Wednesday, March 26, 2014

जल संकट के समाधान का प्रयास - देवकी नन्दन ‘शान्त’

जल-संकट का चाहिये, समाधान इक ठोस।
कार्य करें जी-जान से, छोड़ परस्पर रोष।। 1 ।।

‘बेपानी’ होकर अगर, लड़ा करेंगे लोग।
‘गाँव-शहर’ के बीच फिर, बढे़गा जल का रोग ।। 2 ।।

‘सिंचित खेती’ और फिर ‘उद्योगों’ के बीच।
‘जल-संकट’ ले आयेगा, हमें घरों से खींच ।। 3 ।।

‘समाधान’ हैं ‘पाँच’ ही, खुल कर करें विचार।
‘भारत’ में वरना नहीं, फिर इसका उपचार।। 4 ।।

‘वर्षा जल’ को समक्षकर, खूब समेटें आप।
‘समाधान’ यह प्रथम है, स्वीकारें चुपचाप।। 5।।

‘जल के वाष्पीकरण’ को, बचा सकें गर लोग।
‘पेट धरा का’ भर सके, ‘वर्षा जल’ का योग।। 6 ।।

‘कम से कम’ खींचें अगर, ‘भू’ से ‘जल’ श्री मान।
‘समाधान’ यह तीसरा, होगा ठोस प्रमाण।। 7 ।।

‘अनुशासित’ होकर करें, ‘जल’ का हम उपयोग।
‘जल-संकट’ से खुद-ब-खुद, उबरेंगे हम लोग।। 8 ।।

‘समाधान’ अंतिम अगर, माने ये संसार।
‘संस्कार’ से जोड़दें, ‘जल’ के प्रति ‘व्यवहार’।। 9।। ु
- साहित्य भूषण एवं अधीक्षण अभियन्ता (से॰नि॰), उ॰प्र॰ पावर कारपोरेशन लि॰। मो॰: 9935217841