Wednesday, March 26, 2014

सहायता को बढ़े हाथ - रंजीत सिंह ‘ज्याला’

उत्तराखण्ड में पिछले कुछ वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप बढ़ा है। यहां 1991 में विनाशकारी भूकम्प आया, जिसमें उत्तरकाशी के भटवाड़ी विकास खण्ड के 60 गांवों में से लगभग 30 गांव तबाह हो गये और टिहरी जिले के भी कुछ गांव प्रभावित हुए तथा जन-धन की अकल्पनीय हानि हुई, परन्तु पूरा देश इस विपदा में उत्तराखण्ड के साथ खड़ा हो गया। आपदा पीडि़तों की तात्कालिक सहायता हेतु अनेक संस्थायें आगे आयीं और हर सम्भव मदद की। विभीषिका में तात्कालिक राहत पीडि़तों को सुरक्षित निकालना, चिकित्सा, भोजन और सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के बाद असली चुनौती आती है, उनके पुर्नवास और रोजगार की तथा अनाथ हो गये बच्चों के भरण-पोषण, संरक्षण और शिक्षण व्यवस्था की।
1991 के भूकम्प की भयानक तबाही के तत्काल बाद जागरूक समाज ने उत्तराखण्ड की प्राकृतिक त्रासदी में मदद और उसके दुष्परिणामों से निपटने के लिए ‘उत्तरांचल दैवी आपदा पीडि़त सहायता समिति’’ का गठन कर तात्कालिक रूप से डेढ़ करोड़ आर्थिक मदद के साथ ही दीर्घकालिक सेवा योजना बनायी और भटवाड़ी विकास खण्ड के ध्वस्त हुए 30 गांवों में से 10 गावों में 427 भूकम्परोधी भवन बनाये और भूकम्प पीडि़त परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए तीन छात्रावास स्थापित किए गये। उत्तरकाशी जिले के मनेरी सेवा केन्द्र पर 80, लक्षेश्वर में 72 और यमुना घाटी के नेकवाड़ छात्रावास में 40 सुदूर गांवों के 54 कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के भोजन, आवास, एवं शिक्षण की व्यवस्थायें की गईं हैं।
इस वर्ष 14 जून से ही भगीरथी, मन्दाकिनी, अलकनन्दा व उनकी सहायक नदियों ने भयानक रूप ले लिया था जो 16-17 जून को भयंकर त्रासदी में बदल गया। अभी उत्तराखण्ड सरकार जागी भी नहीं थी, लेकिन ‘‘उत्तरांचल दैवी आपदा पीडि़त सहायता समिति’’ के कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रो में सहयाता के लिए तत्काल पहुंच गये। प्रेम बड़ाकोटी उत्तरकाशी पहुँचे और गंगोत्री मार्ग पर पीडि़तों के लिए ‘‘मनेरी सेवा केन्द्र’’ पर निशुल्क भोजन, आवास व्यवस्था प्रारम्भ की, जहां अब तक 10 हजार लोगों को रात्रि विश्राम तथा 8750 लोगों को भोजन की व्यवस्था की गई तथा 15 हजार यात्रियों को उनके घर सुरक्षित भेजा गया।
गंगोत्री से उत्तरकाशी तक 100 किमी मार्ग टूट जाने के कारण संस्था के दो प्रमुख कार्यकर्ता हरीश सेमवाल व गोपाल सिंह गंगोत्री से उत्तरकाशी तक पीडि़तों की सहायता हेतु उनके साथ ही 100 किमी पैदल चलकर आये।
गंगोत्री, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ क्षेत्र में फंसे लोगों की सहायता हेतु युद्धस्तर पर सहायता कार्य प्रारम्भ किया गया, जिसमें लगभग 5 हजार कार्यकर्ताओं ने रात-दिन लग कर अथक परिश्रम किया। इस हेतु सर्वप्रथम एक मुख्य सूचना एवं सहायता केन्द्र, 10 कान्वेन्ट रोड देहरादून में प्रारम्भ किया गया तथा अन्य क्षेत्रों में सहायता हेतु 1. हरिद्वार,  2. ऋषीकेश, 3. चम्बा, 4. मनेरी, 5.उत्तरकाशी, 6. घनशाली, 7. रूद्रप्रयाग, 8. फाटा तथा      9. श्रीनगर सहित 15 स्थानों पर सेवा केन्द्र स्थापित किए गये, जहां से तत्काल सूचना एवं सहायता हेतु संपर्क नम्बर घोषित किए गये और पीडि़तो के आवास, भोजन, चिकित्सा एवं उनको घर तक भेजने में सहयोग की व्यवस्था की गई, जो अभी तक जारी है।
इसके अतिरिक्त जहां-जहां मार्ग खुलते जा रहे हैं, वहां-वहां स्थानीय पीडि़त गावों में सम्पर्क कर उनके लिए राशन व आवश्यक सामान भेजा जा रहा है तथा इसके साथ ही दीर्घकालिक सेवा हेतु सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। लोक भारती भी इस कार्य में सहभागी बनेगी।