Saturday, March 8, 2014

कर्तव्य की अनूठी पहल - लोक भारती प्रतिनिधि

लखनऊ नगर की सुविधा सम्पन्न परिवारों की एल्डिको ग्रीन कालोनी में एक दिन जब समाजसेवी, वन विभाग के अधिकारी अजय प्रकाश जी के साथ जब मैं उनके निवास पर गया, तो घर में बच्चों के गीत की आवाज आ रही थी। मैं सोचन लगा! अजय प्रकाश जी का एक बेटा है जो बंगलौर में पढ़ रहा है, फिर इस घर में इतने बच्चों की आवाज कहांँ से आ रही है? जिज्ञासा वश घर में प्रवेश किया तो मालूम हुआ कि यह आवाज ऊपर के कमरे से आ रही हैं, अतः मैं वही चला गया। वहांँ देख कर सुखद आश्चर्य हुआ। घर के उस ऊपरी कमरे में फर्श पर चादरे बिछाकर लगभग 15 बच्चे गीत गा रहे हैं और उनके सामने फर्श पर ही अजय प्रकाश जी की श्रीमती रत्ना प्रकाश शिक्षिका की भूमिका में बैठी हैं। मैं भी चुपचाप कमरे के एक कोने में पड़ी कुर्सी पर बैठकर देखने लगा। गीत समाप्त हुआ तो योग प्रारम्भ हो गये, उसके बाद अतिथि के रूप में आयी दूसरी समाजसेवी बहन रंजना विष्ट ने बच्चों को शिक्षाप्रद कहानी सुनाई। उसके बाद सीडी के साथ एक गीत नृत्य प्रारम्भ हुआ, जिसमें सभी बच्चे मन्त्रमुग्ध होकर  संगीत स्वर के साथ तल्लीन हो गये। सब कुछ बच्चों के सहज सुलभ चंचलता होते हुए भी लयबद्ध, अनुशान में चल रहा था और सभी बच्चे अति प्रसन्न थे।
यह सब देख कर एक प्रश्न उठा! ऐसी समृद्ध कालोनियों में गरीब बच्चों को किसी घर में प्रवेश तक की सम्भावना नहीं होती, फिर इस घर में ऐसे बच्चें की इतनी उछल-कूद कैसे सम्भव हुई? प्रश्न का समाधान अजय प्रकाश जी ने किया। उन्होंने बताया इस कालोनी के पास ही सर्विस कालोनी है, जहां पर अधिकांश ड्राइवर परिवार रहते हैं। प्रत्येक दिन सायंकाल 5 से 6 बजे तक इस कालोनी के 7 से 10 वर्ष के लड़के-लड़कियां पढ़ने के लिए आते हैं, जिन्हें हमारी श्रीमती जी पढ़ाती हैं। रविवार को इसी समय जब बच्चे आते हैं तो उस दिन गीत, संगीत, नृत्य, योग, कहानी एवं दादी मां का बटुआ के द्वारा स्वास्थ्य संबन्धी जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही विविध कलाओं द्वारा उनके व्यक्तित्व विकास के कार्य़क्रम होते हैं, जिसमें शिक्षिका-मांँ के ममत्व में जाति-पांति, ऊँच-नीच, गरीब-अमीर सभी भेद विलीन हो जाते हैं और अपनी संस्कृति के व्यापक ध्येय वसुधैव कुटम्बकम् का भाव साकार हो उठता है।
नगरों में पढ़ी-लिखी, सुविधा सम्पन्न अनेक माताएँ, बहनें हैं, जिन्हें समय कैसे कटे, यह सोचना पड़ता है। ऐसी माताओं, बहनों के लिए आज के इस भौतिकतावादी युग में दिशा व प्रेरणा देने वाली कर्तव्य की यह अनूठी पहल है।