Saturday, December 26, 2015

मिशन महाइन्द्र कूप - मृतप्राय कुओं को पुनर्जीवन एक पुनर्जीवित कुआँ की पीड़ा

मैं एक कंचनपुर, जिला झाँसी, उत्तर प्रदेश का एक जलाशय हूँ। लोग मुझे भारत में कुआँ कहते हैं। मेरा जन्म 1967 में हुआ। मैंने 35 वर्षों तक मानव जाति, जीव जन्तुओं, पेड़ों और फसलों की सेवा की, मानस पुत्रों को पानी पिलाया, उनके कपड़े साफ किए, उनको खाने के लिए अन्न उपजाने में खुराक का काम किया। गाँव के सभी मवेशी व सभी मनुष्य मेरा इस्तेमाल करते थे।
सन् 2002 में इसी गाँव में हैण्डपम्प लगा दिए गए। उसके बाद लोगों ने मेरी उपेक्षा करनी शुरू की। मुझमें कूड़ा डालने लगे। अपने मित्र गाँव वासियों की इस विवेकहीन हरकत से मेरे लिए खुलकर श्वास लेना भी दूभर हो गया। गाँव वासियों ने मुझे मृत्यु शैया पर ही लिटा दिया। सन् 2002 से अक्टूबर, 2015 तक मै कोमा में रहा। मुझे तो मृत मान लिया गया। पानी के देवता श्री वरुण कहने वाले देश में ही मैं बेमानी बना दिया गया। हालाँकि बाद में इस हैण्ड पम्प और ट्यूबवेल से गाँव ने ज्यादा परेशानी महसूस करनी शुरू की।
इसी बीच नवम्बर, 2015 से मैं खुलकर श्वास  लेने लगा। होश आया तो अपने को साफ सुथरा पाया। गाँव वासी जो कुछ आपस में बात कर रहे थे इससे मुझे जानकारी मिली कि जून, 2015 से श्री महेन्द्र मोदी आई॰पी॰एस॰ ने मेरी सुध लेने व मेरी सफाई करने के लिए गाँव वालो को समझाया था। बड़ी ना नुकुर करने के बाद मेरी सफाई की गई। अब मेरे चेहरे पर रौनक लौट आई है। सफाई के बाद इन्द्र के देवता ने दो बार आसमान से मेरे लिए अमृत टपकाया। अब छः सात फिट पानी मुझमें फिर आ गया है। मनुष्य जाति तो मेरी सन्तान की तरह है। 04 दिसम्बर, 2015 से गाय माता और मनुष्य दोनों ने मुझसे पानी निकालकर अपनी प्यास बुझाना शुरू कर दिया।मोदी जी ने न सिर्फ मुझे चमकाया, बल्कि उन्होंने मेरे विकास के कई अविष्कारी पहल भी की है। मुझमें पानी बैंक है। पर पास की दो गलियों से बरसात का पानी बहकर आगे बढ़ जाता है। श्री महेन्द्र मोदी ने मुझे ‘महाइन्द्र कूप’ के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया है - (1) (क) मेरे ऊपर ढक्कन लगाया जा रहा है जिससे बारिश का पानी गिरे तो मेरे उदर में ही गिरेगा। पर भाप बनाकर सूरज की धूप मुझे नहीं चुरा सकेगी। (ख) इससे मुझमें गन्दगी नहीं गिरेगी। (2) मेरे ऊपर का ढक्कन इतना बड़ा बनाया जा रहा है कि पहले की अपेक्षा ढ़ाई गुना पानी इन्द्र देवता सीधे मेरे जल बैंक में जमा करेंगे। (3) मेरे आजू बाजू की गलियों का पानी बरसात में मेरे पास रीचार्ज करने के लिए व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 12 फिट लम्बी, 03 फिट चैड़ी और 02 फिट गहरी तालाबी (टेंªच) श्रमदान से बनाई गई है। मैं आह्लादित हूँ क्योंकि यह तालाबी ;जतमदबीद्ध मेरे जीवन संगिनी की तरह मुझे जिन्दादिल बनाए रखेगी। पास की गलियों का पानी टेंªच से होता हुआ साफ होकर मेरे जल बैंक में बरसात भर जमा होता रहेगा।
अब मैं साल भर नई ऊर्जा से लबरेज पानीदार ‘महाइन्द्र कूप’ बन सकूँगा। यह ख्याल मुझे रोमांचित कर रहा है। मोदी जी के ‘मिशन महाइन्द्र कूप’ का अभियान आगे बढ़ रहा है।
पर एक कष्ट भी होता है यह सुनकर कि भारत में लाखों कुएँ दिए गए हैं। क्या आप मेरी एक विनती सुनेंगे? भगवान इन्द्र भी इसीलिए क्रोधित हैं कि इन्दारा (जलाशय) का सम्मान आजकल नहीं हो रहा है। काश! आप लोग भी इसी तरह अपने आसपास के मेरे जैसे कूप बन्धुओं को गोद लेते। यकीन मानिए, जितना पानी मेरे बैंक में आप द्वारा जमा किया जाएगा उससे प्राणिमात्र का ही लाभ होगा। मैं अपना जल खुद एक बूँद भी ग्रहण नहीं करूँगा। मैं अपने ही देश के नागरिकों के हित साधन करूँगा। आप अपना, अपने खलिहानों, अपने मवेशियों और गऊ माता का गला नहीं सुखाना चाहते हैं तो ‘मिशन महाइन्द्र कूप’ को सारे भारत में जन आन्दोलन बनाइए। क्या आप भारतीय संविधान की धारा 51 (क) (छ) के अनुसार अपने मौलिक कर्तव्य का संकल्प लेने को अभी से तैयार हैं? 
सजल भारत, हरित भारत, जय हिन्द, जय भारत।
 - सौम्या मोदी
14 पुलिस एन्क्लेव, विभूति खण्ड गोमती नगर, लखनऊ