आजादी की पहली लड़ाई यानी 1857 में बहादुर शाह जफर के झण्डे का रंग हरा था। इस पर खिलते हुए कमल के फूल का भी एक चित्र छपा था और झण्डे के दूसरे हिस्से में रोटी की तस्वीर थी।
आइरिश महिला सिस्टर निवेदिता ने पहली बार भारत के राष्ट्रीय झण्डे की अवधारणा दी। साल 1905 को प्रस्तावित इस झण्डे को आज कोलकता के आचार्य भवन म्युजियम में रखा गया है।
प्रथम राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चैक (ग्रीन पार्क) कलकŸाा में फहराया गया। जिसे अब कोलकता कहते हैं। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।
द्वितीय ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किए गये कुछ क्रान्तिकारियों द्वारा फहराया गया था।
वर्ष 1931 ध्वज के इतिहास में एक यादगार वर्ष है। तिरंगे ध्वज को हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया। यह ध्वज केसरिया, सफेद और मध्य में चलते हुए चरखे के साथ था।
स्वतन्त्रता मिलने के बाद ध्वज में चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्मचक्र को दिखाया गया। इस प्रकार तिरंगा भारत का राष्ट्रीय ध्वज बना।
स्वतन्त्र भारत की संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का वर्तमान प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया।
गुजरात की स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी महिला हंसा मेहता ने 14-15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि जिस समय आजादी की आधिकारिक घोषणा हुई, संविधान सभा के चेयरमैन राजेन्द्र प्रसाद को पहला तिरंगा पेश किया।
फ्लैग फाउन्डेशन आफ इण्डिया के सौजन्य से राजधानी दिल्ली के कनाट प्लेस में देश के सबसे बडे आकार का (90 गुणे 60 फिट) राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया गया है, जो 24 घंटे फहराता रहता है। इसकी ऊँचाई 207 फिट है। इतनी उँचाई के तिरंगे देश के कई अन्य स्थानों पर भी स्थापित किए गये हैं। ु





