Tuesday, December 29, 2015

हो विकास की आरती- दयानन्द जड़िया ‘अबोध’

युवकों! देखो भारत माता,
तुम को आज पुकारती।
नवल क्रांन्ति से भ्रान्ति मिटाने,
लानी शान्ति निहारती।।
युवकों! देखो.................(1)
कहती निज अनुरक्ति भक्ति सँग,
भरो शक्ति हुंकार को।
आतंकी संहार देश से,
मेटो भ्रष्टाचार को।।
नव निर्माण सुउन्नति द्वारा,
हो विकास की आरती।
युवकों! देखो...................(2)
अविरल निर्मल हो गंगा जल,
पर्यावरण स्वच्छ हो।
कन्यायें हो सभी सुशिक्षित,
भाल देश का उच्च हो।।
दिखे हमारी बसुन्धरा नित,
हरिताम्बर हो धरती।
युवकों! देखो.................(3)
हो विलुप्त मत प्राणि योनियाँ,
आर्य संस्कृति रक्षित हो।
तज वैराग्य द्वैष ईर्षा को,
प्रेम भावना इच्छित हो।
आवाहन करती ‘अबोध’ है,
सब युवजन का भारती।
युवकों! देखो भारत माता,
तुम को आज पुकारती। (4)
- चन्द्रा-मण्डप, 370/27 हाता नूरबेग
संगमलाल बीथिका, सआदतगंज, लखनऊ-226003