‘उन्नत भारत अभियान’ द्वारा लोक भारती के सहयोग से ‘‘प्राकृतिक खेती एवं गौ आधारित अर्थ व्यवस्था’’ पर दिनाँक 12 एवं 13 दिसम्बर, 2015 को ‘दो दिवसीय कार्यशाला लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के सभागार में ‘‘न हम जहर युक्त अन्न खायेगें और न खिलायेंगे’’ ऐतिहासिक संकल्प के साथ सम्पन्न हुई। कार्यशाला में 18 प्रदेशों के 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रशासनिक अधिकारी, कृषक वैज्ञानिक, कृषि वैज्ञानिक, जिला कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही।
यह कार्यशाला कृषि के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुई, जिसमें प्राथमिक चरण में ‘‘प्राकृतिक खेती और गौ आधारित अर्थव्यवस्था’’ केन्द्रित 100 माॅडल केन्द्र विकसित करने का संकल्प लिया गया। इन माॅडल केन्द्रों का चयन देश भर में प्रयोग-धर्मी किसानों द्वारा किए जा रहे प्राकृतिक खेती के प्रेरक कार्यों में से किया जायेगा।
कार्यशाला के समापन के अवसर पर श्री एन॰एस॰राठौर , उपमहानिदेशक कृषि, भारत सरकार ने दो दिवसीय कार्यशाला में आये महत्वपूर्ण बिन्दुओं के साथ आगामी कार्ययोजना की संस्तुतियों का प्रस्तुतीकरण किया।
सहभागी संस्तुतियां -
1. रोग लगने वाले बीजों का प्रयोग न हो।
2. गाय के दूध के मूल्यांकन का पैमाना दूध की गुणवŸाा के आधार पर सुनिश्चित हो न कि फैट के आधार पर।
3. किसान की फसल के मूल्य निर्धारण में किसान का योगदान कुशल श्रमिक के अनुरूप, श्रमिक मूल्य, पशु कार्य मूल्य (पूरे फसल काल का), सिंचाई, गुड़ाई, जुताई, निराई, कटाई, प्रसोधन एवं ब्याज आदि के अनुरूप होना चाहिए।
4. राज्य सभा एवं विधान परिषदों में अनेक वर्गाें के प्रतिनिधि रखे जाते हैं, किसान प्रतिनिधि का भी स्थान होना चाहिए।
5. धरती की सम्पदा के उपयोग का अधिकार केवल मनुष्य का ही नहीं अपितु अन्य जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों का भी है, अतः विकास की योजनाओं में उनका भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
कार्ययोजना संस्तुतियाँं -
1. प्राकृतिक खेती के 100 माॅडल केन्द्रों का विकास का लक्ष्य सुनिश्चित किया गया।
2. प्राकृतिक खेती हेतु 100 प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु तीन दिवसीय कार्यशाला का 22, 23, 24 जनवरी, 2016 को कनेरी मठ, कोल्हापुर, महाराष्ट्र में आयोजन होगा।
3. क्षेत्रीय स्तर पर 5 अन्य कार्यशालाओं के इसी वर्ष मार्च तक आयोजन क्रमशः - (1) बंगाल - कलिंगपोंग, (2) झारखण्ड - रांची, (3) राजस्थान - उदयपुर, (4) पंजाब - अमृतसर, तथा (5) आन्ध्र - हैदाराबाद में होगा।
4. आगामी दो वर्षों में 1000 केन्द्रों तक विस्तार होना है।
5. प्राकृतिक खेती एवं गौ आधारित अर्थ व्यवस्था के विकास, प्रसार एवं प्रशिक्षण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर नोडल संस्था के रूप में ‘‘लोक भारती’’ तथा उसके संचालन हेतु लखनऊ में कार्यालय होना सुनिश्चित हुआ है।
6. डाकूमून्टेशन टीम का गठन किया गया, जो एक माह में माॅडल केन्द्रों का ब्योरा तैयार करेगी।
7. सुचारू कार्य संचालन हेतु 13 सदस्यीय कार्यकारी टीम का भी गठन किया गया।
8. देशी बीज बैंक की स्थापना।
9. देशीनन्दी नस्ल विकास केन्द्रों की स्थापना।
10. कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से 5-5 एकड़ के किसान प्रयोग केन्द्रों का विकास।
11. लखपति केन्द्र का प्रचार, प्रसार एवं विस्तार।
12. बायो गैस को प्रोत्साहन।
13. बैल चालित छोटे उपकरणों का विकास।
14. देशी नस्ल के गौ संवर्धन एवं गौ वितरण केन्द्रों का विकास।
इस कार्यशाला में पहले दिन उद्घाटन सत्र में प्रस्तावना प्रो॰ वी॰के॰ विजय, संयोजक, उन्नत भारत अभियान, आई॰आई॰टी॰ दिल्ली, कार्ययोजना प्रो॰ राजेन्द्र प्रसाद, परामर्शदाता उन्नत भारत अभियान तथा उन्नत भारत अभियान की प्रष्ठभूमि पर प्रकाश श्री एन॰एस॰ राठौर, उप महानिदेशक, कृषि शिक्षा भारत सरकार ने डाला। मुख्य वक्ता डा॰ संजीव बालियान, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मन्त्री ने परम्परागत खेती के विस्तार, गौ संवर्धन एवं किसानों के कल्याण की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
उद्घाटन के पश्चात प्राकृतिक खेती विषय को लेकर दो सत्र सम्पन्न हुए, जिनमें स्वामी काणि सिद्धेश्वर जी महाराष्ट्र, ठा॰ धर्मपाल सिंह शामली, सरदार राजवीर सिंह पंजाब, श्वेताश्व सिंह पीलीभीत, हिमांशु गंगावार फर्रूखाबाद, संजीव आर्य बुलन्दशहर, कालूराम मुजफ्फरनगर, कान सिंह निर्वान, सीकर राजस्थान जगमोहन टीकमगढ़, संजय उपाध्याय शाहजहाँपुर, डा॰ बल्ल्भ भाई कथीरिया, अध्यक्ष गौसेवा आयोग, गुजरात, आचार्य रवीन्द्र जी, हरियाणा, मोहन लाल बुलन्दशहर, अमित आर्य पतंजलि, बिजनौर, प्रेम सिंह बांँदा ने अपने द्वारा किए जा रहे कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया।
सांयकालीन सत्र कम जल में खेती विषय पर सम्पन्न हुआ जिसमें सूर्यकान्त जालान, वाराणसी, गोपाल भाई, चित्रकूट, महेन्द्र मोदी, एडीजी, एसआईटी, उत्तर प्रदेश सरकार ने जल संरक्षण के विविध पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। पहले दिन की कार्यशाला का समापन श्री चन्द्र भूषण तिवारी द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला के दूसरे दिन दिनांक 13 दिसम्बर, को प्रातः दो सत्र गौ आधारित अर्थव्यवस्था को लेकर हुए, जिसमें गौ पालन एवं संवर्धन पर संजय उपाध्याय, श्वेताश्व सिंह, डा॰ सुब्बाराव, आईआईटी दिल्ली, तथा बाये गैस पर पी॰एस॰ओझा, बायो एनर्जीमिशन, उ॰प्र॰, विविध उपयोग पर कार सिंह निर्वान, यश भारती पुरस्कृत रमेश भइया, सुषमा सिंह तथा गौ चारे पर डी.आर.मालवीय भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने अपने विचार रखे। सत्र के अध्यक्ष श्री हृदयनाथ सिंह ने समापन करते हुए इस दिशा में सार्थक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मन्त्री श्रीमती स्मृति ईरानी का स्कैप के माध्यम से सम्बोधन हुआ तथा समापन सत्र में गोरक्ष पीठ के महन्त एवं सांसद योगी आदित्यनाथ एवं शाहजहाँपुर की सांसद कृष्णाराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। योगी आदित्यनाथ ने गाय के गुणों के सम्बन्ध में विस्तार से बताया तथा तथा कहा - परम्परागत खेती ही समस्याओं का समाधान है। इस आयोजन में लोक भारती की पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जो आगे भी रहनी है।
- आचार्य श्याम बिहारी





