Monday, December 28, 2015

प्राणायाम एवं ध्यान

भुजंगासन 
¨ शरीर को ढीला छोड़ते हुए धीरे-धीरे समतल जमीन पर लेट जाएँ, पैरों के पंजे तथा माथे को जमीन पर शरीर के    समतल रखें।
¨ दोनों पैरों को एक दूसरे के पास रखें।
¨ दोनों हथेलियों को कंधों के समानान्तर जमीन की तरफ कर के रखें।
¨ कोहनियों को शरीर के समानान्तर रखें।
¨ गहरी साँस लेते हुए सर को धीरे-धीरे छाती तक ऊपर की ओर जितना सम्भव हो उठायें।
¨ ऐसा करते हुए नाभि का भाग जमीन से लगा रहने दें।
¨ हाथों का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें।
¨ भुजंगासन करते समय दोनों हथेलियों पर समान भार डालें।
¨ रीढ़ की हड्डी को झटका न लगे अतः धीरे-धीरे कंधों को ऊपर की ओर ले जाएँ।
¨ अत्यधिक खिचाव लेने से सावधान रहें।
भुजंगासन के लाभ
¨ कंधों तथा गर्दन के लिए बेहतर उपचार है। 
¨ बाहर निकलते पेट के लिए अच्छा उपाय है। 
¨ फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि होती है।
¨ रक्त संचार बेहतर होता  है।
¨ तनाव तथा थकान को दूर करता है।
सावधानियांँ 
¨ गर्भवती स्त्रियों हेतु भुजंगासन वर्जित है।
¨ पीठ की अथवा रीढ़ की समस्या से ग्रसित लोग भुजंगासन करते समय सावधान रहें।
¨ भुजंगासन को विशेषज्ञों की सलाह के बिना नही करें।
डा॰ अंजलि सिंह