नाॅलेज सीरीज के व्याख्यानों के बाद जब मैं मंुबई में अपने दोस्त के घर पहुँचा तो उनका 6 वर्ष का वेटा अंशुमान अपने आयातित खिलौने के साथ खेल रहा था, जिसमें सब कुछ था - एक अच्छे भवन की अलग-अलग प्रकार की दीवारें, फर्श, छत, गार्डन के लिए कई प्रकार के पेड़, कार पार्किंग, बच्चों के खेलने का क्षेत्र, किचेन, कई प्रकार के फर्नीचर, गिलहरी, कुŸो, बिल्ली जैसे पालतू जानवर तथा और भी ऐसी बहुत सी चीजें जो समान्यतः समृद्ध परिवारों में दिखाई देती हैं। वेशक यह बहुत बुद्धिमानी से बनाया गया खिलौने का सेट था जिसमें बच्चे को अपने सपने का घर बनाने की सुविधा थी। कल्पनाशीलता से भरे हुए बच्चों के लिए इससे बढ़िया खिलौना नहीं हो सकता।
वह बच्चा जब भी कोई उस खिलौने से डिजायिन बनाता और अपने माता-पिता को दिखाता तो वह उसमें कोई न कोई कमी और कारण बताते। वे कहते, घर के पीछे कार क्यों खड़ी की, हमे आफिस जाना होगा तो कार लेने के लिए पीछे जाना पड़ेगा। माँ कहती फ्रिज खेल के मैदान के पास क्यों रखा है, मुझे रसोई के सामान के लिए बार-बार चलकर जाना पड़ेगा आदि उनके पास बताने को अनेक कारण होते, और वे उसे रिजेक्ट कर देते। बच्चा फिर उत्साह से नया डिजायिन बनाने लगता।
हाॅलाकि बच्चा डिनर पर आये मेहमान को अपने डिजायिन किए मकान से प्रभावित करना चाहता था, लेकिन माता-पिता द्वारा बार-बार डिजायिन खारिज किए जाने के कारण थोड़ा चकराया हुआ था। उसके सवालों से बचने के लिए दोनो ने कहा यदि अंकल कहेंगे डिजायिन अच्छा है तो हम भी मंजूरी दे देंगे।
वह बच्चा कोई सिविल इन्जीनियर तो था नहीं। उसकी अपनी एक समझ थी और वह उसके अनुसार उस घर में सब चीजों को रख कर देख रहा था, जो अपनी दुनियाँ और अपने मित्रों के लिए चाहता था। जब उसने मुझसे अपने घर के बारे में पूंछा तो मैने तत्काल कहा, ‘डिजायिन तो बहुत अच्छी है, पर जरा मुझे बताओ कि गुलमोहर का यह विशाल वृक्ष कार पार्किंग के बीचो-बीच में क्यों है?’ अपनी छोटी उंगली उठाते हुए उसने तपाक से जवाब दिया, ‘फिर स्नो (उसके पालतु कुत्ते का नाम) सू-सू कहा करेगा?’ जब उससे पूछा कि किचन का एक कवर्ड रेफ्रिजरेटर उसके कमरे के साथ घर के पीछे क्यो है तो उसने कहा ‘उसी में तो गिलहरी, बिल्ली और कुत्ते के लिए खाने की चीजे रखी होती हंै और मेरे लिए उन्हे देना आसान होगा।’ उसका कहना बिल्कुल वाजिब था।
डिजायिन को लेकर उसके मन में कोई भ्रम नहीं था। मैने उस बाल इन्जीनियर (मेरी नजर में वह पी॰जी॰ था) के डिजाईन को उसके दृष्टिकोण से देखना शुरू किया, क्योंकि उसका कहना एकदम तर्क संगत था। उसने एक ऐसा मकान बनाया था, जो छः वर्षीय बच्चे के दोस्तों व बिल्ली, कुत्ते व गिलहरी आदि के लिए था। वह चाहता था अपनी सहूलियत से डिजाइन। वह चाहता था कि माँ के किचन और पिता कि मर्सडीज़ कार के ऊपर उसके दोस्तों को तरजीह दी जाए।
हम सब एक ऐसी पीढ़ी के हैं, जो इस सिद्धान्त के साथ बढ़े हैं जिसमें कहा गया है कि आप की विकास के लिए जो भी चीज़ नुकसान दायक नजर आए उसे नष्ट कर दो। शिक्षा के लिए हमने बच्चों की मासूमियत को खत्म किया, सड़क बनाने के लिए पेड़ नष्ट किए और बाँध बनाने के लिए पहाड़ियाँ ध्वस्त कर दी। ये तो कुछ उदाहरण ही है।
बच्चे के रूप में ईश्वर ने हमें सह-अस्तित्व का सिद्धान्त सिखाया है। अपने बच्चों को इसी सिद्धान्त के अनुसार उन्हें उनकी दुनियाँ बनाने दो। हमने कुछ ही दशकों में जो विनाश किया है, वह उससे कहीं ज्यादा है जो पूरी नस्ल सदियों में नष्ट कर पाती है। आईये एक और चीज नष्ट करें - संघर्ष का सिद्धान्त, ताकि हमारी नई पीढ़ी सह-अस्तित्व के सिद्धान्त के साथ अपने आसपास के वातावरण से सामंजस्य के साथ जी सके।





