भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है, लेकिन हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसे और व्यापक कैसे बनाया जाये। इसके लिए हमें ऐसी योजनाऐं और नीतियां तैयार करनी चाहिए कि अगली सरकार समाज के आखिरी व्यक्ति की आवाज सुन सके। सरकार को आमजन तक लेजाने का परिणाम होगा, सुशासन। प्रत्येक भारतीय चाहें उसका जो भी पंथ, रंग, क्षेत्र, जाति, भाषा हो सरकार में उसकी बात सुनी जायेगी।
आजादी के बाद अनेक विश्लेषकों ने घोषणा की थी कि भारत का जल्द ही पतन हो जायेगा। लेकिन साढ़े छह दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी न केवल हम लोकतन्त्र को बचा पाये, बल्कि हमने इसे कहीं अधिक मजबूत भी किया है। 1948 में जनरल क्लाउड़ ओंचिलेक ने घोषणा की थी एक देश के रूप में भारत के विखण्डन की शुरूआत हो चुकी है। 1961 में एल्डाउस ने लिखा था कि नेहरू के जाते ही सरकार सैन्य तानाशाही में बदल जायेगी। 1967 में लंदन के द टाइम्स ने अखबार में लिखा था कि लोकतान्त्रिक ढ़ांचंे में भारत के विकास का अनुभव विफल हो चुका है। जाहिर है भारत में गहरे पैठे लोकतन्त्र ने इन तमाम विद्वानों को झुठला दिया है। क्योंकि यहां के राजनीतिज्ञों नें लोकतन्त्र में लोगों की भागीदारी को मजबूती प्रदान करके भारत को एकता के सूत्र मं बांधे रखा, जिसका प्रमाण इस साल देश में 16वां आम चुनाव होने जा रहा है।
महात्मा गांधी ने लिखा था कि ‘एक सच्चा लोकतन्त्र केन्द्र में बैठे 20 लोगों द्वारा नहीं चलाया जा सकता। इसे हर गांव के लोगों द्वारा नीचे से चलाया जाना चाहिए।’ यही हमारी शक्ति है।
आजादी के बाद अनेक विश्लेषकों ने घोषणा की थी कि भारत का जल्द ही पतन हो जायेगा। लेकिन साढ़े छह दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी न केवल हम लोकतन्त्र को बचा पाये, बल्कि हमने इसे कहीं अधिक मजबूत भी किया है। 1948 में जनरल क्लाउड़ ओंचिलेक ने घोषणा की थी एक देश के रूप में भारत के विखण्डन की शुरूआत हो चुकी है। 1961 में एल्डाउस ने लिखा था कि नेहरू के जाते ही सरकार सैन्य तानाशाही में बदल जायेगी। 1967 में लंदन के द टाइम्स ने अखबार में लिखा था कि लोकतान्त्रिक ढ़ांचंे में भारत के विकास का अनुभव विफल हो चुका है। जाहिर है भारत में गहरे पैठे लोकतन्त्र ने इन तमाम विद्वानों को झुठला दिया है। क्योंकि यहां के राजनीतिज्ञों नें लोकतन्त्र में लोगों की भागीदारी को मजबूती प्रदान करके भारत को एकता के सूत्र मं बांधे रखा, जिसका प्रमाण इस साल देश में 16वां आम चुनाव होने जा रहा है।
महात्मा गांधी ने लिखा था कि ‘एक सच्चा लोकतन्त्र केन्द्र में बैठे 20 लोगों द्वारा नहीं चलाया जा सकता। इसे हर गांव के लोगों द्वारा नीचे से चलाया जाना चाहिए।’ यही हमारी शक्ति है।





