार्ज कुअँॅ’ कहा जा सकता है। (घ) पानी पखवारा (जल पक्ष) मनाकर आर्थिक रुप से समृद्ध भारत की नींव रखी जा सकती है। अकाल का मुकाबला खुशी-खुशी कर सकते हैं। 3- (क) रीचार्ज कुआँ तैयार करने के जो तरीके कभी-कभी बताए जाते हंै, वह खर्चीले हंै क्योंकि इसमें 40 से 100 फीट तक गहरे पाइप से बोरवेल तैयार किए जाते हंै। इसमें बोरिंग व पाइप का खर्च अनावश्यक रुप से बढ़ जाता है। 2- गाद-छन्ना-टंकी - जब छत का पानी कच्चे नाले से गाद-छन्ना-टॅकी में डाला जाता है तो लोहे की जाली का इस्तेमाल किया जाता है। जाली की ऊॅचाई 1 फुट से 1-1/4 फीट तथा चैड़ाई 6 से 12 इंच तक होगी। जाली लोहे की या पतले बाॅस की होगी जिससे छनते हुए गाद-छन्ना-टंकी ;ैपसज ैमजजसमउमदज ब्ींउइमतद्ध में पानी डाला जाएगा। लोहे पर होने वाले खर्च में कमी लाने के लिए बाॅस की पतली जाली का प्रयोग किया जाए। बशर्ते यह सीमेंट की टॅकी में अन्दर से जुड़ा (अन्र्तसम्बन्धित - प्दजमतजूपदमक) नहीं हो। गाद छन्ना टॅकी की दीवार के साथ बाॅस की जाली तो सही है लेकिन कुछ वर्षो में उसके खराब होने पर नई बाॅस की जाली लगाई जा सकती है। बाँस की यह जाली गाद छन्ना टॅकी मेें बाहर से सटाकर जोड़ी जा सकती है। (3) मैनें पहले किसी अभियन्ता द्वारा बताए गए तरीके से जल संचय प्रणाली मकान में तैयार की जिसमें मेरे रु0 25000.00 (पचीस हजार) खर्च हो गए। लेकिन रिचार्ज पाइप जमीन के अन्दर ले जाने के बाद मैने यह पाया कि अब तक घर में प्रयुक्त पानी जो हम रिचार्ज करते हंै वह अत्यन्त धीमी गति से जमीन के अन्दर रीचार्ज हो पाता है। अतः रीचार्ज कुआॅ की नई डिजाइन मैने विकसित की है। (4) बिजली व पानी की कमी के कारण होने वाले अपराध व काननू व्यवस्था की विषम परिस्थितियों पर पूर्ण नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है। देश के सभी प्रान्तों में इसके प्रशिक्षण दिए जांय एवं जनता को जागरुक किया जाए। (5) अन्तर प्रान्तीय नदी पर जल बटवारा विवाद में राष्ट्रीय ऊर्जा और समय की बर्वादी नहीं होगी। (6) जब धरती में जल स्तर काफी ऊपर आ जाएगा तो किसान बिना डीजल या बिना बिजली के काफी हद तक अपने श्रम से लट्ठा, कुन्डी से रिचार्ज कुआॅ से पानी निकाल कर सिंचाई कर सकेगें। बिजली पर उनकी निर्भरता अत्यन्त कम हो जाएगी। कृषि क्षेत्र पुनः उत्पादक क्षेत्र बन जाएँगें। अतः ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन करके बड़े नगरों में बढ़ती आबादी को रोका जा सकता है। ऽ तकनीक- 1. खेत का पानी कच्ची नाली बना कर गाद-छन्ना-टंकी में लाएँ। 2. गाद-छन्ना-टंकी में खेत या फील्ड का पानी लाते समय गाद नीचे बैठती जाती है। इस गाद में खेत का गोबर, फर्टिलाइजर, नाइट्रोजन, हरी खाद, आयोडिन तथा अन्य उपयोगी मिनरल होते हैंै। इस गाद को खाद के रूप में पुनः अपने खेत में प्रयोग करें। 3. गाछट (गाद-छन्ना-टंकी) से पानी रीचार्ज कुआँ में जायेगा और रिसाव (ैममचंहम) से जमीन में रीचार्ज होता रहेगा। 4. रीचार्ज कुआँ के ऊपर सरिया को आपस में जोड़ कर ढ़क दें। फिर उसके ऊपर टिनशेड ढ़क दें। टिनशेड को सरिया से मजबूती मिलेगी जिसे सरिया से चारों तरफ पतले तार से बाँध दें। टिनशेड से ढकने पर रीचार्ज कुआँ का पानी भाप बन कर नहीं उडे़गा। टिनशेड में लोहे की कड़ी लगायें ताकि एक आदमी आसानी से बारिश के समय कवर हटा सके। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर रीचार्ज कुआँ का ढक्कन सीमेन्ट कंक्रीट का बना सकते हैं लेकिन तब एक आदमी इसे आसानी से हटा नहीं पायेगा। कवर में लोहे की कड़ी अवश्य लगायी जाय जिससे बरसात मंे कवर को पकड़ कर हटाया जा सके। 5. गाद-छन्ना-टंकी ;ैैब्द्ध सामान्यतः 2श्ग2श्ग2श् की रखें। लेकिन यदि खेत का पानी या लाॅन का पानी या पार्क का पानी रीचार्ज कुआँ में डाला जाता है तो गाछट ;ैैब्द्ध ढ़ाई फीट गहरा, तीन फीट लम्बा तथा दो फीट चैड़ा बना सकता हैं। थोड़ा बड़ा गाछट बनाने का मकसद यह है कि ठोस गाद को बरसात में गाछट में नीचे बैठने के लिए ज्यादा से ज्यादा वक्त मिले। गाछट को अन्दर से सीमेन्ट से प्लास्टर कर दें। जिससे खाद आदि का 80-90 प्रतिशत हिस्सा गाछट में ही थिर (ेमजजसम कवूद) हो जाये। बर्बाद होने के लिए न तो रीचार्ज कुआँ में गिरे और न ही बारिश में बहकर यह सोना सा कीमती खाद नाले में जाए। गाछट को अन्दर से सीमेन्ट से प्लास्टर कर दें इससे गाछट की सफाई में मदद मिलेगी। यह गाद जो बारिश के पानी से खेत होकर गाछट ;ैैब्द्धमें इकट्ठा होता है वह उपजाऊ मिट्टी (।ससनअपंस ैवपस) है, खाद है, खाटी सोना है। इसे बहने से किसानों का पैसा बर्बाद होता है। अतः इसे खेत में ही उपयोग में लाएँ। 6. छत पर ईशान कोण (उत्तर-पूरब की दिशा को सामान्यतः वास्तुशास्त्र के हिसाब से नीचे (स्वूमत) रखा जाता है। वहीं पर पानी कन्डुइट पाइप (ब्वदकनपज च्पचम) से नीचे लाएँगे और गाछट ;ैैब्द्ध होकर रीचार्ज कुआँ में ले जाएँगे। ऽ बारिश के पानी का घरेलू उपयोग - 1. छत पर का पानी पाइप के मुहाने पर जहाँ जमा होगा वहाँ एक शटर (ैीनजजमत) लगा देंगें। शटर अल्युमिनियम, स्टील या प्लास्टिक दरवाजा बनाने वाले प्लास्टिक का हो सकता है। जब बारिश नहीं होगी यह शटर बन्द रहेगा ताकि पाइप के अन्दर धूलकण, कीडा या कोई बाहरी चीज नहीं आवे। 2. शटर के बाद पानी पाइप में थोड़ा नीचे गिरने के बाद एक फिल्टर लगेगा जो स्टील की जाली या मच्छरदानी की जाली या चीनी या गेहूँ/चावल की बोरी की हो सकती है। 3. स्टील फिल्टर ऐसा हो कि उसमें जंग नहीं लगे। 4. यदि स्टील का फिल्टर है तो नये सफेद टेरीकाॅट कपडे़ का कवर लगाया जाए। 5. कवर के बजाय कपड़े की सफेद छोटी थैली के रूप में हो जिससे होकर गुरूत्वाकर्षण ;ळतंअपजंजपवदंस च्नससद्ध द्वारा पानी पाइप में नीचे उतरते समय छन जायेगा। धूलकण, बरसाती छोटे कीड़े, मच्छर आदि सभी छन जाएँगे। कपड़े की तीन ऐसी थैलियाँ तैयार रखें। साफ करके आवश्यकतानुसार समय-समय पर बदलते रहें। 6. इसी पानी में ब्लीचिंग पाउडर (200 लीटर में 01 ग्राम) डाल दें तो यह पानी बाथरूम, रसोईघर दोनों जगह काम आयेगा। यह पानी पूरी तरह शुद्ध है। 7. बारिश का पानी पाइप से बाथरूम के बाहर जमीन से कम से कम 6) फीट ऊपर पानी की एक बड़ी टंकी में इकट्ठा किया जा सकता है। आजकल दस हजार लीटर तक की पानी की टंकियाँ बनी-बनायी उपलब्ध हैं, जिसमें बारिश का पानी जमा किया जा सकता है और बारिश के दिनों तथा बारिश समाप्त होने के बाद इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। ु - पुलिस महानिरीक्षक ई॰ओ॰डब्ल्यू॰, उ॰प्र॰