Sunday, March 2, 2014

उ॰प्र॰ भूगर्भ जल संरक्षण एवं विकास (प्रबंधन, नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2010-मुख्य बिन्दु यह ड्राफ्ट अधिनियम प्रदेश में भूगर्भ जल के वर्तमान परिदृष्य पर आधारित है जिसमें भूजल विकास (दोहन) एवं भूगर्भ जल में गिरावट के ट्रेंड के अनुसार सुरक्षित, सेमी क्रिटिकल एवं अति दोहित श्रेणी में वर्गीकृत यूनिट्स/क्षेत्र के अनुसार विभिन्न भूजल उपभोक्ताओं हेतु प्राविधान किये गये हैं। प्रस्तावित विधेयक की मुख्य बातें निम्न प्रकार हैंः- इस विधेयक के अन्तर्गत ’उ0प्र0 भूगर्भ जल प्राधिकरण’ की स्थापना की जायगी, जिसके अध्यक्ष कृषि उत्पादन आयुक्त होंगे एवं निदेशक भूगर्भ जल विभाग, उ0प्र0 इसके सदस्य-सचिव होंगे। यह प्राधिकरण राज्य सरकार के नियंत्रण एवं देखरेख में कार्य करेगा। 1. प्राधिकरण के निर्देशन एवं देखरेख में ऐसे क्षेत्रों हेतु जहाँ भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, वर्षा जल संचयन एवं भूजल स्तर प्रतिपूर्ति हेतु वैज्ञानिक दिशा निर्देशों पर आधारित योजनाएँ जैसे चेक-डैम व तालाबों का निर्माण, पुराने तालो का जीर्णाद्वार, झीलों व तालाबों द्वारा जल-संरक्षण, नगरीय क्षेत्रों में छतो पर प्राप्त वर्षा जल का संचयन आदि। 2. फसल-चक्र में समुचित बदलाव करके कम पानी चाहने वाली फसलों को प्रोन्नत किया जायेगा। 3. पंजीकृत सेवा-प्रदाता नियुक्त किये जायेगें। सेवा प्रदाता के माध्यम से प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि भूजल संसाधनों का दोहन भूजल स्तर की प्राकृतिक प्रतिपूर्ति से अधिक न हो। अन्यथा की स्थिति में भूगर्भ जल संसाधनों की प्रतिपूर्ति हेतु कदम उठाये जायेगें। 4. प्राधिकरण द्वारा भूगर्भ जल से सम्बन्धित सूचना पर आधारित आंकड़े रखे जायेंगें। 5. ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपभोगकर्ता संघ बनाये जायंेगे। 6. शहरी क्षेत्रों में आवासीय कल्याण संघों की स्थापना की जायेगी। 7. व्यक्ति विशेष या संगठन को पंजीकृत सेवा प्रदाता नियुक्त किया जायेगा। इनका पंजीकरण दो वर्ष के लिये होगा एवं तत्पश्चात् कार्य-कलापों का आकलन करके नवीनीकरण किया जायेगा। 8. विभिन्न प्रकार के भूगर्भ जल उपभोगकर्ताओं द्वारा भूजल निकासी की सीमाओं का निरीक्षण सेवा प्रदाता का उत्तरदायित्व होगा। साथ ही जल-उपभोगकर्ता द्वारा प्रयुक्त पम्प सेट का साइज सक्शन व डिलीवरी पाइप, कूप का निर्माण, वर्षा जल संचयन एवं प्रतिपूर्ति संरचना, भूजल में प्रतिपूर्तित पानी की गुणवत्ता आदि की जांच एवं परीक्षण भी सेवा प्रदाता द्वारा किया जायेगा। 9. वर्तमान में कार्यरत एवं नये बल्क यूजर्स (बड़े उपभोक्ता) का पंजीकरण किया जायेगा। 10. यदि कोई ’पंजीकृत कूप’ खराब/असफल होता है तो इसकी सूचना तत्काल बड़े उपभोक्ता द्वारा प्राधिकरण को दी जायेगी। 11. प्रदेश की सभी ड्रिलिंग एजेंसी जिला स्तर पर पंजीकरण हेतु प्राधिकरण में आवेदन करेंगी। एजंेसी का पंजीकरण तीन वर्ष के लिए किया जायेगा, जिसको बाद में तीन वर्ष हेतु बढ़ाया जा सकेगा। 11. 1. वोरवैल/नलकूप एवं परित्याग किये गए कूप के निर्माण/पुनर्निर्माण के सम्बन्ध में प्राधिकरण अथवा राज्य सरकार द्वारा बच्चों के कूप में फँसने/गिरने की घटनाओं को रोकने हेतु निर्देश दिये जायेंगे। 11. 2. जिला मजिस्ट्रेट या प्राधिकरण द्वारा अधिकृत व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि सम्बन्धित ड्रिलिंग एजेंसी द्वारा वोर होल/नलकूप की स्थिति की समुचित देखभाल एवं जाँच के सम्बन्ध में दिये गये दिशा निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। 11. 3. सभी एजेंसी/व्यक्तियों को प्राधिकरण/विभाग से परित्यक्त वोर वैल/नलकूप के सम्बन्ध में यह प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा कि परित्याग किये गये वोर वैल/नलकूप को भूतल तक भर दिया गया है। 11. 4. पंजीकृत छिद्रण एंजेसी को प्राधिकरण के पास जमानत के रूप में निर्धारित धनराशि जमा करनी होगी। यदि यह पाया जाता है कि एजेंसी ने सरकार द्वारा निर्देशों/कर्तव्यों का पालन नही किया है, तो पंजीकरण प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया जायेगा एवं जमानत धनराशि जब्त कर ली जायेगी। 12. अति दोहित/क्रिटिकल क्षेत्रों में विद्यमान एवं नये उपभोगकर्ताओं का पंजीकरण किया जायेगा। 12. 1. यदि केाई पंजीकृत भूगर्भ जल उपभोक्ता किसी पंजीकृत कूप में कोई सुुधार या बदलाव करना चाहता है, उसे इस कार्य अनुमति प्राधिकरण से लेनी होगी। 12. 2. यदि कोई विद्यमान अथवा नया बड़ा उपभोक्ता बिना पंजीकरण कराये भूगर्भ जल का दोहन करता हुआ पाया जाता है, तो वह अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत दण्डित किया जा सकता है। 13. विद्यमान एवं नये व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं का पंजीकरण किया जायेगा। 13. 1. पंजीकरण हेतु आवेदन की स्वीकृति की लम्बित अवधि में विद्यमान भूजल उपभोक्ता उसी प्रकार भूजल का उसी मात्रा में निरंतर उपयोग करता रहेगा जिसके लिए वह आवेदन की तिथि से पूर्व प्राधिकृत था। 13. 2. यदि कोई पंजीकृत भूजल उपभोक्ता किसी पंजीकृत कूप में कोई सुधार या बदलाव करना चाहता है, उसे इस कार्य की अनुमति प्राधिकरण से लेनी होगी। 13. 3. यदि कोई विद्यमान/नया व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ता बिना पंजीकरण कराये भूगर्भ जल का दोहन करता हुआ पाया जाता है, तो वह अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत दण्डित किया जा सकता है। 14. शहरी क्षेत्र 1. 0.5 अश्व शक्ति तक के पम्पसेट प्रयुक्त करने वाले भूगर्भ जल उपभोक्ताओं हेतु फिलहाल कोई निषेध नहीं होगा। 2. 0.5 अश्व शक्ति से अधिक के पम्पसेट प्रयुक्त करने वाले उपभोक्ताओं को आवासीय कल्याण संघो के माध्यम से स्वयं नियंत्रित रहना होगा। 3. पम्पसेट विक्रेताओं हेतु यह आवश्यक होगा कि वे 0.5 अश्व शक्ति से अधिक के पम्पसेट क्रेताओं का पूर्ण विवरण रखें एवं उनकी पहचान एवं पते को सत्यापित करके ही पम्पसेट का विक्रय करें। 4. बड़े उपभोक्ताओं केा क्षेत्र विशेष के अनुसार वर्षा जल संचयन/प्रतिपूर्ति तकनीक को अपनाना होगा। नये बड़े उपभोक्ता अपने निजी नलकूप बना सकेगें। 15. ग्रामीण क्षेत्र 1. फिलहाल 7.5 अश्व शक्ति तक के पम्पसेट स्थापित करने पर कोई प्रतिबन्ध नही होगा। 2. 7.5 अश्व शक्ति से अधिक के पम्पसेट प्रयुक्त करने वाले उपभोक्ताओं को ’जल उपभोक्ता संघो’ के माध्यम से स्वयं नियंत्रित रहना होगा। 3. इन उपभोक्ताओं को वर्षा जल संचयन/प्रतिपूर्ति तकनीक अपनानी होगी। 4. बड़े उपभोक्ताओं को भी वर्षा जल संचयन/प्रतिपूर्ति तकनीक आवश्यक रूप से अपनानी होगी। 16. बड़े उपभोक्ताओं को वर्ष में दो बार माह अप्रैल एवं अक्टूबर में पजीकृत सेवा प्रदाता से निरीक्षण कराना होगा। इनसे प्राधिकरण/शासन द्वारा भूजल दोहन हेतु शुल्क भी वसूला जा सकता है। अति दोहित/क्रिटिकल क्षेत्र (स्तर 2 व 3) 17. इन क्षेत्रों में निजी व सरकारी दोनों प्रकार के नये नलकूप लगाने पर प्रतिबन्ध रहेगा। 18. इन क्षेत्रों में पंजीकृत सेवा प्रदाता के मार्ग दर्शन में पेयजल आपूर्ति एवं मानवीय उपभोग हेतु नलकूप लगाने की अनुमति दी जा सकेगी। 18. 1. अति दोहित एवं क्रिटिकल क्षेत्रों में भूजल के विद्यमान एवं नये उपभोक्ताओ को क्षेत्र विशेष हेतु प्राधिकरण द्वारा निर्धारित वर्षा जल संचयन तकनीक को आवश्यक रूप से अपनाना होगा। इस कार्य में पंजीकृत सेवा प्रदाता का पर्यवेक्षण एवं मार्ग दर्शन लिया जायेगा। 18. 2. बड़े उपभोक्ताआंे हेतु प्राधिकरण द्वारा भूगर्भ जल के दोहन की सीमा निर्धारित की जायेगी। 18. 3. सत्यापित करने पर यदि प्राधिकरण के संज्ञान में आता है कि पंजीकृत सेवा प्रदाता द्वारा वर्षा जल संचयन/प्रतिपूर्ति संरचना के सम्बन्ध में दी गई सूचना सही नहीं है, तो सेवा प्रदाता को उत्तरदायी माना जायेगा एवं अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार दंडित किया जायेगा। 19. व्यावसायिक उपभोक्ता एवं उद्योगांे हेतु भूगर्भ जल दोहन के प्राविधान 19. 1. नलकूप लगाने के इच्छुक व्यावसायिक अथवा औद्योगिक उपभोक्ताओं को पंजीकृत सेवा प्रदाता के समक्ष आवेदन करना होगा एवं सेवा प्रदाता के मार्ग दर्शन में ही नलकूप का छिद्रण/निर्माण करना होगा। भूगर्भ जल के दोहन की सीमा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित की जायेगी। 19. 2. वर्ष मे दो बार माह अप्रैल एवं अक्टूबर में भूगर्भ जल उपभोक्ता को पंजीकृत सेवा प्रदाता से निरीक्षण कराना होगा। इस निरीक्षण में वर्षा जल संचयन/प्रतिपूर्ति संरचना की सफलता को जांचने हेतु भूगर्भ जल दोहन की सीमा, पम्पसेट का साइज, सक्शन एवं डिलीवरी पाइप, भूजल में प्रतिपूर्तित जल की गुणवत्ता आदि की समीक्षा की जायेगी। 19. 3. सरकार द्वारा व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं से भूगर्भ जल के दोहन हेतु वार्षिक शुल्क वसूला जा सकता है। 19. 4. अति दोहित/क्रिटिकल क्षेत्र, स्तर 02 व 03 में व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा कोई नलकूप नहीं लगाया जायेगा। 19. 5. यदि कोई पुराना कूप अपना जीवन पूर्ण करने अथवा अन्य कारण से खराब हो जाता है, तो उसी अथवा पाश्र्व में स्थित भूखण्ड में समान क्षमता एवं विशिष्टियों का नया नलकूप लगाने हेतु व्यावसायिक या औद्योगिक उपभोक्ता को मना नहीं किया जायेगा। 20. पंजीकृत सेवा प्रदाता द्वारा आवेदक को नलकूप लगाने का परामर्श देते समय निम्न बिन्दुओ का ध्यान रखा जायेगा। 1. पानी के प्रयोग करने के उद्देश्य 2. दूसरे प्रतियोगी उपभोक्ताओं की उपस्थिति 3. पहले से प्रयुक्त विद्यमान नलकूप 4. छिद्रित किये जाने वाले कूपो की संख्या 5. कूप की गहराई एवं डिजाइन (पानी की आवश्यकता के अनुसार निर्धारित की जायेगी) 6. भूगर्भ जल की उपलब्धता 7. निकाले जाने वाले भूगर्भ जल की मात्रा 8. भूगर्भ जल संरचना की आपस में दूरी 9. लंबी अवधि में भूगर्भ जल स्तर का पैटर्न 10. नलकूप के निकट पेयजल की उपलब्धता पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना 11. जल आपूर्ति के अन्य संसाधनों पर पड़ने वाला प्रभाव 12. विद्यमान जल आपूर्ति प्रणाली के साथ तारतम्य 13. प्रदूषण को नियंत्रित अथवा रोकने हेतु उपायो की उपलब्धता 14. वर्षा जल संचयन। 21. भूगर्भ जल उपभोक्ता एवं सेवा प्रदाता हेतु प्राधिकरण के अधिकार प्राधिकरण या उनके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति को निम्न अधिकार होगेंः- 1. किसी निजी अथवा सरकारी संपत्ति में प्रवेश करके भूमि या धरातल अथवा भूगर्भ जल की जांच अथवा मापन का अधिकार। 2. छिद्रित अथवा छिद्रित किये जा रहे नलकूप एवं वहां से निकाली गई मिट्टी एवं अन्य पदार्थोंे का निरीक्षण। 3. ऐसे नलकूपों से निकाली गई मृदा एवं अन्य पदार्थ अथवा पानी के नमूने लेना। 4. नलकूप छिद्रित करने वाले व्यक्ति/संस्था को तीन माह तक छिद्रण के समय निकली मृदा अथवा अन्य पदार्थों के नमूने सुरक्षित रखने हेतु निर्देश देना। 5. आवश्यक अभिलेख/रिकार्ड का निरीक्षण एवं उनकी प्रतिलिपि प्राप्त करना एवं छिद्रित नलकूप के स्ट्रेटा, पानी की गुणवत्ता, पानी मिलने का स्तर आदि के सम्बन्ध में जानकारी एकत्र करना। 6. भूजल उपभोक्ता को भूजल दोहन की संरचना पर जल मापन यंत्र स्थापित करने हेतु निर्देशित करना। 7. अवैधानिक रूप से नलकूप में प्रयुक्त उपकरण/सयंत्र को जब्त करना एवं किये गये कार्य को पूर्ण/आंशिक रूप से तोड़ना। 8. आवश्यकता पड़ने पर व्यावसायिक, औद्योगिक एवं बड़े भूगर्भ जल उपभोक्ताओं के प्रतिष्ठान का निरीक्षण। 9. अधिनियम के प्राविधानों को न करने वाले भूगर्भ जल उपभोक्ता की जलापूर्ति बंद करना, अवैध रूप से निर्मित किसी जल सरंचना को तोड़ना। 10. अधिनियम के विरूद्ध किये जा रहे कार्य के स्थान में प्रवेश करके तलाशी लेना एवं कार्य करने वाले व्यक्ति/संस्था को भूगर्भ जल का उपयोग/दोहन रोकने के निर्देश देना। 11. स्थानीय निकायों, संस्थाओं, उद्योगों, कम्पनी, राजकीय विभागों, व्यक्तियों अथवा अन्य सम्बन्धित को वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण हेतु दिशा निर्देश देना। 12. जिला, ब्लाक व ग्राम पंचायतों एवं शहरी निकायों को भूजल प्रतिपूर्ति संरचना के निर्माण हेतु उनके बजट का कुछ भाग आवंटित करने हेतु दिशा निर्देश देना। 13. सेवा प्रदाता को आवश्यक दिशा निर्देश देना। 14. इस अधिनियम एवं उसके अधीन नियमों के उद्देश्यों का अनुपालन कराने हेतु आवश्यक शक्तियों का प्रयोग करना। पानी की दरें प्राधिकरण द्वारा बजट अधिसूचना के द्वारा निजी नलकूपो से पानी विक्रय की दरे सूचित की जायेगी। भूगर्भ जल का प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा जन जागरण अभियान चलाकर भूगर्भ जल का प्रदूषण रोकने के ठोस उपाय कियें जायेगें। प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि कोई व्यक्ति/संस्था/उद्योग भूगर्भ जल को प्रदूषित न करने पाये। भूगर्भ जल के उपभोक्ताओं द्वारा ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में दो नलकूपों के बीच की दूरी भूवैज्ञानिक मानकों के अनुसार रखी जायेगी। जल मापन यंत्र प्राधिकरण द्वारा भूगर्भ जल उपभोक्ता को भूगर्भ जल-निकासी संयत्र पर ’जल मापन यंत्र’ लगाने हेतु निर्देशित किया जायेगा। यदि 60 दिवस के अन्दर उपभोक्ता द्वारा जल मापन यंत्र नहीं लगाया जाता है, तो प्राधिकरण द्वारा स्वयं यह यंत्र लगाकर उसका मूल्य उपभोक्ता से वसूला जायेगा। प्राधिकरण के सभी सदस्य एवं कर्मचारी गण इस अधिनियम के अन्तर्गत कर्तव्यों का निर्वहन करते समय भारतीय दंड संहिता की धारा-28 के अन्तर्गत राजकीय सेवक (पब्लिक सर्वेन्टस) माने जायेगें। इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी अपराध की विवेचना मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट से निचले स्तर के न्यायालय में नहीं की जायेगी भूगर्भ जल की प्रतिपूर्ति प्राधिकरण द्वारा 100 वर्गमीटर एवं अधिक क्षेत्रफल वाले सभी आवासीय/व्यावसायिक एवं अन्य प्रतिष्ठानों को समुचित ’’वर्षा जल संचयन संरचना’’ का निर्माण निर्धारित समय में कराने हेतु निर्देश जारी किये जांयेगे। अनुपालन न करने की स्थिति में प्राधिकरण द्वारा अर्थदण्ड के साथ समुचित संरचना का निर्माण स्वयं करा दिया जायेगा। अपराध एवं दण्ड (धारा-34) यदि कोई भूगर्भ जल उपभोक्ता, पंजीकृत सेवा प्रदाता अथवा कोई कूप छिद्रण संस्था इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी नियम/प्राविधान का अनुपालन करने में विफल होती है अथवा प्राधिकृत अधिकारी को उसके अधिकारो का प्रयोग करने से रोकता है तो निम्न प्रकार दंडित किया जायेगा। 1. प्रथम बार अपराध के लिये रू0 5000/- तक का अर्थदण्ड। 2. द्वितीय बार या उसके बार अपराध हेतु छः माह तक का कारावास अथवा रू0 10000/- तक का अर्थदंड अथवा दोनों। अपील प्राधिकरण के किसी निर्णय या कार्यवाही से पीडि़त व्यक्ति/संस्था निर्णय/कार्यवाही के सूचित करने के 60 दिवस के अन्दर अपील कर सकती है। ु प्रस्तुतकर्ता - ई0 सत्य प्रकाश शर्मा अधीक्षण अभियंता (से॰नि॰), सिंचाई विभाग, उ॰प्र॰। द्वारा- गंगोत्री कन्सल्टेन्सी सर्विसेज, हजरतगंज, लखनऊ।