Sunday, March 2, 2014

जल तथा हमारा स्वास्थ्य - प्रो॰ जमाल नुसरत

जल बचाना, धरती से जल निकालना, धरती में जल पहुँचाना, पन बिजली, नदियों को जोड़ना, खेती के लिए जल, दूषित जल- रिसायकिल, रियुज, रिनोवेट, रिजनरेट, पीने हेतु जल, जल और साबुन, भविष्य हेतु जल, खारी जल, मीठा जल, गहराई से जल जहाँ वह भारी धातुओं के सम्पर्क में है, जल एवं यातायात, नम भूमि, बाढ़, सूखा, भुखमरी, स्थान छोड़ना, जल का कानून, सीवर नियम, पर्यावरण पर अधिनियम, किस स्थान पर किस तरह की फसल जो जल की उपलब्धता के अनुकूल हो, जल चक्र, कृत्रिम वर्षा, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, साफ पानी को बहुत समय तक रखना, पानी पर राशन, नहरों एवं नदियों को चैड़ा करने/मोड़ने से नदियों का सूख जाना, पेड़ लगाना, जल एवं बीमारी, जल से इलाज, जल एवं अमृत, तेजाबी पानी, पानी का पैमाना-पीएच वैल्यू, भू-जल, भारी धातुएँ, फ्लोराइड एवं आरसेनिक, टाक्सीसिटी आदि। हमारे शरीर को जल की आवश्यकता, पानी शरीर के अनुकूल है या प्रतिकूल, शरीर के विभिन्न अंगों हेतु जल की आवश्यकता, कम जल उपलब्धता के क्षेत्र में पक्षी, जानवर एवं वनस्पति एवं इसी प्रकार अधिक उपलब्धता आदि के लिए......। इन सभी बिन्दुओं एवं इनके अतिरिक्त जल की महत्ता का प्रत्येक क्षेत्र में गहनता से अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है। जल एवं स्वास्थ्य के विषय में भी अत्यन्त महत्वपूर्ण अध्ययन की आवश्यकता है। जल स्रोतों से तो अब अमृत बनाया जाना प्रारम्भ हो चुका है। मिखाइल सिफीनाफ जो रूस के वैज्ञानिक हैं ने वर्ष 2007 में सिद्ध किया कि यदि हमारे शरीर के पानी का पांचवां भाग (71 प्रतिशत) सामान्य पानी के स्थान पर डयुट्रियम भारी पानी से बदल दिया जाये तो विभिन्न प्रकार की बीमारियों से लड़ने की क्षमता शरीर में बढ़ जायेगी तथा आयु के अनुसार समाप्त हो जाने वाली कोशिकाओं को जीवन दान मिल जायेगा। पक्षियों पर इसका सफल प्रयोग हो चुका है। मनुष्य एवं बड़े जीवों पर भारी पानी से युक्त फल, सब्जी, अण्डा या मांस का प्रयोग किया जाना हेै। शीघ्र ही इस सम्बन्ध में नई जानकारियां प्राप्त होंगी। जल पंचतत्व का वह महत्वपूर्ण तत्व है जो इलाज के लिए दवाई को शरीर के विभिन्न स्थानों में पहुँचा देता है तथा बीमारी को जल की ही सहायता से शरीर के बाहर निकाल देता है। हमारी दो हड्डियों के बीच तरल पदार्थ है जो मुख्यतः जल ही है वह इन हड्डियांे को शक्ति देता है। इस शक्ति का अनुमान हम इस प्रकार भी लगा सकते हैं कि 60 किलोग्राम का व्यक्ति 100 किलोग्राम की बोरी उठाकर आराम से प्रतिदिन चलता-फिरता दिखाई देता है। यदि यह तरल पदार्थ न हो तो हड्डियां जुड़ जायेंगी - एन्क्लोजिंग स्पाण्डुलाइटिस हो सकती है तब वह स्वयं ही अपना भार लेकर चलने योग्य नही रह सकेगा। जल विष को भी शरीर से निकालता है तथा दूषित जल बीमारी और विष को हमारे भीतर पहुँचाने की क्षमता भी रखता है। हृदय शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग है जो हमारे जन्म से भी पहले काम करना प्रारम्भ कर देता है। मृत्यु के तुरन्त बाद भी यदि हृदय को निकाल लिया जाये और स्वच्छ नलिकाऐं लगा दी जायें तो वह पुनः कार्य करना प्रारम्भ कर सकता है। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ का कहना है कि आज हृदय रोग मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है जो कि खून की नाडि़यों में कोलेस्ट्राल (एक प्रकार की वसा का नाडि़यों में चिपक जाना) अधिक हो जाने से नाडि़यां एक सीमा तक बन्द हो ताती हैं। यदि नीबू-पानी की मात्रा का नित्य सेवन किया जाये तो कोलेस्ट्राल सम्बन्धी समस्या से बचा जा सकता है। ऐसी ही स्थिति शरीर के अन्य अंगों की है। अधिक उपयोगी जानकारी तो डाक्टर ही दे सकते हैं, परन्तु सामान्य रूप से निम्न जानकारियां हमारे लिए उपयोगी हैं। ऽ जल ही हमारे हृदय में रहकर इसको धड़काने का काम किया करता है। हृदय की बेतरतीव धड़कन को भी मात्र जल की उचित मात्रा सेवन करने से ही ठीक किया जा सकता है। ऽ जल ही आवश्यक भोजन से बने विशेष भाग को शरीर में एक सीमा तक पहुँचाता या घोलता है। ऽ जल की सहायता से मल, मूत्र, पसीना, छींक, उल्टी, मवाद आदि जो विष हैं शरीर बाहर फेंकता है। ऽ जल का पाचन क्रिया से सीधा सम्बन्ध है, जल पाचन में सहायक है। ऽ जल ही यकृत (लीवर) में निर्मित अवांक्षित पदार्थों को मूत्र में परिवर्तित करता है और बाहर निकालता है। ऽ जल हड्डियों के सिरों में पहंुचकर शक्ति देता है। इसी की कमी से गठिया तथा शरीर तथा हाथ-पैर की लम्बाई छोटी बड़ी हो सकती है। ऽ हमारे मस्तिष्क में 80 प्रतिशत जल है तथा अधिक दिमागी कार्य करने/चिन्ता/गुस्सा करने से इसमें कमी आ जाती है तथा स्मरण शक्ति घट जाती है, जिसे अतिरिक्त पानी पीकर पूरा किया जा सकता है। ऽ कुछ चिकित्सकों ने तो यहाँ तक कह दिया है विभिन्न शारीरिक व्यथायें जैसे- कब्ज, सिरदर्द, गुर्दा, यकृत, फेफड़े एवं बड़ी आंत के कैंसर, पेट की जलन, कोलेस्ट्राल का बढ़ी मात्रा का शरीर के विभिन्न भागों में जमने से उनका काम न करना, आंखों का पानी सूख जाना, आँसू न आना, ब्लड प्रेशर, गठिया, टी.वी., कमजोरी, सूखी त्वचा, थकावट आदि का प्रमुख कारण शरीर में पानी की कमी ही है। ऽ अत्यधिक सर्दी, गर्मी लगने की दशा में शारीरिक तापक्रम का ही जल ग्रहण करने से इससे बचा भी जा सकता है। ऽ गुर्दा का मुख्य कार्य है यूरिक अम्ल, यूरिया तथा लैक्टिक अम्ल को शरीर से हटाना, यह सभी तीनो जल में घुलनशील हैं। यदि शरीर में जल की पर्याप्त मात्रा न होगी तो यह बिना घुले ही गुर्दे में रूक जायेंगे और धीरे-धीरे पथरी का रूप धारण कर लेंगे। यही स्थिति पित्त की पथरी की है। यदि पानी के ग्रहण का कार्यक्रम उचित है तो पथरी के मुख्य कारण से बचा जा सकता है। पथरी के अन्य कारण जैसे अधिक आयु, कम क्रियाशीलता, परिवार आधारित, व्यवसाय आधारित, भोजन आधारित आदि कारणों से पथरी के बनने से बचा जा सकता है। ऽ शरीर में उपलब्ध जल सांस लेते समय हवा को नम तथा गर्म कर देता है तथा यह उसी तापक्रम पर हमारे फेफड़ों में पहुँचती है जिसकी उसे आदत व आवश्यकता है। ऽ मुंह में उपलब्ध लार मुँह में आया पानी एवं भोजन को घोलने, चबाने एवं घूंटने में सहायता करता है। ऽ जल ही त्वचा को स्वस्थ एवं चमकीला बनाता है। ऽ जल की उचित समय पर (खाने से पूर्व-हाँ तथा खाने के बाद-नहीं) उचित मात्रा में (एक समय में अधिक नहीं), उचित प्रकार का (तापक्रम-न तो बहुत गर्म और न बहुत ठंडा हो, परन्तु स्वच्छ हो) ग्रहण करना दवाई के समान है। इसीलिए कहा जाता है कि भोजन को पीना चाहिए और जल को खाना चाहिए, ऐसे ही जल को अमृत की संज्ञा दी जा सकती है। ऽ सिरदर्द एवं कमजोरी में जल ग्रहण करने से लाभ है। भूख न लगने में दवाई, जोड़ों के दर्द में वह अत्यन्त लाभप्रद है। ऽ जल ग्रहण अत्यन्त स्फूर्ति व शक्तिवर्धक है। जल की उचित मात्रा - एक दिवस में एक व्यक्ति को जल की मात्रा की गणना करना बहुत सरल है। व्यक्ति के किलोग्राम भार को यदि 0.0345 से गुणा करें तो उपलब्ध किलोग्राम जल ही वह मात्रा है जो पूरे दिन में उसे पीना है, ज्ञात हो जायेगी। इसे उचित रूप में पूरे दिन हेतु विभाजित किया जा सकता है। वर्षा ऋतु में हवा में नमी होने के कारण तथा सर्दियों में कम पसीना निकलने के कारण इसमें कुछ कमी लाई जा सकती है। इसी प्रकार अधिक गर्मी के समय इसमें बढ़ोत्तरी करना भी स्वास्थ्य के लिए अनुकूल होगा। इस मात्रा का पांचवां भाग प्रातः काल खाली पेट पीने से सर्वाधिक लाभ बताया जाता है। खाना खाने पूर्व कुछ घूंट पानी पीना हितकर है, परन्तु खाना खाने के तुरन्त बाद पीना अहितकर है। खाने के एक घंटे के बाद पानी पीना उचित होगा। तुम्हारा पीना स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य की है निशानी। ु - रोशनी, 509/148, पुराना हैदराबाद, लखनऊ-226007 फोन-9415029050, 0522-2780679