कहते हैं! दृष्टि से सृष्टि होती है, यह सच है। एक दृष्टिवान व्यक्ति आपदाओं को भी संपदा में बदल सकता है और दृष्टि हीनता से संपदायें भी अभिशाप बनी रहती हैं।
राजस्थान प्रदेश प्राकृतिक दृष्टि से अभी तक अभिशप्त सा लगता था। यहाँ सैकड़ों किलो मीटर क्षेत्र में फैली रेत, जहाँ न जल और न वनस्पतियाँ, केवल रेगिस्तान। परन्तु अब वहाँ उपलब्ध प्राकृतिक संपदा और उसकी क्षमताओं को समझना प्रारम्भ हुआ है, जिसमें - सूरज की कहर बरसाती 50 डिग्री से ऊपर तेज धूप, तेज चलती हवायें और मिट्टी में छिपे तेल के भण्डारों एवं उसके महत्व पर अब हमारे विशेषज्ञों की दृष्टि गई है जिसके वह अभिशप्त क्षेत्र भारत के भविष्य के लिए वरदान बनने जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार राजस्थान के पश्चिमी जिले अब सौर ऊर्जा के बड़े स्रोत के रूप में अपना स्थान बनाने बाले हैं, उनमें से जोधपुर जिले में ही अकेले 8.538.84 मेगावट तक के विजली उत्पादन लिए चिन्हित किया गया है। एक अनुमान के अनुसार अगले पाँच वर्षों में देश में कुल विजली की खपत की 10 प्रतिशत की पूर्ति इन्हीं क्षेत्रों से हो सकेगी।
प्र्रदेश में तेज हवाओं के उपयोग के लिए 14.390 मेगावट के विन्ड प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हुए है जिनमें से अकेले जैसलमेर में 10 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन की संभावना है।
यहाँ के भूगर्भ में बहुत दिनों से तेल तलासने के लिए चल रही खोज के क्रम में केयर्न ने 38 कुएँ स्थापित किए, जिनमें 10 अरब वैरल तेल भण्डार हैं, जिसके 3 कुओं से ही 30 करोड़ वैरल तेल निकाला जा चुका है जबकि अभी केवल 30 प्रतिशत ही खोज हो सकी है। वहीं जालौर के सांचैर वेल्ट में 1 से 3 अरब घन फीट गैस के भण्डारों का पता चला है।
इसी प्रकार देश के पास युवाओं की अपरिमित शक्ति है, आवश्यकता है, उनके सदुपयोगपूर्ण दृष्टि की।





