Tuesday, December 29, 2015

सम्पादकीय..................डाॅ॰ भारती पाण्डेय

युदयीमान भारत की युवा शक्ति हमारी सर्वोत्कृष्ट सम्पदा है। युवाशक्ति राष्ट्र-निर्माण की अक्षय ऊर्जा है। युवा में अप्रत्याशित सृजन व परिवर्तन की अन्तर्निहित शक्ति विद्यमान है। भारत का युवा अपनी सृजनात्मकता द्वारा राष्ट्र को समग्र विश्व में एक महाशक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करने में अतुलनीय योगदान देने की सामथ्र्य रखता है। भारत की गौरवशाली संस्कृति, परम्परा, जीवन मूल्यों, सदाचार एवं पर्यावरणीय व पारिस्थितकीय संतुलन को अक्ष्क्षुण बनाये रखने में युवा जनशक्ति की भूमिका नितान्त उपकरणात्मक सिद्ध हो सकती है। वस्तुतः किसी भी राष्ट्र के वास्तविक संसाधन उसकी भावना प्रधान एवं कुशल जनशक्ति होती है। और इसमें भी केन्द्रीय प्रस्थिति ‘युवा शक्ति’ की होती है।
युवा आयु समूह की अवधारणा को लेकर विभिन्न अभिमत प्रचलित हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 15 से 24 आयु वालों को ‘युवा’ के रूप में परिभाषित किया गया है। भारत सरकार की राष्ट्रीय युवा नीति 2003 में 15 से 35 आयु वाले लोगों को युवा माना गया। युवा विकास के प्रकल्प को व्यापकता प्रदान करने की दृष्टि से राष्ट्रीय युवा नीति 2014 में 15 से 29 आयु समूह की जनसंख्या को ‘युवा’ के रूप में अवधारित किया गया है। इसके अनुसार भारत की कुल जनसंख्या में युवाओं का हिस्सा 27.5 प्रतिशत बैठता है। प्रक्षेपण दर्शाते हैं के वर्ष 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की चैथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। अमेरिका, चीन एवं जापान की अर्थव्यवस्थायें क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर होगी। हालांकि इन तीन विदेशी अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धजनों की जनसंख्या के उच्चतर होने का जोखिम रहेगा, जबकि भारत में ‘युवा शक्ति’ की सापेक्षिक अधिकता के कारण ‘जनांककिकीय लाभांश’ प्राप्त होने का अवसर उपलब्ध होगा। ऐसे में आगामी कालखण्ड में युवाओं की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका अधिक प्रखर होगी। वर्तमान में केन्द्र सरकार द्वारा तैयार की गई युवा-नीति 2014 में अभिकल्पना की गई है कि देश के युवा को अपने पूर्ण सम्भाव्य को प्राप्त करने हेतु शक्तिशाली बनाना होगा। और उनके माध्यम से राष्ट्रों के समुदाय में भारत को सम्यक स्थान दिलवाने के लिए उसे समर्थवान बनाना होगा। सरकार की इस अभिकल्पना कर विचारणा निःसन्देह तार्किक व प्रासंगिक प्रतीत होती है। किन्तु इस अभिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु युवाओं को शिक्षा, कौशल व उद्यमिता विकास, आजीविका के विविधीकृत एवं पोषणीय स्रोतों एवं स्वास्थ्य इत्यादि सुविधाओं से सुसज्जित करना होगा। इसके लिए ‘युवा बजटिंग’ की पहल के अन्तर्गत सरकार को युवा पूँजी निर्माण में अधिक निवेश करना होगा। इस उपक्रम द्वारा युवाओं की उत्पादकता में वृद्धि कर राष्ट्र-निर्माण के प्रकल्प को सुदृढ़ किया जा सकता है। इसके द्वारा ही ‘जनांककिकीय लाभांश’ को वास्तविकता में परिणत करना सम्भव होगा। अन्यथा भारत विपुल आर्थिेक सम्भावनाओं को खो देने के लिए विवश हो सकता है।
तृणमूल स्तर पर लोक कल्याण के कार्यक्रमों के कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण में युवाओं की भूमिका को सक्रिय करने के लिए ठोस प्रयास किये जाने होंगे। इससे विकास व कल्याण कार्यक्रमों का शतप्रतिशत लाभ लक्षित समूहों तक पहुँचाने में सहायता मिलेगी। लोक भारती युवाओं को सीमांतित लोगों, निराश्रितों, निःशक्तजनों, वनवासी, गिरिवासी एवं विपन्नों तथा जल, जमीन, जानवर एवं जंगल हितार्थ समाकलित कार्य-सम्पादन हेतु आमंत्रित करती है।
लोक भारती को पूर्ण विश्वास है कि उसकी यह अभिमन्त्रणा फलदायी होगी।