Saturday, December 26, 2015

संविधान में प्रयुक्त महत्वपूर्ण शब्द और उनके अर्थ

(1) पंथ निरपेक्षता - भारतीय संविधान पंथ निरपेक्ष है। पंथ निरपेक्षता संविधान का अनिवार्य एवं मूल तत्व है। संविधान के अनुच्छेद 25 (2) (क) में सेेक्युलर शब्द होते हुए भी वर्ष 1976 में 42 संशोधन की उद्देशिका तथा प्रस्तावना में पंथ निरपेक्ष शब्द का समावेश है। अंग्रेजी में रिलीजन होता है और हिन्दी में पंथ न कि धर्म। स्वयं भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू ने 1961 में सेक्युलर शब्द के हिन्दी अनुवाद धर्मनिरपेक्ष का विरोध किया था। अतः भारत धर्मनिरपेक्ष न होकर पंथ निरपेक्ष राष्ट्र है।
यदि धर्म निरपेक्ष का प्रयोग करते हैं तो वह संविधान की भावना के विरुद्ध होगा। क्योंकि जहाँ मूल संविधान की प्रति व लोक सभा अध्यक्ष की पीठिका के पीछे ‘धर्म चक्र प्रवर्तनाय’ लिखा है, वहीं भारत के उच्चतम न्यायालय में ‘यतो धर्म ततो जयः’ उल्लिखित है। भारतीय दर्शन एवं व्यवहार में धर्म स्वयंमेव पंथ निरपेक्ष है। पंथ का सम्बन्ध जहाँ व्यक्तिगत पूजा पद्धति से है, वहीं धर्म का सम्बन्ध समाजगत व्यापक परिप्रेक्ष्य में होता है। उच्चतम न्यायालय ने भी धर्म की ऐसी ही व्याख्या की है।
(2) सेक्युलर - सरमोनियर विलियम्स अंग्रेजी से हिन्दी शब्दकोश में सेक्युलर का अर्थ ईश्वर की सत्ता स्वीकार न करना, अर्थात नास्तिक दिया है। जबकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 25 सर्वधर्म सम्भाव का प्रतिवादन करते हैं। अतः इसकी स्थापना का आधार सर्वधर्म सम्भाव है।
संविधान सभा के अध्यक्ष डा॰ भीमराव अम्बेडकर को ज्ञात था कि भारतीयता में पंथ निरपेक्ष्ता और सर्वधर्म सम्भाव स्वाभाविक गुण व प्रवत्ति है, इसीलिए उन्होने संविधान में इन सब्दों का उपयोग नहीं किया।
- डाॅ॰ रवीश कुमार
 आचार्य लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ