दिनाँक 8 नवम्बर, 2015 को मालवीय सभागार, लखनऊ वि.वि. में आयोजित पर्यावरण एवं गोमती मित्र मण्डल राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मेलन के अवसर पर पर्यावरण, जल एवं गोमती संरक्षण के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया, जिनका विवरण प्रस्तुत है।
1. तपन अधिकारी - गोमती उद्गम स्थल माधौ टाण्डा एवं पीलीभीत जिले के समस्त गोमती प्रवाह क्षेत्र के 47 कि॰मी॰ में गोमती संरक्षण हेतु व्यापक जागरूकता सम्बन्धी अनेक प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज को सहभागी बनाया, वहीं शासन के साथ भी सम्पर्क सम्बन्ध बनाने की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
2. पवित्र सक्सेना - गोमती यात्रा के समय सुल्तानपुर में सीता कुण्ड घाट पर नगरपालिका के सहयोग से विसर्जन कुण्ड का निर्माण, स्वच्छता एवं घाट का निर्माण कराने के साथ गोमती मित्र मण्डल को निरन्तर विस्तार देते हुए सक्रिय रखते हुए नगर के अनेक पार्कों को पर्यावरण के अनकूल बनाने में अहं भूमिका निभाई तथा गोमती अलख यात्रा में सहसंयोजक की भूमिका का सफलता पूर्वक निर्वहन किया।
3. राधे कृष्ण दुबे - गोमती यात्रा के समय नैमिषारण्य को अरण्य युक्त करने का संकल्प लेकर चैरासी कोसी पऱिक्रमा पथ के 108 ग्रामों में देववृ़क्ष अभियान के साथ सम्पर्क एवं जागरूकता और उसके बाद गुरूपूर्णिमा से हरियाली तीज तक वृ़क्ष भण्डारा एवं वृक्षारोपण कराया, जिसके अन्र्तगत सामाजिक सहयोग से लगभग 40 हजार तथा सरकारी सहयोग से 15 हजार ट्रीगार्ड सहित पेड़ लगाये गये। इसके अतिरिक्त लखनऊ, गोमती नदी में विसर्जित होने वाली परम्परागत सामिग्री के विसर्जन के प्रति जागरूकता एवं प्रबन्धन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
4. महेन्द्र प्रताप सिंह - गोमती के तटवर्ती आस्था केन्द्रों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए वृ़क्षारोपण, स्वच्छता एवं पालीथीन मुक्त क्षेत्र बनाने लिए चन्द्रिकादेवी, लखनऊ, नैमिषारण्य, सीतापुर, धोबिया घाट सीतापुर, सैलानी माता जल-स्रोत स्थल, बाराबंकी एवं भौरेश्वर घाट, सरायन पर पिछले पाँच वर्षों से निरन्तर सामाजिक सहयोग के साथ महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।
5. कृष्णानन्द राय - गोमती के तट, घाट स्वच्छ रहें इस हेतु 2013 में लखनऊ के कुडि़याघाट पर गंगा दशहरा हेतु स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उसके बाद प्रति सप्ताह बृहस्पतिवार के दिन प्रातः काल कुडि़़याघाट पर निरन्तर स्वच्छता कार्य इनकी संकल्प बद्धता का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त नगर में पर्यावरण सम्बन्धित प्रत्येक अभियान में तत्परता के साथ सदैव समर्पित भाव से संलग्न रहते हैं।
6. राम शरण जी - लोक भारती की मासिक पत्रिका का 2015 जुलाई तक सफलतापूर्वक सम्पादन करने के साथ ही गोमती सम्बन्धी सभी आयोजनों में सक्रिय भूमिका के साथ ही पिछले 2 वर्ष से निरन्तर कुडि़याघाट की साप्ताहिक स्वच्छता अभियान में स्वयं की सक्रिय सहभागिता के साथ ही महत्वपूर्ण पे्रेरक का कार्य कर रहे हैं।
7. महन्त राम सेवक दास - लोक भारती द्वारा गोमती संरक्षण के लिए प्रारम्भ किए गये पहले दिन के कार्य से लेकर आज तक निरन्तर सक्रिय भूमिका निर्वहन के साथ गोमती यात्रा में गोमती बाबा के नाम से विख्यात होकर अपने लखनऊ में गोमती तट स्थित आश्रम को पर्यावरण के अनकूल बनाने में विशेष पहल करके प्रेरणा का कार्य किया। उनका आश्रम स्थल सदैव गोमती संरक्षण अभियान के हर कार्य के लिए उपलब्ध रहता है।
8. बल्लभाचार्य जी - गोमती-गंगा संगम स्थल कैथी घाट, वाराणसी क्षेत्र में गोमती के साथ गंगा की अन्य सहायक नदियों व पर्यावरण संरक्षण के निरन्तर सक्रिय भूमिका का निर्वहन करते हुए अलख जगाये रहते हैं।
9. चन्द्र भूषण तिवारी - पर्यावरण, जैव विविधता एवं जल-नदी संरक्षण के कार्य के लिए 24 घंटे समर्पित कार्यकर्ता एवं पे्ररक का कार्य करते हुए एक लाख पौधे लगाने के संकल्प के रूप में प्रकाश दीप बने हुए हैं।
10. अजय प्रकाश - वन विभाग के वरिष्ठ पद पर रहते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित भाव से पिछले कई वर्ष से हरियाली पखवारें के संयोजन की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं, जिससे अनेक संस्थानों द्वारा वृक्षारोपण के कार्य सम्पन्न हुए हैं।
11. डा॰ देव ज्योति - गोमती अलख यात्रा के समय सक्रिय सहभागिता के बाद हरदोई जिले के भरावन क्षेत्र में गोमती संरक्षण के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया, घाट स्वच्छता के कार्यक्रम आयोजित किए तथा निकटवर्ती गाँवों में जल स्रोत संरक्षण हेतु अब तक चार कुओं
के स्वच्छीकरण का कार्य पूरा कराने तथा उससे सम्बन्धित लोगों को भगीरथ सम्मान से सम्मानित कराने का कार्य करते हुए आगामी वर्ष में 51 कुओं के पुर्नजीवन के लिए कार्यरत हैं।
12. डा॰ नरेन्द्र मेहरोत्रा - वैज्ञानिक होने के साथ ही सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित होकर कार्य करते हुए गोमती अध्ययन यात्रा के संयोजक की भूमिका का निर्वहन कर अनेक प्रशासनिक एवं वैज्ञानिक क्षेत्र के लोगों को गोमती संरक्षण अभियान के साथ जोड़नें में महत्वपूर्ण भूमिका का सदैव निर्वहन कर रहे हैं।
13. कैप्टन सुभाष ओझा - हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में अधिवक्ता के रूप में कार्य करते हुए पैत्रिक स्थल प्रतापगढ़ में सई नदी संरक्षण के लिए कार्य के साथ ही गोमती अलख यात्रा के संयोजन के दायित्व का प्रभावी निर्वहन किया और निरन्तर सक्रिय भूमिका में हैं।
14. भास्कर अस्थाना - व्यवसाय से फार्मेसी के कार्य में संलग्न होने के साथ ही गोमती आदि नदियों के जल स्रोतों के पुर्नजीवन के लिए आवश्यक कम जल उपयोग एवं रसायन रहित शून्य लागत प्राकृतिक खेती के संयोजन मे अहं भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।
15. सी॰डी॰ सिंह - गोमती अध्ययन अभियान के पहले चरण से लेकर गोमती अलख यात्रा तक जौनपुर जिले में में अहं भूमिका का निर्वहन करने के साथ ही गोमती महोत्सव के आयोजन के माध्यम से गोमती तटवर्ती केवट समाज के साथ ही विद्यालयों तथा समाज के जागरूक एवं प्रभावी वर्ग को जोड़ने का निरन्तर कार्य कर रहे हैं।
16. वैद्य बाल शास्त्री - राजकीय सेवा से अवकाश प्राप्त करने के बाद गोमती अध्ययन यात्रा के साथ सक्रिय भूमिका, नैमिषारण्य के चैरासी कोसी परिक्रमा पथ पर देव वृक्ष अभियान, हरदोई के धोबिया घाट तथा नैमिष में एम॰पी॰ सिंह द्वारा प्रारम्भ किए गये तीर्थ संरक्षण के कार्य में निरन्तर महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।
17. डा॰ विजय कर्ण - गोमती अध्ययन यात्रा के तत्काल बाद इस अभियान को समाजव्यापी बनाने हेतु रेडियो धारावाहिक ‘गोमती तुम बहती रहना’ प्रसार भारती द्वारा निर्माण एवं 6 माह तक प्रसारण कराया जिसमें गोमती मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
18. महेन्द्र मोदी (आई॰पी॰एस॰) - उ॰प्र॰ पुलिस सेवा में महत्वपूर्ण शीर्ष अधिकारी होते हुए भी एक कार्यकर्ता की भांति गोमती संरक्षण हेतु आयोजित पहले दिन के स्वच्छता कार्यक्रम से लेकर निरन्तर सक्रिय सहभागी रहे। इसके साथ ही गोमती निरन्तर जल युक्त रहे, इस हेतु भूजल स्तर ठीक रखने हेतु वर्षा जल संचयन एवं भू-संभरण हेतु जागरूकता, प्रदर्शन, प्रसार एवं स्थापन हेतु प्रभावी कार्य कर रहे हैं।
19. डा॰ वेंकटेश दत्ता - गोमती अध्ययन के महत्वपूर्ण साथी तथा गोमती सम्बन्धी विभिन्न वैज्ञानिक व प्रयोगशाला सम्बन्धी कार्यों में अहं भूमिका का निर्वहन करते हुए गोमती संरक्षण रिपोर्ट एवं समाज के समक्ष गोमती संरक्षण का वैज्ञानिक पक्ष प्रस्तुत करने में अहं भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।
20. रिद्धि किशोर गौड़ - लखनऊ में गोमती तट कौडिन्य घाट (कुडि़या घाट) पर नियमित रूप से गोमती आरती, देव दीपावली एवं समय-समय पर विभिन्न नदी सम्बन्धित पर्वों पर स्वच्छता एवं सामाजिक जागरूकता के कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।
21. डा॰ अंशुमाली शर्मा - गोमती संरक्षण अभियान में राष्ट्रीय सेवा योजना एवं उससे सम्बन्धित शिक्षकों व छात्रों को सहभागी बनाने तथा उनके जीवन मिशन में यह विषय स्थान बनाये, इस हेतु महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। इसके अतिरिक्त गोमती की सहायक नदी सई के संरक्षण के लिए भी कार्य करते हुए अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं को निरन्तर प्रेरणा दे रहे हैं।
22. विन्ध्यवासिनी कुमार - गोमती की सहायक सबसे बड़ी एवं महत्वपूण नदी सई के संरक्षण का संकल्प लेकर, सई यात्रा एवं उसके उद्गम स्थल व प्रमुख आस्था केन्द्रों को पर्यावरण के अनुरूप विकसित करने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील हैं।
23. प्रेमशंकर अवस्थी - अवध क्षेत्र में ग्राम विकास प्रमुख के दायित्व का निर्वहन करते हुए प्रारम्भ से ही गोमती संरक्षण अभियान के प्रत्येक कार्य में अहं भूमिका का निर्वहन करते हुए, गोमती अलख यात्रा के सह संयोजक का दायित्व प्रभावी ढ़ंग से निभाया तथा गोमती क्षेत्र में पर्यावरण एवं जल संरक्षण के प्रभावी माॅडल बने इस दिशा में निरन्तर प्रयत्नशील हैं।
24. अरूण कुमार - गोमती संरक्षण के व्यवस्था पक्ष को गति देने के लिए तत्पर एवं उपलब्ध रहकर सभी गोमती मित्रों के संबल की महत्वपूर्ण भूमिका का निरन्तर निर्वहन कर रहे हैं।
हमारे आधार स्तम्भ - गोमती संरक्षण अभियान को गति प्रदान करने में अनेक महत्वपूर्ण नाम हैं जो इस अभियान की रीढ़ के रूप में निरन्तर कार्य करते रहे हैं। उनमें से मनकामेश्वर नाथ की महन्थ देव्यागिरि, शिया धर्मगुरू कल्बे सादिक, लोक भारती के अध्यक्ष विश्वनाथ खेमका, सिंचाई विभाग के अधिकारी रवीन्द्र कुमार, एन्वायरोकेम रिसर्च एवं लैब के डा॰एम॰एम॰ अग्रवाल, वरिष्ठ पर्यावरणविद वी॰के॰ जोशी, शिक्षाविद अंशु केडिया, गोपाल मोहन उपाध्याय, श्रीकृष्ण चैधरी, मदन भार्गव, मेवा लाल, लोक भारती के महामन्त्री अशोक सिंह, अलख यात्रा के सह संयोजक डा॰ महेन्द्र अग्निहोत्री तथा लोक सम्मान पत्रिका की सम्पादक डाॅ॰ भारती पाण्डेय एवं सम्पादक मण्डल के कार्यकर्ता विशेष उल्लेखनीय हैं। गोमती प्रवाह क्षेत्र एवं उसकी सहायक नदियों पर कार्यरत अनेक प्रमुख मित्रों का उल्लेख नहीं हो सका है, जो सदैव हमारी प्रेरणा हैं।
- श्रीकृष्ण चौधरी






