Saturday, September 6, 2014

समग्र नदी-संस्कृति एवं पारिस्थितिकी तन्त्र प्रबन्धन के लिए मार्गदर्शी: चैदह नदी सूत्र. - डा॰ वेंकटेश दŸाा

नदियों को पहले बेजान कर उन्हें पुनर्जीवित करने की कोशिश के बजाय, हमे उन्हें प्रारम्भ से ही स्वस्थ रखना होगा। क्योंकि हम सबको स्वस्थ रहने के लिए, हमारी नदियों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। 40-50 साल पहले बिना किसी फंडिंग प्रोजेक्ट या एक्शन प्लान के हमारी नदियांँ साफ थीं, निर्मल थीं, अविरल थीं, क्योंकि तब हमारे गाँव के लाखों किसान अपनी जिम्मेदारी को अपने कंधों पर लेकर पानी का काम करते थे।
विकास की अंधी दौड़ ने हमारी पारम्परिक समझ व जिम्मेदारी को कुंठित और साझेदारी के भाव को दिग्भ्रमित किया, परिणमतः आज हम नदियों में साफ पानी के लिए तरस रहे हैं।
वर्तमान समय में पारम्परिक नदी, नाव और गाँव की संस्कृति पर विश्वास कर अगर हम जन भागीदारी की योजना बनाएं और सामाजिक जागरूकता से लोगों को जोड़ें तो हम काफी हद तक अपनी नदियों को सुजला-सजला बनाते हुए गंगा को अविरल-निर्मल और नैसर्गिक बना सकते हैं। परन्तु इसके लिए हमें इन 14 नदी सूत्रों का स्मरण रखना होगा।
¨ चैदह नदी सूत्र -
1. नदियाँ हमारी प्राकृतिक विरासत का हिस्सा हैं।
2. जल, भूआकृतियाँ और कुदरती-निवास प्रशासनिक सीमाओं मे बंधे नहीं होते। 
3. नदियाँ प्राकृतिक रचनाएँ हैं, उनके कारणों को समझे बिना जब चाहे, जहांँ चाहे काटना या मोड़ना प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकती हैं।
4. नदियाँ हमारे शरीर में बहने वाली रक्त शिराओं के समान हैं, जिनका कार्य शुद्ध रक्त को शरीर में प्रवाहित करना होता है, जबकि अशुद्ध रक्त के प्रवाह व शुद्धीकरण के लिए धमनियाँ होती हैं। शरीर की यह प्रकिृया जब तक ठीक है हम स्वस्थ हैं। उसी प्रकार समाज को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि नदियों को गंदगी ढ़ोने वाला नाला नहीं बनाऐं। अभी तक जो भूल हुई है,  अन्ततः उसमें सुधार करते हुए नदियों से गंदे नालें को अलग करना ही होगा। इसी में हमारा भविष्य सुरक्षित है।
5. नदियों के बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन्स) की प्राकृतिक प्रणालियाँ हजारों-हजारों सालों में विकसित हुई हैं, उनका अतिक्रमण या अपहरण आपदा का कारण बन सकते हैं। 
6. एक नदी, नदी बेसिन के हाइड्रोलाॅजिकल एकता का अविभाज्य अंग हैं और लैण्डस्केप घटक पानी और बाढ़  के मैदानों के प्रवाह के साथ जुड़े हुए हैं।
7. भू-जल गैर-मानसून मौसम में नदी प्रवाह को बनाये रखता है, अतः भूजल के स्तर को हम भी बनाये रखें।
8. सहायक नदियां एवं झीलें एक नदी के जीवन कार्यों के बनाये रखती हैं, अतः हम भी उन्हें जीवन्त बनाये रखें।
9. नदियांँ पारिस्थितिकी प्रणालियों में मीठे पानी की सबसे अधिक उत्पादक प्रणालियाँ हैं, जो जीवन का उत्पादन व रक्षण करती हैं।
10. नदियों का प्रवाह ही उनका जीवन है।
11. नदी के प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र (फ्लड प्लेन) नदी का अभिन्न हिस्सा हैं, अतः उसकी चोरी नहीं की जानी चाहिए।
12. नदी का बिस्तर (रिवरबेड) नदी का अभिन्न हिस्सा है, उसके साथ दुव्र्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
13. नदी का स्वास्थ्य उसके पारिस्थितिकी तन्त्र के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। अतः नदी संरक्षण का अर्थ है उसकी समस्त पारिस्थितिकी प्रणाली का संरक्षण।
14. भारत में नदियों और आध्यात्म के बीच सार्वभौमिक सम्बन्ध है। अतः नदी संरक्षण एवं प्रबन्धन की योजनाओं में आध्यात्मिक पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा।