Tuesday, December 29, 2015

आवाहन युवा शक्ति का - दयानन्द जड़िया ‘‘अबोध’’

नवयुवकों! आज अपना राष्ट्र भारत विकास पथ पर अग्रसर होते हुये भी संक्रान्ति काल की विषम परिस्थितियों से जूझ रहा है। कहीं देश की सीमा पर पड़ोसी गोलीबारी करतें हैं तो कहीं आतंकवादी देश के अन्दर घुस कर जन-संहार का ताण्डव कर रहे हैं। कहीं भ्रष्टाचार, अनाचार और महिलाओं दलितों का शोषण हो रहा हैं तो कहीं धार्मिक उन्माद की विभीषिका। कहीं महंगाई और बेरोजगारी के कारण लोग भूखों मरने को विवश है, तो कहीं पर्यावरण प्रदूषण और प्रकृति के विनाश से अनेक प्राणि योनियाँ विलुप्त हो गयी हैं और कितनी विलुप्त होने के कगार पर हैं। अंधाधुंध भू जल दोेहन के कारण भू जल स्तर निरन्तर नीचे की ओर जा रहा है। नदियों में जल प्रदूषित हो रहा है। सृष्टि विनाश के मार्ग पर अग्रसर है। आपसी प्रेम व्यवहार समाप्त हो गया है हर व्यक्ति स्वार्थ सिद्धि में निरत है। वृक्षों के कटान से हरियाली घटती जा रही है। नगरीकरण के नाम पर कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं। जलवायु, तापमान, वर्षा अनिश्चित हो गयी है। चारों ओर हाहाकार मचा है। ऐसी दशा में राष्ट्र अपने नवयुवकों की ओर देख रहा है चाह रहा है कि वे आयें और कर्तव्य पथ पर अग्रसर हों।
नवयुवकों! इतिहास साक्षी है कि संकट बेला में सदैव युवा शक्ति सूर्य बनकर नव आलोक लाई है और देश व समाज को उबारा है। सोचो! भगीरथ ने गंगा को भू पर लाने हेतु युवावस्था में ही तो तप किया था। अत्याचारी रावण का वध युवा राम के द्वारा ही हुआ था। महर्षि परशुराम के गर्व को युवा लक्ष्मण और राम ने ही धूल धूसरित किया था और युवक देवव्रत भीष्म ने क्षत्रिय संहारक कहे जाने वाले उन्हीं महर्षि परशुराम को युद्ध में परास्त किया था। अत्याचारी आतंकी कंस को युवा कृष्ण ने यमपुर के दर्शन कराये थे, और तो दूर अभी हमारी स्वाधीनता आन्दोलन की बागडोर भी तो सरदार भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद, राजेन्द्र लाहिड़ी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, अशफाक उल्ला, राम प्रसाद बिस्मिल इत्यादि सभी नवयुवकों के हाथ में ही रही थी। प्रत्येक युग में युवा शक्ति प्रगति की प्रतीक रही है।
वर्तमान समय में भी देश और समाज के सामने जो समस्यायें हैं उनका सही समाधान युवकगण ही कर सकते है। युवक दूसरों को गंदगी फैलाने से रोक सकते है और समझा भी सकते है कि अपने निवास के आसपास गन्दगी रहने से कितनी बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है और स्वच्छता रखने से क्या लाभ है। जब हमारा गाँव नगर प्रदेश व देश स्वच्छ होगा तभी स्वच्छ भारत का स्वरूप साकार हो सकेगा। यदि युवजन जागरुक होंगे तो हम वृक्षों को कटने नहीं देंगे, नित नूतन वृक्षारोपण करेंगे लोगों का समझायेंगे कि हरियाली सृष्टि संरक्षण हेतु कितनी आवश्यक है तभी हरित क्रान्ति का नारा सत्य सिद्ध होगा।
प्रत्येक युवक जब यह समझेगा कि स्वयं मुझे तो शिक्षित होना ही है साथ ही मैं कम से कम एक निरक्षर व्यक्ति को साक्षर बनाऊँगा तो देश के नागरिक सभी गण साक्षर हो जायेंगे और समाज से पिछड़ापन दूर हो जायेगा। इसी प्रकार युवा जन अनुशासन बना कर समाज को संयमित व सुसंस्कृत बनाने में अपना विशिष्ट योगदान कर सकते हैं। युवा समाज यदि यह ठान ले कि हम नदियों में गन्दगी को गिरने नहीं देंगे तो हमारी नदियाँ अविरल व स्वच्छ सलिला पुनः बन जायेंगी। इसी प्रकार पर्यावरण को शुद्ध कर और आसपास वृक्ष व हरियाली बढ़ा कर पशु पक्षियों व अन्य वन्य प्राणियों को विलुप्त होने से बचा सकते हैं, साथ ही वन्य जीवों के अनावश्यक शिकार को रोक कर उन्हें नष्ट होने से बचा सकते है।
आज कन्या भ्रूण हत्या और नवजात कन्या शिशुओं को इधर उघर फेंके जाने की घटनायें बढ़ रही हैं। इस सामाजिक कुप्रथा को त्यागने हेतु भी युवागण समाज को समझा सकते है कि सृष्टि संचालन हेतु पुत्र और पुत्री दोनों ही आवश्यक है। यदि कन्याओं का अभाव हो गया तो सन्तानोत्पत्ति सम्भव न होगी। साथ ही उन्हें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि अपने जन्मदाता माता-पिता को वृद्धाश्रम जाने से रोकें उन्हें उचित मान-सम्मान दें और उनकी सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखें क्योंकि आज के युवक को आगे चलकर स्वयं वृद्धाश्रम भोगना है और जैसे को तैसे की कहावत भी लोगों की मान्यतानुसार सत्य होती है।
आज का युवा वर्ग नगरों की चकाचैंध से आकर्षित हो ग्रामों से पलायन कर रहा है उसे स्वयं इस बात का ध्यान रखना होेगा कि ग्राम उजड़ने न पायें क्योंकि गाँधी जी ने कहा था ‘‘भारत सात लाख गाँवों में निवास करता है’’ और ‘‘भारत की आत्मा गाँवों में ही देख पड़ती है’’ गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है - 
‘‘जहाँ बसइ सोइ सुन्दर देसू’’ इसीलिए नवयुवको को चाहिए कि वे गाँवों से पलायन न करें, वहाँ के लघु उद्योगों को व कुटीर उद्योगों को पर्याप्त बढ़ावा दे कर उन्हें पुनर्जीवित कर अपनायें, कृषि व बागवानी को उन्नत करें जिससे ग्रामों का समुचित विकास हो सके। तभी देश का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।
संगठित नवयुवक दूसरे देशों से भेजे गये आतंकवादियों से सजगता पूर्वक निपटनें और उन्हें परास्त करने में भी अच्छी भूमिका निभा सकते हैं।
अतएव आज समाज व राष्ट्र युवा शक्ति का आवाहन कर रहा कि वह जागरुक हो कर आगे आयें और राष्ट्र को सर्वांगीण विकास के पथ पर अग्रसर करें। 
- ‘चन्द्रा मण्डप’, 370/27, हाता नूरबेग, संगम लाल बीथिका, सआदतगंज, लखनऊ - 226003