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Monday, March 3, 2014
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अब प्राकृतिक रूप से पकाएं कच्चे फल - डाॅ॰ राज किशोर एवं डाॅ॰ वी॰के॰ चैधरी
देश में जनसंख्या बढ़ने तथा स्वास्थ्य के प्रति लोगो की बढ़ती जागरूकता से राष्ट्रीय स्तर पर बड़े शहरों से लेकर सुदूर गाँवों तक बाजार में विभ...
शून्य लागत (जीरो बजट) प्राकृतिक कृषि अभियान प्रवर्तक- श्री सुभाष पालेकर
गांव का पैसा गांव में गांव का पैसा शहर में नहीं शहर का पैसा गांव में भारत में हरित क्रान्ति के नाम पर अन्धा...
भारतीय विभागों के घोष वाक्य -
भारत के घोषित ध्येय वाक्य, हैं सांस्कृतिक विरासत के उदघोषक। सब में अमृत तत्व भरा है, स्वयमेव भारतीयता के हैं पोषक।।1।। ‘सत्यमेव जयते’ ज...
शून्य लागत (जीरो बजट) प्राकृतिक कृषि अभियान - गोपाल उपाध्याय
भारत में हरित क्रान्ति के नाम पर अन्धाधुन्ध रासायनिक उर्वरकों हानिकारक कीटनाशकों, हाईब्रिड बीजों एवं अधिकाधिक भूजल उपयोग से भूमि की उर्वरा ...
नदियों के किनारे स्थित तीर्थों का सम्यक विकास -डा॰ महेन्द्र प्रताप सिंह
हमारे देश के प्रायः सभी प्राचीन तीर्थस्थल नदियों के किनारे स्थित हैं। नदियों की स्वच्छता हेतु चलाए जा रहे विभिन्न प्रयत्नों के क्रम में नद...
शून्य लागत प्राकृतिक खेती.एक एकड़ खेत का माॅडल.- हिमांशु गंगवार
किसानों के लिए शून्य लागत प्राकृतिक खेती वरदान सिद्ध हो सकती है। जिसके लिए आवश्यक है, किसान के पास एक देशी गाय और मिश्रित खेती करने का तरी...
भूगर्भ जल की समस्या-समाधान वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग)
वर्तमान परिदृष्य में शहरीकरण एवं बढ़ती हुई आबादी के कारण प्राकृतिक जल स्त्रोतों का अत्यधिक एवं अव्यवस्थित ढंग से दोहन हो रहा है, जिससे स्वच...
लोक भारती द्वारा आयोजित/संयोजित/समन्वित कार्यक्रमों में पधारे विशिष्ट व्यक्ति
साक्षराता प्रशिक्षण वर्ग, लखनऊ, 16, 17 अगस्त, 1992 डा॰ कृष्णौतार पाण्डे, निदेशक प्रौढ शिक्षा, उत्तर प्रदेश श्री एस॰एस॰यदुवंशी, संयुक्त नि...
गौ आधारित शून्य लागत, आध्यात्मिक खेती - लोक भारती प्रतिनिधि
सुभाष पालेकर सतत साधना का नाम है। प्रारम्भिक जीवन से ही आध्यात्म के साथ सामाजिक भाव होने के कारण वह प्रायः विनोवा जी से मिलने जाया करते थे...
रबी में गन्ने की सहफसली खेती - हिमांशु गंगवार
खेती किसानी में समस्यायें विगत कुछ वर्षों से गुणात्मक रूप से बढ़ रही हैं। लेकिन यह सभी समस्यायें मनुष्य द्वारा निर्मित हैं। मनुष्य के तीन ...
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गंगा समग्र शिखर सम्मेलन - दिनाँक - 19 जून, 2013, द...
एक दृष्टि में - लोक भारती उत्तर प्रदेश की वर्तमान ...
स्वागत करना होगा निश्चित निष्कलंक अवतार का - आचार्...
एक मन्दिर से जागा: लोक सेवा का मंगल भाव - आचार्य स...
पेड़ हैं प्रकृति का अमूल्य वरदान। - संकलित
जब गोमती जल वरदान बना! - अखिलेश कुमार
भारतीय संस्कृति में त्रिदेवों की शाश्वत वैज्ञानिक ...
जल संकट के समाधान का प्रयास - देवकी नन्दन ‘शान्त’
पकृति को संवारें निर्माण को सहेजें - प्रो॰ (डा॰) र...
उत्तराखण्ड के आपदा प्रबन्धन पर फिर सवालिया निशान ...
सहायता को बढ़े हाथ - रंजीत सिंह ‘ज्याला’
अब सधे कदमों की दरकार है। - डा॰ दाताराम पुरोहित
विनाश का माडल - एम॰सी॰ मेहता
पहाड़ पर प्रलय - मनोज द्विवेदी
प्रकृति से छेड़छाड़़ विनाशक - दिनेश रावत
कुदरत को छेड़े बिना आगे की राह तलाशनी होगी। - शेखर...
यदि नहीं चेते तो हराती रहेगी आपदा - रण विजय सिंह
ये प्रलयंकारी दृश्य हमें चेतावनी दे रहे हैं - अवधे...
आंकड़ों, तथ्यों और संकेतों को समझें - ध्रुवज्योति ...
मैं निर्मल-पावन सरिता हूँ - गौरी शंकर ‘‘विनम्र’’
सेना को प्रणाम! - प्रेम बड़ाकोटी
‘नगाधिराज’ क्यों हैं ‘नाराज’!!
अपने हित में हिमालय और उसकी पीड़ा को समझें - संकलित
प्रलय संकेतों पर गौर कीजिए - हृदय नारायण दीक्षित
प्रकृति चेतावनी देती है, मगर हम चेतते नहीं - वी॰के...
अपने हाथों रची गई तबाही - कौशल किशोर
विकास की विभीषिका - भरत झुनझुनवाला
प्रलय का शिलालेख - अनुपम मिश्र
विश्व शान्ति हेतु ’जल जन जोड़ो’ -राजेन्द्र सिंह, ज...
सृजन का संकल्प-
केदार विनाश-त्रिवेणी प्रसाद दुबे ‘मनीष’
लोक भारती उत्तर प्रदेश की सामाजिक गतिविधियाँ और उस...
बड़ा बनने के लिए "देना सीखो" - - डेविड जे॰ श्वार्टज
स्वास्थ्य के दिशा निर्देशक हमारे संस्कार - डा॰ के॰...
गौ आधारित शून्य लागत, आध्यात्मिक खेती - लोक भारती ...
कर्तव्य की अनूठी पहल - लोक भारती प्रतिनिधि
‘महाराष्ट्र’, हिवड़े बाजार के युवाओं ने दिखाई जीवन...
कामधेनु गाय! अभी भी है - गोपाल मोहन उपाध्याय
कृषि के सम्बन्ध में वैज्ञानिकों का कहना है! खेती ...
अपने आप को पहचानो ! - संकलित
राजस्थान की मरूभूमि में जागा स्वाभिमान! -प्रियंका ...
जीवन में सफलता का राज..., चित्र में चरित्र चाहिए? ...
‘देवास’ बनाने का संकल्प जागा! फिर होगा महोबा ‘पानी...
चरित्र जीवन का दर्पण है - संकलित
पानी सहेजने की परम्परागत तकनीक आखिर काम आई ‘भगीरथ ...
यह वर्ण मालिका जीवन की - दयानन्द जडि़या ‘अबोध’
युवा पीढ़ी में आज भी है बड़ों के प्रति आदर और कर्त...
लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल के सपनों का भारत - ...
जल क्षेत्र संरक्षण से गोमती संरक्षण संभव! - विश्वन...
पर्वों की ऋतु शरद् - डा०॰ नवलता
दीपों का त्योहार - गौरी शंकर वैश्य ‘विनम्र’
सम्पादक की कलम से - रामसरन
लोकतंत्र विशेषांक- फरवरी, २०१४
सम्पादक की कलम से - रामसरन
जनतंत्र जीवनशैली है - हृदयनारायण दीक्षित
सामाजिक भूमिका में लोक भारती उत्तर प्रदेश की पहल -...
जब जब ‘माँ’ तुमसे मिलता हूँ - प्रो॰ हेमराज दिवाकर
स्वस्थ लोकतंत्र के लिये जरूरी है न केवल मतदान वरन्...
लोकतन्त्र के भाग्य विधाता हे! मतदाता - त्रिलोचन शा...
राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत लोक भारती के अजीत - गोप...
समय की कसौटी पर खरा भारत का प्रजातन्त्र - भंवर जित...
भारत के पड़ोसी, बांगलादेश में प्रजातन्त्र की भयावह...
प्रेरणा दीप रूप किशोर माहेश्वरी को शत्-शत् नमन - प...
आओ मिलकर लोकतंत्र के लड्डू खाएं - अनूप मणि त्रिपाठी
लोकतन्त्र में बढ़ता सामन्तवाद - सुधांशु रंजन
मतदान महादान - कृष्णानन्द राय
भारतीय लोकतंत्र के बदलते प्रतिमान: एक अवलोकन वर्तम...
लोकतंत्र: एक दृष्टि- डा॰ अलका
प्रजातन्त्र और सोशल मीडिया = राजेन्द्र शर्मा
नींव के पत्थर - संकलन: श्याम सिंह सैनी
भागीदारी की छटपटाहट- डा॰ गोविंद सिंह
लोकतन्त्र महोत्सव का परिदृष्य होगा लाइव?
भारतीय लोकतन्त्र और युवा आकांक्षाएं = संकलित
दोहरी सत्ता के परिणाम - ए॰ के॰ त्रिपाठी
परिवार और समाज - बेला गर्ग
‘सेक्यूलरवाद’ भारत की समस्त राजनीतिक चेतना को भ्रम...
विचार बीथिका - संकलित
सोशल मीडिया और वर्तमान चुनाव को लेकर नई बहस - डा॰ ...
हमें सम्पूर्ण गणतन्त्र की पगडन्डी दिख गई है - किर...
लोकतंत्र में सामाजिक पूंजी-डा॰ रेखा त्रिपाठी
क्या भारत एक और महाभारत की तैयारी कर रहा है? - हृद...
सनातन मूल्य एवं लोक प्रशासन - डा॰ नवलता
भारतीय लोकतंत्र में पुनर्विन्यास - अरूण कान्त त्रि...
भारतीय लोकतन्त्र के सम्बन्ध में महापुरूषों के विचा...
राम राज्य की लोकतान्त्रिक अवधारणा - डा॰ महेन्द्र प...
क्या लोकतंत्र यही है? - दयानन्द जडि़या ‘अबोध’
‘संसद’ लोकतन्त्र की गंगोत्री है। - राष्ट्रपति, डा०...
लोकतन्त्र विशेषांक - सम्पादक की कलम से लोकतन्त्र...
भूगर्भ जल की समस्या-समाधान वर्षा जल संचयन (रेन व...
आज जल नीति में संशोधन की आवश्यकता - म॰ वि॰ कुबड
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नीर, नदी, पर्यावरण हेतु वृक्षारोपण महात्म्य
बुन्देलखण्ड जल समस्या और समाधान - ई॰ विश्वनाथ खेमका
लोक भारती उत्तर प्रदेश प्रगति विवरण
प्रदूषण एवं स्वास्थ्य - डा॰ महेश भार्गव
अपने जीवन शैली में बदलाव लाकर पर्यावरण से दोस्ती ...
पर्यावरण संकट और ग्लोबल वार्मिंग -
उ॰प्र॰ भूगर्भ जल संरक्षण एवं विकास (प्रबंधन, नियंत...
जनसंख्या विस्फोट और जल संकट - मीनाक्षी अरोड़ा
जल संकट और उसका समाधान! तालाब परंपरा का पुनरोद्धार...
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