Saturday, March 8, 2014

‘देवास’ बनाने का संकल्प जागा! फिर होगा महोबा ‘पानीदार’ - डा॰ उमाशंकर त्रिपाठी

संकल्प ने बनाई परिवर्तन की राह.....
उŸार प्रदेश में बुन्देलखण्ड का महोबा एक ऐसा जिला है, जिसमें कोई बड़ी नदी नहीं है। परन्तु यहाँ के पुराने शासकों और समाज ने पानी सहेजने के लिए जिले में बड़े-बडे़ सात तालाब बनाये थे, जिनको आज हम अपनी विकास की अधकचरी समझ के कारण भुला बैठे। परिणामस्वरूप तालाब सूखे, भूजल स्तर घटा, पेड़ों की संख्या में कमी आई और यहाँ 1999 के बाद जो औसत बरसात 52 दिन होती थी वह घटकर मात्र 21 दिन रह गई। 86 प्रतिशत बरसात पर निर्भर किसानों के सामने गहरा संकट पैदा हो गया। पिछले 10 वर्षों में लगभग 30 हजार किसानों ने आत्महत्या कर ली और 40 प्रतिशत किसान खेती व बुन्देलखण्ड छोड़कर आजीविका की तलाश में पलायन कर गये। गांव के गांव खाली हो गये और जिस महोबा के पानी की धार कभी पूरे देश में गूंजती थी, आज वह महोबा पानी के लिए मोहताज है और किसान पलायन व आत्महत्याओं का गढ़ बनता जा रहा है, क्योंकि वह अपनी पुरानी तालाब परम्परा को भुला बैठा है?
पानी की समस्या सिर्फ खेती तक ही सीमित नहीं रही, यहांँ सूखे का ऐस प्रभाव हुआ कि पीने और घर की अन्य जरूरतों के लिए भी पानी मिलना बन्द हो गया। बुन्देलखण्ड के लोग पानी की समस्या के विकल्प तलाश ही रहे थे, तभी 2008 में यहांँ स्थानीय अखबारों में एक खबर छपी, महोबा जिले की एक महिला को पानी के लिए अपनी आबरू का सौदा करना पड़ रहा था। ‘आबरू के माल पानी’ इस शीर्षक से छपी इस खबर ने सभी को झकझोर दिया।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पेन्द्र भाई ने इस खबर के बाद अपने कुछ साथियों को जोड़ा और पानी की इस विकराल होती समस्या से निपटने की ठानी। 21 युवाओं ने मिलकर सदियों पुराने तालाब को पुनर्जीवित करने का फैसला किया, लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की गई, ‘इत सूखत जल स्रोत सब, बूंद चली पाताल, पानी मोलै आबरू, उठो बुंदेली लाल’ का नारा दिया गया। लगभग चार हजार लोग फावड़ों और कुदालों के साथ खुद ही तालाब की सफाई के लिए कूद पड़े, इतने लोगों ने मिलकर सिर्फ दो घंटे में तालाब की अच्छी-खासी सफाई कर डाली, यह देख सभी के हौसले और मजबूत हुए। 40 दिन तक काम चला जिसमें सैकड़ों लोग रोज शामिल हुए और आखिरकार लगभग हजार एकड़ का जयसागर तालाब फिर से जीवित हो उठा। इस पूरे अभियान में सिर्फ 30-35 हजार रूपये नकद खर्च हुए, यह खर्च स्थानीय नगरपालिका अध्यक्ष ने उठाया। इस पूरे काम का जब सरकारी आंकलन किया गया तो पता चला कि लगभग 80 लाख रू॰ का काम लोगों ने खुद ही कर दिया।
पर! इस त्रासदी को बदलने के लिए अभी और प्रयास की आवश्यकता है, अतः पुष्पेन्द्र भाई के साथ इण्डिया वाटर पोर्टल के शिराज केशर तथा गांधी शान्ति प्रतिष्ठान के प्रभात झा भी इस अभियान में जुड़ गये, जिसमें महोबा के युवा जिलाधिकारी अनुज झा ने भी रूचि पूर्वक पूरा सहयोग किया। जल संरक्षण की यह टीम जब जिलाधिकारी अनुज झा से मिली, तब वह स्वयं पानी की समस्या का समाधान तलाश रहे थे। उन्हें जब मालूम हुआ कि मध्य प्रदेश के देवास जिले में पानी सहेजने का सफल प्रयोग हुआ है, तो महोबा के प्रमुख किसानो की एक बैठक बुलाई गई और उसके बाद किसानों का एक प्रतिनिधि मण्डल देवास भेजा, वहाँं से किसान इसी संकल्प के साथ लौटे कि, ‘‘कुछ सालों में ही महोबा को भी देवास बनाना है।’’
देवास से लौटने के बाद जिलाधिकारी की सहायता से किसानों की एक और बैठक बुलाई जिसमें देवास में तालाबों की नीव रखने बाले उमाकान्त उमराव को बतौर मुख्य अतिथि बुलाया गया, जिससे प्रोत्साहित होकर महोबा में भी तालाब बनाने का अभियान चल पड़ा। एक ही महीने के अन्दर ही महोबा में 40 के लगभग तालाब बन चुके हैं। बरबई गांव के किसान देवेन्द्र शुक्ल ने लगभग एक लाख रूपये से आधे बीघे का तालाब बनाया है, जिसमें तालाब बनाने के दौरान निकाली गई मिट्टी बेचने से ही उन्हे तीस हजार रूपये मिल गये। महोबा के जिलाधिकारी कहते हैं कि अभी तो हम शुरूआती दौर में हैं, लेकिन देवास की सफलता देखते हुए हम निश्चिन्त हैं, महज यह एक प्र्रयोग नहीं बल्कि पानी का सबसे सटीक उपाय है।
इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए वर्षात के तुरन्त बाद 29 सितम्बर से 4 नवम्बर, 2013 तक कीर्तिसागर पर पुनः कार्य चला, जिसमें जिलाधिकारी के साथ समाज के लगभग 5 हजार लोगों नें श्रमदान के रूप में अपना योेगदान दिया।
पानी सहेजने की महोबा में उम्मीद और उत्साह की लहर का प्रभाव पड़ोस के जिले बांदा पर भी पड़ा और यहांँ के जिलाधिकारी जी॰एस॰ नवीन कुमार ने पुष्पेन्द्र भाई से मिलकर नरेगा के माध्यम से 200 से अधिक तालाबों का पुनरोद्धार कराया, जिसमें अभी सामाजिक सहकार जुड़ना बाकी है। क्योंकि कोई भी सरकारी योजना तभी सफल हो सकती है, जब स्थानीय समाज उस कार्य की अहमियत को समझे और पूरे मनोभाव से उस योजना में सहकार करे, जो वास्तव में परिवर्तन की सही राह है। 
- राजकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय, महोबा