‘‘देश का भविष्य तब अच्छा होगा, जब उत्तर प्रदेश का भविष्य अच्छा होगा। उत्तर प्रदेश का भविष्य तब अच्छा होगा जब लखनऊ अच्छा होगा। लखनऊ तब अच्छा होगा जब गोमती स्वच्छ व निर्मल होगी। क्योंकि लखनऊ की पहचान इमामबाड़ा ही नहीं गोमती भी है। अतः हमें गोमती को स्वच्छ कर विश्व को संदेश देना चाहिए कि भारत में सिर्फ आस्था ही नहीं ज्ञान भी है।’’
- रामनाईक, राज्यपाल, उ॰प्र॰
गोमती संरक्षण हेतु व्यापक पहल - जल, नदी एवं पर्यावरण संरक्षण को केन्द्र में रखकर लोक भारती 2006 से निरन्तर क्रमबद्ध कार्य कर रही है। सर्व प्रथम पर्यावरण संरक्षण हेतु 2006 से व्यापक जनजागरण अभियान प्रारम्भ किया गया जिसके केन्द्र में उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड के समस्त 82 जिले, 1500 विद्यालय एवं महाविद्यालय तथा 150 जिला परिषदीय विद्यालयों के संकुल केन्द्रों के शिक्षक व एक लाख छात्र थे। इसके पश्चात् कार्य का विस्तार करते हुए 22 मई, 2007 को समग्र विकास में नदी, जल की भूमिका तथा 27 जनवरी, 2008 को बुन्देलखण्ड जल संकट और समाधान पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के चयनित 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उक्त कार्यशालाओं से लोक भारती इस निष्कर्ष पर पहुँची कि चर्चा एवं जागरुकता अभियानों से पहले स्वयं जमीनी कार्य करना चाहिए और परिणामतः 13 दिसम्बर, 2010 को लखनऊ में गोमती संरक्षण के प्रथम चरण का शुभारम्भ खाटूश्याम आदि विभिन्न घाटों पर स्वच्छता एवं वृक्षारोपण के साथ प्रारम्भ हुआ और 15 मार्च, 2010 चैत्रकृष्ण अमावस्या को गोमती उद्गम से लेकर गंगा मिलन स्थल तक एक साथ सभी 13 जिलों में गोमती दिवस का आयोजन करके सामाजिक सहभागिता की ओर महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया तथा उसको सुदृढ़ करने हेतु वर्ष भर गोमती के विभिन्न स्थलों पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गये।
गाँ गंगा समग्र चिन्तन गोष्ठी - 22 एवं 23 जनवरी, 2011 को लखनऊ में गंगा को केन्द्र में रखते हुए माँ गंगा समग्र चिन्तन गोष्ठी का राष्ट्रीय आयोजन सम्पन्न हुआ जिसमें देश भर से जल एवं नदियों पर कार्य करने वाले 250 से अधिक प्रतिनिधि चिन्तन-मनन हेतु एक साथ आये और भविष्य की कार्य योजना पर विचार किया और इस निर्णय पर पहुँचे कि यदि गंगा को ठीक रखना है तो गंगा से मिलने वाली सभी नदियों को ठीक रखना होगा। अतः उक्त निर्णय के परिपेक्ष्य में लखनऊ की जीवनरेखा गोमती पर समग्रता से कार्य करने के लिए गोमती के अध्ययन हेतु एक यात्रा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
गोमती अध्ययन यात्रा - दिनाँक 28 मार्च से 3 अप्रैल, 2011 तक गोमती अध्ययन यात्रा का आयोजन गोमती के उद्गम स्थल माधौटाण्डा, पीलीभीत से गोमती गंगा मिलन स्थल कैथी घाट काशी तक इसके प्रवाह क्षेत्र के सभी 13 जिलों में किया गया। इस अवसर पर 33 स्थानों पर गोमती मित्र मण्डलों का गठन किया गया, जिसके अन्र्तगत लगभग 500 सदस्य अभियान से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े। यात्रा के तत्काल बाद जहाँ प्रदेश सरकार गोमती संरक्षण के लिए संक्रिय हुई वहीं सामाजिक स्तर पर अनेक उल्लेखनीय कार्यों का शुभारम्भ हुआ।
गंगा समग्र अभियान - गोमती संरक्षण अभियान के साथ ही गंगा संरक्षण हेतु अनेक प्रकार के आयोजनों में लोक भारती अग्रणी भूमिका में रही। इसी क्रम में 25 से 26 अप्रैल, 2011 को ऋषीकेश में गंगा एक्शन परिवार, 22, 23 जून गंगा समग्र गोष्ठी, दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार तथा गंगा समग्र विशेषज्ञों की कार्यशाला 1 व 2 जुलाई, 2011 को दीन दयाल शोध संस्थान, नई दिल्ली में सम्पन्न होने के साथ ही 2013 तक गंगोत्री से गंगा सागर तक 20 से अधिक सामाजिक जागरुकता के विविध आयोजन हुए, जिसके गंगा के प्रति सामाजिक प्रभाव को देखते हुऐ सरकार को ‘नमामि गंगे’ परियोजना प्रारम्भ करनी पड़ी।
नदी समग्र कार्यशाला - अनेक नदियों पर कार्य करने वाले व्यक्तियों, समूहों व विशेषज्ञों के साथ समन्वय हेतु 28 अप्रैल, 2013 को लखनऊ में गंगा से मिलने वाली नदियों का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश की 25 नदियों से सम्बन्धित 300 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।
गोमती मित्र सम्मेलन - इसके साथ ही गोमती संरक्षण सम्बन्धी अनेक गतिविधियाँ भी प्रभावी रूप से चलती रहीं, जिनमें 29 अप्रैल, 2012 को गोमती मित्र मण्डल सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसमें नैमिषारण्य क्षेत्र में देववृक्ष अभियान में संलग्न अनेक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। 12 फरवरी, 2013 को प्रयागराज कुंभ में गोमती मित्र मिलन के आयोजन के साथ ही अभियान को गति प्रदान करने वाले अनेक प्रयत्न चलते रहे। जिनके परिणाम स्वरूप शासन भी लोक भारती के साथ सहयोगी भूमिका में आया।
जल स्रोत एवं नदी संरक्षण कार्यशाला - 3 दिसम्बर, 2013 गोमती संरक्षण अभियान के क्रम में और महत्वपूण हो गया, जब प्रदेश सरकार के लगभग 50 जिलों के प्रशासनिक (जिलाधिकारी, सी॰डी॰ओ॰ या समकक्ष) अधिकारी, शासन की ओर से ए॰पी॰सी॰ सहित सम्बन्धित कई विभागों के सचिव तथा लोक भारती से जुड़े लगभग 70 प्रतिनिधि एक साथ कार्यशाला में पूरे दिन साथ-साथ रहे और जल प्रबन्ध के विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श किया। जिसके परिणाम स्वरूप प्रदेश सरकार गोमती संरक्षण की दिशा में सक्रिय हो रही है।
गोमती अलख यात्रा - गोमती संरक्षण अभियान को गति देने तथा समाज को उस दिशा में पे्ररित करने हेतु 2 अप्रैल से 16 अप्रैल, 2015 को गोमती अलख यात्रा का आयोजन हुआ, जिसमें गोमती सहित उसकी सभी 22 सहायक नदियों के 5,000 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ता सहभागी बने तथा पुनः 30 स्थानों पर गोमती मित्रों का गठन किया गया।
अनुवर्ती प्रयास - कार्य की निरन्तरता के लिए निरन्तर कार्यक्रम आयोजित करने होते हैं, इसी कड़ी में लखनऊ के निकट (1) बाराबंकी नगर में एक ऐतिहासिक ‘धनोखर’ तालाब के संरक्षण हेतु 29 अपै्रल, 2015 से अभियान प्रारम्भ हुआ, (2) इसी जिले में गोमती की सहायक रेठ को जल प्रदान करने वाली जमुरिया नदी के संरक्षण हेतु 18 जून, 2015 को यात्रा का आयोजन किया गया, जिसके अन्र्तगत नदी के निकटवर्ती 8 गावों में में 25 कुओं व 3 तालाबों के संरक्षण हेतु महन्त देव्या गिरि जी द्वारा भगीरथ संकल्प कराये गये। (3) 4 जुलाई, 2015 को गोमती तटवर्ती हरदोई जिले के भरावन क्षेत्र के 4 गावों में स्वच्छ-कुआँ पूजन एवं भगीरथ सम्मान के कार्यक्रम सम्पन्न हुए, जो सामाजिक जागरूकता के परिचायक हैं।
पर्यावरण एवं गोमती मित्र मण्डल सम्मेलन- दिनाँक 8 नवम्बर, 2015 को लोक भारती के साथ राष्ट्रीय सेवा योजना की सहभागिता में एक दिवसीय पर्यावरण एवं गोमती मित्र मण्डल राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मेलन का आयोजन, लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में माननीय रामनाईक, राज्यपाल, उ॰प्र॰ की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ, जिसमें उन्होने गोमती को स्वच्छ व निर्मल बनाने का संदेश देते हुए कहा कि नदियों की सफाई एवं सुरक्षा में भक्ति, आस्था और ज्ञान का संगम है। अतः इस कार्य में समाज के साथ-साथ छात्रों और युवाओं को जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि गोमती साफ होगी तभी गंगा साफ होगी। वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ एस॰बी॰ निम्से ने विश्वविद्यालय परिसर को इको फ्रैण्डली बनाने की घोषणा करते हुए इस अभियान को सब प्रकार से सहयोग की बात कही।
डा॰ अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो॰ विनय पाठक ने घोषणा करते हुए बताया- प्राविधिक विश्वविद्यालय में अब शीघ्र गोमती नदी पर अध्ययन एवं शोध हेतु शीघ्र एम॰टेक की थीसिस में लागू करेंगे और उसके जो रिजल्ट आयेंगे उन्हें सरकार व जिम्मेदार लोगों तक पहुँचायेंगे तथा अन्य छात्रों के हेतु पर्यावरण विषय के पाठ्यक्रम में गोमती चैप्टर को जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लखनऊ के महापौर डा॰ दिनेश शर्मा, प्रसिद्ध उद्योगपति राम नारायण साहू एवं महन्त देव्या गिरि सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। इस अवसर पर लोक भारती की मासिक पत्रिका लोक सम्मान के युवा शक्ति विशेषांक एवं दयानन्द जडि़या द्वारा रचित गोमती काव्य ग्रन्थ का विमोचन किया गया।
गोमती मित्र सम्मान - इस अवसर पर पर्यारण, जल एवं गोमती संरक्षण के लिए विशिष्ट कार्य करने वाले 21 कार्यकर्ताओं को राज्यपाल महोदय के प्रतिनिधि के रूप में महन्त देव्यागिरि एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ एस॰बी॰ निम्से द्वारा सम्मानित किया गया।
कैप्टन सुभाष ओझा





