Monday, December 28, 2015

पुराने कुओं को जीवित करने का अभिनव प्रयास

पुराने लखनऊ को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। यहाँ लगभग हर घर में कुआँ और शिवाला रहता है। पानी का स्तर गिरने से मंदिरों और घरों के कुएं सूखने लगे। लोगों ने इन्हें बन्द कराना शुरु कर दिया।  बचें कुओं को जीवित कराने का मैनें प्रयास किया। मंदिरों की छत अधिकतर साफ रहती है, छतों से नीचे आने वाले बरसात के पानी को कुओं में कैसे पहुँचाया जाये, इस पर कार्य प्रारम्भ किया। छतों के और मंदिर के बरसात के पानी को एक  3 फिट चैड़े और 3 फिट घहरे चैम्बर को बना कर एकत्र किया और चैम्बर को जाली से कवर किया, जाली पर कोयला गिट्टी और मौरंग डाली जिससे पानी छन कर कुएं में जाये और तल से पाइप के माध्यम से कुएं में जोड़ दिया। जल संचयन की अनूठी पहल में दो मंदिरों के कुएं और एक अखाडें के कुएं को चिंहित किया। श्री गणेश मंदिर चैपटियां एवं कुशुम्भी देवी मंदिर के बरसात का पानी ढाल बनाकर चैम्बर में पहुँचाया और फिर पाइप के माध्यम से कुए में। इस तरह नालियों में बह जाने वाला लाखों लीटर पानी का संचयन किया जा सका। बाग महानारायण में गोमती पहलवान का अखाडा भी जल संचयन का माध्यम बना। इस एक छोटे से प्रयास से क्षेत्र का जल स्तार बढ़ा है तथा कुएँ में भी पूरे वर्ष पानी बना रहता है।
- रिद्धि किशोर गौड़
महामंत्री श्री शुभ संस्कार समिति।