‘‘सपने सच हों इसलिए सपने देखना जरूरी है।’’ ऐसा उद्घोष करने वाले कर्मयोगी और भविष्य दृष्टा डा॰ अब्दुल कलाम, जिनके पैर जमीन पर लेकिन सपने आसमान से ऊँचे थे। उन्होंने भारत की सोच को ‘अग्नि की उड़ान’ दी, बच्चों और युवाओं के तेजस्वी मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा भरा। विजन 20-20 से लेकर शहरी सुविधाओं को गावों तक पहुँचाने के उनके दर्शन ने भारतीय सŸाा प्रतिष्ठान को नई दृष्टि प्रदान की। उनका एक-एक शब्द, एक-एक कथन प्रेरक है जिसके कुछ अंश यहांँ प्रस्तुत हैं, जो हमारी युवा शक्ति के लिए मार्गदर्शक हो सकते हैं।
- ‘‘सपने वह नहीं जो सोते हुए देखे जायें, सपने वो हैं जो सोने न दें।’’
- ‘‘अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हो, तो सूरज की तरह जलना होगा।’’
- ‘‘इन्तजार करने वाले को उतना ही मिलता है, जितना कि कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।’’
- ‘‘आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत, असफलता को मिटाने के सर्वोत्म माध्यम हैं।’’
- ‘‘हम हमारा भविष्य नहीं बदल सकते, अलबत्ता अपनी आदतें जरूर बदल सकते हैं और वही बदली हुई आदतें भविष्य सुधार सकती हैं।’’
- ‘‘लक्ष्य प्राप्ति के लिए एकतरफा लगन और एकाग्रता जरूरी है।’’
- ‘‘कठिनाइयाँ जीवन को बिगाड़ती नहीं, बल्कि वे मददगार होती हैं, हमारी भीतरी ताकत उजागर करने में।’’
- ‘‘जीवन और समय दोनो सर्वोत्तम शिक्षक हैं, जीवन समय की कीमत सिखाता है और समय जीवन की कीमत।’’
- ‘‘जीवन एक जटिल खेल है, इन्सान बने रहकर ही इसे जीत सकते हैं।’’
सुबह उठकर स्वयं से कहें -
ऽ मैं सर्वश्रेष्ठ हँू। ऽ मै यह कर सकता हूँ।
ऽ भगवान मेरे साथ सदा है। ऽ आज का दिन मेरा दिन है। ऽ मैं विजेता हूँ। ु
- डा॰ अब्दुल कलाम





