Tuesday, December 29, 2015

गोमती की पुकार - सतीश कुमार

शिव ने आशीर्वाद दिया, 
माँ जैसा तुम व्यवहार करो।
हो सदानीर तन से पोषित, 
शिव पुत्री हो उपकार करो।
ऋषि वशिष्ठ ने पुत्री माना, 
कौडिल्य ने तट वास किया।
सई, सरायन, सुखैती, छोहा, 
सखियों ने जलदान दिया।
गंगा मेरी बड़ी बहन है, 
और अवध की मैं माता।
पालन का दायित्व उठाती, 
जन, जीवन से है नाता।
लेकिन मेरे तट के वासी, 
तू है कैसा प्यार निभाता।
चाहे, अनचाहे कार्यों से, 
जल को दूषित कर जाता।
सब को जीवन दान दे रही, 
पल-पल प्रदूषण बढ़ता जाता।
मैं हूँ तेरी माँ गोमती, 
आँचल जल घटता जाता।
- जे-102, एल्डिको पार्क ब्यु, सीतापुर रोड, लखनऊ।