Saturday, September 6, 2014

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की भारत-नेपाल सम्बन्धों की ऐतिहासिक यात्रा. - संकलित

‘‘भारत और नेपाल के रिश्ते गंगा और हिमालय जितने पुराने हैं’’, भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के नेपाल की संविधान सभा में यह उद्गार सुनकर ऐसा लगा, जैसे तीन महीने पहले के सीन को दुबारा दिखाया जा रहा हो। नरेन्द्र मोदी ने जब नेपाल की संसद को सम्बोधित किया, तो एक बार फिर उनके भाषण में वही ओज दिखा, जो उनकी चुनावी सभाओं में दिखता था। काठमाण्डू में दिए गये मोदी के भाषण की देश में हर जगह तारीफ हुई। जब वह भारत-नेपाल रिश्तों को नई मजबूती देने की बात कर रहे थे, तो एक तरह से देश के बहुत से उन लोगों की भावनाओं को ही व्यक्त कर रहे थे, जो पिछले कई साल से यह नहीं समझ पा रहे थे कि ऐतिहासिक रिश्तों और साझा संस्कृति के बावजूद ये दोनो पड़ोसी एक-दूसरे से इतने दूर क्यों होते जा रहे हैं?
इसे इस तरह समझा जा सकता है कि 17 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमन्त्री आपसी रिश्ते मजबूत बनाने के लिए नेपाल गया। इस बीच प्रधानमन्त्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपेई ने जरूर काठमाण्डू की यात्रा की थी, लेकिन वह सार्क सम्मेलन में शामिल होने के लिए थी, द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नहीं।
इन सबको देखते हुए प्रधानमन्त्री मोदी ने नेपाल में जो किया और जो कहा, उसी की इस समय सबसे ज्यादा जरूरत थी। प्रधानमन्त्री को अभी सŸाा संभाले 100 दिन भी नहीं हुए हैं और इस बीच उन्होंने नेपाल यात्रा का कार्यक्रम बनाकर यह संदेश तो दे ही दिया है कि उनकी प्राथमिकता सूची में नेपाल का नम्बर काफी ऊपर है। एक विचारक के शब्दों में कहें तो ‘‘यूपीए की विदेश नीति ऊपर से नीचे की ओर थी, अथार्त सबसे ऊपर अमेरिका और सब उसके बाद में। जबकि, एनडीए की विदेश नीति नीेचे से ऊपर की ओर है, अर्थात सबसे पहले पड़ोसी उसके बाद अन्य देश।’’
मोदी ने सामाजिक संवेदना के अटूट रिश्ते के भाई जीत बहादुर को अपने परिवार से 15 साल बाद मिलवाकर नेपाली जनता का दिल जीत लिया। इसके साथ ही मोदी ने प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद एवं पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेई के अधूरे कार्यों को पूरा करने की दिशा में सोमनाथ-काशी विश्वनाथ-पशुपतिनाथ तथा जनकपुरी व बुद्ध जन्मस्थली लुम्बिनी को जोड़ कर सांस्कृतिक सम्बन्धों का जो ‘रक्षा-सूत्र’ बाँधा, उसे इतिहास स्वर्णाक्षरों में लिखेगा।
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने औपचारिकताओं से आगे बढ़कर नेपाली संसद में अविश्वास के संदेहों (माओवादी नेता 1950 भारत-नेपाल सन्धि के अन्यायपूर्ण बताकर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने का कार्य करते रहे) को पाटने और छोटे राष्ट्र पर प्रभुत्व कायम करने की आशंकाओं को खत्म करते हुए नेपाल के लोगों से जिस तरह का संवाद कायम करने की कोशिश की, उसकी तारीफ नेपाल के प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति ने ही नहीं, नेपाल के पूर्व प्रधानमन्त्री व वर्तमान विपक्षी नेता भारत का प्रचण्ड विरोध करने वाले पुष्प कमल दहल प्रचंड ने यह कहते हुए की, ‘दोनों देशों के बीच रिश्तों का नया अध्याय शुरू हुआ है।’
राजनीतिक विरोध के कारण प्रचण्ड से अलग हुए नेपाल के वरिष्ठ राजनेता बाबूराम भटराई ने मोदी से मिलने के बाद कहा, ‘हम बेहद सन्तुष्ट हैं।’ नेपाल कांग्रेस के उपाध्यक्ष रामचन्द्र पौडयाल ने कहा,  ‘मोदी ने जिस तरह खुद को पेश किया, जिस तरह उन्हांेने द्विप़क्षीय प्राथमिकता पर रखा है, उससे कहा जा सकता हैं कि अब साथ मिलकर काम करने का समय है।’ मोदी ने रात्रिभोज में नेपाली पीएम सुशील कोइराला से भी स्पष्ट कहा था कि, ‘आपको 1950 की सन्धि में क्या बदलाव चाहिए? नेपाल नया प्रस्ताव पेश करे, भारत उस पर चर्चा को तैयार है।’
नेपाल की संविधान सभा के बाहर कार से उतर कर आम लोगों से हाथ मिलाने की नरेन्द्र मोदी की तस्वीर फेसबुक पर अपलोड करते ही छा गई। इस तस्वीर को 65 हजार लाइक और हजारों कमेंट मिले। टापसी डाटकाम के मुताबिक, ट्विटर पर नेपाल के 39 हजार से ज्यादा ट्विीट में ज्यादातर मोदी को समर्पित थे।
इसके अतिरिक्त मोदी जी की इस ऐतिहासिक यात्रा के कुछ अन्य भी महत्वपूर्ण पहलू हैं -
1. स्वतन्त्र अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की नदियों पर जल विद्युत परियोजनाओं के जरिए 83 हजार मेगावाट तक बिजली उत्पादित की जा सकती है। लेकिन अभी नेपाल इसका दो प्रतिशत उत्पादन भी नही कर पा रहा। इसके लिए जलविद्युत परियोजना सन्धि होनी है, जिसके लिए 45 दिनों में बिजली व्यापार और पंचेश्वर विकास प्राधिकरण गठित करने का समझौता होगा। जिसके अन्र्तगत 5600 मेगावाट पंचेश्वर जलविद्युत परियोजना का डीपीआर एक वर्ष में आयेगा।
2. 83 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाली ऊपरी करनाली परियोजना पर भी 45 दिनों में करार पूरा होगा, जिससे अभी केवल 800 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन होता है।
3. महाकाली नदी पर तीन पुलों का निर्माण भारत करायेगा, जिससे नेपाल, उŸाराखण्ड एवं भारत के बीच छोटा व आसान मार्ग मिलेगा।
4. जनकपुर, बराह क्षेत्र और लुम्बिनी के विकास का भी प्रस्ताव किया गया है।
5. लुम्बिनी को भारत के बौद्ध स्थलों से जोड़े जाने के प्राजेक्ट पर भी कार्य होगा।
6. प्रधानमन्त्री ने घोषणा की है कि भारत शीघ्र ही अन्तरिक्ष में एक शार्क उपग्रह स्थापित करेगा, जिसका लाभ शार्क देशों में विशेषतः नेपाल को होगा।
उपरोक्त के साथ ही मोदी द्वारा भारत-नेपाल सीमाओं के सम्बन्ध में कहा गया यह वाक्य- ‘हमारे बार्डर सामाजिक रिश्तों के बैरियर न होकर ब्रिज बनें।’ अत्यन्त महत्वपूर्ण है। ु