किसी भी समाज का भविष्य उस समाज की युवाशक्ति पर आश्रित होता है। जब युवा शक्ति जागृत होती है तभी समाज विकास के पथ पर अग्रसित होता है। विश्व के बड़े से बड़े आन्दोलन युवा श्क्ति की सहभागिता से ही सफल हो सके। हमारे देश का स्वतन्त्रता आन्दोलन भी तभी गति पकड़ सका जब अनेक युवाओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुये अपने प्राणों की आहुति दी।
पर्यावरण प्रदूषण आज की सबसे बड़ी समस्या है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, पालीथीन प्रदूषण, रेडियोएक्टिव प्रदूूषण, ओजोन परत में छेद, ग्लोबल वार्मिंग एवं अन्य अनेक स्वरूप में पर्यावरण प्रदूूषण लगातार भयानक रूप लेता जा रहा है। स्थिति करो या मरो की है। विकराल प्रदूूषण के कारण पूरे विश्व का अस्तित्व संकट मय है। ऐसी स्थिति में युवा वर्ग को आगे आना ही होगा। इसके अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या इतनी विकराल है कि इसके निदान हेतु हर स्तर से प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। प्रयास किये भी जा रहे हैं किन्तु समस्या की विकरालता को देखते हुये वे अपर्याप्त हैं। यहाॅं पर हम केवल उन प्रयासों का उल्लेख करेंगे जो युवा वर्ग द्वारा आसानी से किये जा सकते हैं, केवल संकल्पबद्ध होने की आवश्यकता है -
1. पालीथीन का प्रयोग रोकना: पालीथीन का प्रयोग आज बहुत व्यापक रूप से बढ़ गया है। यह एक स्थायी कूड़ा है जो लगभग हजार साल बाद समाप्त होता है। पालीथीन का प्रयोग कर हम धरती पर स्थायी कूड़ा घर बनाते जा रहे हैं। आज हम सब्जी लेने जाते हैं तो हर सब्जी यहाॅं तक कि धनिया, मिर्चा भी अलग पालीथीन में लेते है। इससे बचना होगा। जहाॅं बहुत आवश्यक न हो, वहाॅं किसी भी दशा में पालीथीन का प्रयोग नही करना चाहिये।
यदि युवा वर्ग पालीथीन का प्रयोग कम करने हेतु संकल्पबद्ध हो जाय तो पालीथीन प्रदूूषण को सीमित किया जा सकता है। इसके लिये किसी अतिरिक्त श्रम या संसाधन की आवश्यकता नहीं है, केवल आदत बनानी होगी। यदि युवावर्ग इसके लिये संकल्पित हो जाय जो पालीथीन प्रदूषण रोकने की दिशा में प्रभावी सफलता मिलेगी।
उक्त के अतिरिक्त शादी आदि के अवसरों पर पालीथीन का प्रयोग न करने से पालीथीन प्रदूूषण में कमी आ सकती है।
2. वाहन का सीमित प्रयोग: वायु प्रदूूषण आज की एक विकराल समस्या है। अधिकाधिक संख्या में बढ़ रहे वाहन इसका प्रमुख कारण हैं। इस पर विचार करना होगा कि हम इसे कैसे कर सकते हैं। जहाॅं अत्यन्त आवश्यक हो, वहाॅं वाहन का प्रयोग होना चाहिये। किन्तु छोटी दूरी पैदल या साइकिल से तय की जा सकती है। यह स्वास्थ्य के लिये तो लाभकारी है ही, वायु प्रदूूषण कम करने मे भी सहायक है।
3. जल प्रदूूषण नियन्त्रण: धरती का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। कई स्थानों पर धीरे- धीरे टैंकर से जलापूर्ति की स्थिति आ रही है। कुछ विषेशज्ञों का मानना है कि धरती पर अगला विश्वयुद्ध पानी के लिये होगा। जाने अनजाने हम पानी का दुरुपयोग करते है। अतः व्यक्तिगत स्तर पर पानी का दुरुपयोग रोका जाना आश्यक है।
इसके अतिरिक्त हम अनेक रूपों में जल प्रदूषण बढ़ाने में सहभागी बन रहे हैं। उदाहरणार्थ नदियों में मूर्ति विसर्जन। अधिकतर नवरात्रि एवं अन्य पर्वों के उपरान्त मूर्ति विसर्जन नदियों में किया जाता है। इस कार्य में अधिकांशतः युवावर्ग ही सम्मिलित होता है। इसे रोककर धरती में गाड़कर या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था द्वारा नदियों के प्रदूषण में कमी लायी जा सकती है।
4. मृदा प्रदूषण रोकना: आज कृषि योग्य भूमि उर्वरकों एवं कीटनाशक दवावों के अत्यधिक प्रयोग से लगातार भूमि उसरीली होती जा रही है। जो युवा कृषि कार्य में लगे हैं, वे जैविक खाद का प्रयोग कर प्राकृतिक खेती कर मृदा प्रदूषण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उक्त के अतिरिक्त गोबर गैस का प्रयोग कर ईंधन की बचत की जा सकती है तथा उसकी खाद का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने के साथ रासायनिक खाद के प्रयोग में कमी की जा सकती है।
5. ध्वनि प्रदूषण रोकना: धार्मिक एवं अन्य आयोजनों में अधिकांशतः उच्च स्वर वाले माइक लगााए जाते हैं। युवावर्ग इसे रोकने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। बहुत उपयोगी होने पर ही लाउड स्पीकर का प्रयोग किया जाना चाहिये तथा एक सीमा से अधिक ऊॅंची आवाज का उपयोग नहीं करना चाहिये।
6. सोलर सिस्टम का उपयोग: आजकल सोलर लाइट, सोलर कुकर एवं अन्य अनेक विकल्प उपलब्ध हैं जो विभिन्न प्रकार का प्रदूषण कम कर सकते हैं। युवा शक्ति को इनके उपयोग पर अधिक ध्यान देकर प्रदूषण को कम करने में सहयोग करना चाहिये।
7. वृक्षारोपण: वृक्ष सभी प्रकार के प्रदूषण को दूर करने में सहायक हैं। वृक्षारोपण कार्यक्रम इतना व्यापक है कि मात्र किसी संस्था, किसी विभाग या केवल कुछ लोगों द्वारा इसे नहीं पूर्ण किया सकता। यह प्रत्येक व्यक्ति का स्वाभाविक कर्तव्य है कि वृक्षारोपण के पुनीत कार्य से अपने को जोड़े। इसे जनभावना से जोडने हेतु निम्न उपाय किये जा सकते हैं:-
अ. अपने पूर्वजों की स्मृति में किसी मन्दिर परिसर या अन्य किसी उपयुक्त स्थान पर पौधारोपण कर उसकी सुरक्षा करना।
ब. परिवार में विवाहोत्सव, बच्चे पैदा होने या किसी अन्य पावन अवसर की स्मृति में किसी मन्दिर परिसर या अन्य किसी उपयुक्त स्थान पर पौधारोपण कर उसकी सुरक्षा करना।
स. अपने आस-पास पड़ी खाली भूमि, पार्क या अन्य नजदीकी स्थान पर पौधारोपण कर उसकी सुरक्षा करना।
द. यह आवश्यक नही कि केवल अपने द्वारा रोपित पौधों की ही सुरक्षा की जाय। अपने आस-पास किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा रोपित पौध की सिंचाई एवं सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
य. अपने प्रियजन को अन्य उपहार के स्थान पर पौधे को उपहार स्वरूप देना।
युवा उर्जा से भरा होता है। यदि वह अपने को पौधारोपण एवं उसकी सुरक्षा के प्रति संकल्पबद्ध कर ले तो प्रदूषण को दूर करने हेतु यह अत्यन्त महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
8. जागरुकता: पर्यावरण प्रदूषण हमारे लिये कितना बड़ा अभिशाप है तथा इसके निदान के लिये क्या प्रयास किये जा सकते है, इस दिशा में धीरे-धीरे समाज में जागरुकता बढ़ रही है। युवावर्ग समाज को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत का युवा आज केवल अपने देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी क्षमता का भरपूर प्रदर्शन कर रहा है। कोई कारण नहीं वह चाह ले और पर्यावरण प्रदूषण दूर न हो? केवल अपने को संकल्पित करने की आवश्यकता है। यहाँ पर कुछ सामान्य उपायों का उल्लेख किया गया है, जिसे थोड़े प्रयास से प्रदूषण पर किया जा सकता है। केवल सोचकर लगने की आवश्यकता है।
आज के युवा को गाँधी जी का यह सूत्र वाक्य सदैव स्मरण रखना होगा कि ‘‘धरती हमारी आवश्यकता की पूर्ति कर सकती है, विलासिता की नहीं’’। हमें प्रकृति से उतना ही लेना चाहिये, जितना अति आवश्यक हो तथा उसकी यथासम्भव भरपाई भी करने का प्रयास करना चाहिये।
यह आवश्यक नहीं कि पर्यावरण संरक्षण हेतु हर व्यक्ति बड़ा प्रयास ही करे। बूॅंद-बूॅंद से सिन्धु भरता है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया छोटे से छोटा प्रयास भी महत्वपूर्ण है। अतः जितना भी सम्भव हो सके, सभी को प्रदूषण पर नियन्त्रण का प्रयास करना है।
आज के युवा को यह समझना ही होगा कि बिना शुद्ध वायु एवं जल के जीवन सम्भव नहीं है। हम किसी भी दशा में मिनरलवाटर एवं आक्सीजन सिलिंडर के सहारे नहीं जी सकते। युवावर्ग की जिजीविषा शक्ति ऐसा होने नहीं देगी। आज पूरा समाज युवाशक्ति की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है। पर्यावरण प्रदूषण दूर करने की दिशा में जो प्रयास वर्तमान पीढ़ी नहीं कर पायी भविष्य में राष्ट्र की युवा शक्ति उसे अवश्य पूर्ण करेगी, ऐसा शुभ विश्वास है। जिस दिन भारत की युवा शक्ति की उर्जा पर्यावरण प्रदूषण दूर करने की दिशा में उद्यत होगी, समस्या के समाधान की दिशा में यह मील का पत्थर होगा।
- उप वन संरक्षक, कार्यालय प्रमुख वन संरक्षक,
17, राणा प्रताप मार्ग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ।





