अमावस के दिन सम्पूर्ण गोमती के किनारे बहुत बड़ी संख्या में लोग श्रद्धापूर्वक मनौती लेकर स्नान के लिए जाते हैं। हमारे गांव में एक व्यक्ति के शरीर में स्वेत कुष्ठ के दाग हो गये, तो उन्होने भी उसको ठीक होने की मनौती लेकर प्रत्येक अमावस को गोमती में जा कर स्नान करना और फिर वहां से जल लाकर गांव के देवी मन्दिर में देवी का अभिषेक करना यह नियम बना लिया। मैं, क्या गांव के सभी लोग इस विषय को जानते थे और निरन्तर देखते भी थे कि क्या स्वेत दागों में कोई अन्तर आ रहा है या नहीं। एक-दो अमावस स्नान के बाद देखने पर मालुम हुआ कि स्वेत दागों में आश्चर्यजनक ढ़ंग से परिचर्तन आना प्रारम्भ हो गया था। उनका गामेती स्नान का यह क्रम लगभग डेढ साल चला होगा, उनके शरीर के सफेद दाग गायब हो गये और उससे उनको समाज में सामान्य जीवन जीने का पुनः अवसर मिल पाया।
इतना ही नहीं तो, इससे से भी आश्चर्य जनक एक घटना गोमती से जुड़ी है। हमारे गांव के निकट ही एक गांव का मुस्लिम परिवार का व्यक्ति अपनी निसन्तानता के कारण बहुत दुखी रहता था। उसने जब गोमती स्नान और गोमती का जल लाकर देवी जी को चढ़ाने से स्वेत कुष्ठ ठीक होने का समाचार सुना और प्रत्यक्ष आकर देखा, तो उसके मन में भी श्रद्धा जागी। उसके बाद अपने मन में अपनी सन्तान का भाव लेकर नियमित रूप से अमावस्या को गोमती स्नान के लिये नियमित जाने और वहां से जल लाकर देवी का अभिषेक रिने लगा। गोमती के प्रति उसकी श्रद्धा रंग लाई और एक वर्ष के पश्चात उसके घर पुत्र रत्न की सहनाईयां बजीं।
इससे उसका गोमती के प्रति विश्वास इतना दृढ़ हुआ कि उसने एक मुस्लिम परिवार का होने के बाद भी अमावस को गोमती स्नान और उसके बाद उसके जल से देवी अभिषेक का क्रम निरन्तर जारी रखा।
इतना ही नहीं तो, इससे से भी आश्चर्य जनक एक घटना गोमती से जुड़ी है। हमारे गांव के निकट ही एक गांव का मुस्लिम परिवार का व्यक्ति अपनी निसन्तानता के कारण बहुत दुखी रहता था। उसने जब गोमती स्नान और गोमती का जल लाकर देवी जी को चढ़ाने से स्वेत कुष्ठ ठीक होने का समाचार सुना और प्रत्यक्ष आकर देखा, तो उसके मन में भी श्रद्धा जागी। उसके बाद अपने मन में अपनी सन्तान का भाव लेकर नियमित रूप से अमावस्या को गोमती स्नान के लिये नियमित जाने और वहां से जल लाकर देवी का अभिषेक रिने लगा। गोमती के प्रति उसकी श्रद्धा रंग लाई और एक वर्ष के पश्चात उसके घर पुत्र रत्न की सहनाईयां बजीं।
इससे उसका गोमती के प्रति विश्वास इतना दृढ़ हुआ कि उसने एक मुस्लिम परिवार का होने के बाद भी अमावस को गोमती स्नान और उसके बाद उसके जल से देवी अभिषेक का क्रम निरन्तर जारी रखा।





