‘‘भारत को विश्व का सिरमौर बनाना है तो उसे भारतीयता को बनाए रखना होगा। अपनी जमीन पर पैर रखे हुए समाज को वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप बदलना होगा। समाज को महिलाओं और कमजोर वर्ग के प्रति अनुचित व्यवहार की प्रथाओं और परंपराओं निकाल फेंकना होगा।
सीता के साथ तारा और मंदोदरी को भी समझना होगा। भारतीय महिला तेजश्विता और वात्सल्य से परिपूर्ण है। उसका वात्सल्य केवल मोह नहीं है, वह सन्मार्ग का दिग्दर्शन भी कराती है। इसीलिए जो परिवार प्रातः स्मरणीय पाँच कन्याओं (सीता, मन्दोदरी, तारा, द्रोपदी व कुन्ती) का स्मारण करेगा, उसके मर्म को समझेगा, वह सब प्रकार के पाप कर्मों से मुक्त रहेगा।
जीवन के प्रत्येक व्यवहार में भारतीयता को बनाये रखना अज का राष्ट्रधर्म है, क्योंकि भारतीयता हमारी जीवनी शक्ति है।’’ - मोहन भागवत





