Saturday, December 26, 2015

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों का निजी प्रयासों से सोलर संयत्र द्वारा विद्युतीकरण

सरकार की तमाम घोषणाओं, योजनाओं और करोड़ों के निवेश के बावजूद उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में अधिकांश गाँव शाम ढलते ही गहन अंधकार में डूब जाते हैं और ग्रामीण जनजीवन अपने अँधेरे आशियानों में ठीक उसी तरह सिमट जाता है  जिस तरह परिंदे शाम होते ही अपने घोसलों में सिमट जाते हैं। अपनी अँधेरी जिंदगी में उजाले के लिए ग्रामीणों को रोशनी की भारी कीमत चुकानी होती है क्योंकि उनके पास रोशनी के लिए केरोसिन का ही सहारा है, जिससे ढिबरी, लालटेन से मद्धिम उजाले सहित घातक रासायनिक गैसें और घास फूस के छप्परों में आगजनी की पर्याप्त सम्भावनाओं के साथ जीवन गुजरना उनकी मजबूरी है।
सरकारी विद्युत कंपनियों द्वारा सभी विद्युतीकरण की योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद भी प्रदेश में विद्युत उपलब्धता में भारी कमी होने कारण शहरी इलाकों में विद्युत आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाती है जिससे ग्रामीण इलाकों में आपूर्ति के लिए सदैव विद्युत की कमी बनी रहती है परिणामस्वरूप शाम को बिजली केवल चुनावों में ही मिल पाती है बाकी समय तो अँधेरा ही साथी है। दूसरी तरफ विद्युतीकरण की तमाम योजनाओं में जो वितरण प्रणाली निर्मित होता है उसमें विद्युत आपूर्ति न होने और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण रखरखाव  न होने से तुरंत ध्वस्त हो जाता है।
तमाम घरेलू उद्योग धंधे एवं सिंचाई के पम्प डीजल चालित इंजनों द्वारा ही सम्भव हो पाता है ऐसे में अखिल भारतीय मताधिकारी संघ व समर्पण संकल्प समिति के अध्यक्ष, इंजिनियर राकेश गोयल ने अपने वर्षों के प्रयोगों और ग्रामीणों के जीवन में उजाले के विकल्प हेतु सोलर एनर्जी को ही एकमात्र विकल्प मानकर एक मेगावाट क्षमता के लिए महीनों की परिश्रम से पावर प्लांट की विस्तृत रिपोर्ट बनायी। इस के हेतु आई॰आई॰टी, कानपुर के विशेषज्ञों और प्रोफेसरों का भी सहयोग प्राप्त किया, रिपोर्ट तैयार होते ही राकेश गोयल उत्तर प्रदेश सरकार के अनेक वरिष्ठ उच्चाधिकारियों से मिलकर सोलर प्लांट परियोजना का प्रस्तुतीकरण दिया। चूँकि परियोजना की लागत लगभग ८ करोड़ थी जिससे लगभग १०० गांवों को २४ घंटे निर्बाध विद्युत् आपूर्ति और दिन में सिंचाई, आटाचक्की व अन्य छोटे व्यावसायिक उद्योगों को आपूर्ति का प्रस्ताव था। इस परियोजना का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि यह पूरी तरह व्यावसायिक कम्पनी की तरह संचालित होने योग्य है।
सरकारी विभागों द्वारा इस परियोजना में कोई रूचि न दिखाए जाने पर राकेश गोयल ने परियोजना के छोटे माॅडल पर काम शुरू किया और फरवरी, २०१५ में खैराबाद ब्लाक की ग्रामसभा उनसिया के ककरहिया में १० किलोवाट का प्लांट स्वयं की जमापूंजी व मित्रों की सहायता से स्थापित किया। इस प्लांट को लगाने में ककरहिया के निवासियों ने हिस्सा लिया जैसे रामचंदर ने अपने घर का छप्पर हटाने व उसकी जगह सोलर पैनल लगाने और कंट्रोल रूम हेतु अपने घर का एक कमरा निःशुल्क उपलब्ध कराया और अन्य ग्रामीण युवाओं ने स्ट्रक्चर फैब्रिकेशन, पैनल इंस्टालेशन से लेकर वितरण नेटवर्क की स्थापना व घरों में कनेक्शन देने के लिए जीवन में पहली बार अपने हाथों में औजार पकड़ और यह सब संभव हो सका एक व्यक्ति के दृढ संकल्प और  नियत के कारण।

ककरहिया एवंम बदरिपुर गाँव के ५० परिवारों को ७ महीनों से शाम ७ बजे इस १२ बजे तक बिना किसी रोक के नियमित बिजली मिल रही है। दो और गावों को संसाधन की कमी से लाइन नहीं लग पाई है वर्ना ५० और घरों को आपूर्ति सम्भव हो पाती .ककरहिया गाँव में सोलर पम्प भी चल रहा है और कुछ निवासियों को जल की सप्लाई भी मिल पा रही है। 
सौर उर्जा प्लांट ग्रामीणों द्वारा ही चालित है जिससें प्रति माह रुपए १५० प्रति कनेक्शन प्राप्त हो रहें हैं।
- प्रो॰ राकेश गोयल