इस धरती पर, इस धरती पर, इस धरती पर।
बनूँगा अच्छा एक इन्सान, इस धरती पर।
सब को मेरा प्रणाम, इस धरती पर।
सब का करूंँ सम्मान,
इस धरती पर।।
जैसे पानी, हवा, वृक्ष, पशु, सबके हित ही जीते हैं।
बिना किसी भी भेदभाव के, सबका दुख हर लेते है।।
मैं भी जिऊँगा इस दुनियाँ में,
बन करके इन्सान।
इस धरती पर.... (1)
कोई न भूखा रहे धरा पर फल वाले वृक्ष लगायेंगे।
धरती का कोना-कोना फल-फूलों से महकायेंगे।।
दीन दुखी, दुबले-पतले का,
बनूंगा जीवन प्राण।
इस धरती पर.... (2)
अज्ञानी निरक्षर रहे न कोई धरती पर मानव संतान।
सभी सुशिक्षित, संस्कारित होंगे जब जग के इन्सान।।
समझदार, ज्ञानी बनकर,
जन-जन का सदा करूँ कल्याण।
इस धरती पर.....(3)
हम सब जन मिलकर, जल, पर्यावरण बचायें।
है वसुधा परिवार हमारा, सब जग को समझायें।।
सबके हित में जीवन मेरा,
सबके चेहरे पर मुस्कान।
इस धरती पर.....(4)
- चन्द्रभूषण तिवारी





