Saturday, September 6, 2014

गंगा बचाओ अभियान - श्रेयस्कर गौड़

जकड़ बेडि़यों में डाला गंगा बेहाल हुई है,
नालों का मैला ढ़ो-ढ़ो कर गंगा बदहाल हुई है।
पापों को धोने वाली असहाय सी हमें पुकारे,
करें भगीरथ सा प्रयास, आओ गंगा उद्धारें।

गंगा पुकारे, चलो रे चलो रे।
गंगा पुकारे, मिलके चलो रे।
चलो चलो गंगा को बचाने चले चलो,
प्रण करके गंगा को बचाने चले चलो।

अब ना हम कूड़ा करकट माँ की झोली में डालें,
इतने वर्षो तक जो मैला हुआ है उसे निकालें।
जीवनदायनी माँ गंगा के अंचल की हरियाली,
जल जीवों के जीवन को आओ मिलकर के उबारें।

गंगा पुकारे, चलो रे चलो रे।
गंगा पुकारे, मिलके चलो रे।
चलो चलो गंगा को बचाने चले चलो,

प्रण करके गंगा को बचाने चले चलो।
गंगा केवल नदी नहीं, निजसंस्कृति की गरिमा है,
प्रयाग, काशी, हरिद्वार, गाते जिसकी महिमा हैं।
माँ गोदी में नहलाकर पापों को हर लेती है,
छोटे बड़े अनगिनत जीवों को जीवन देती है।
आज वही गंगा अपनी दुुर्दशा देख रोती है,
हैं दुष्कर्म हमारे पर वो अपने सर ढोती है।

गंगा पुकारे, चलो रे चलो रे।
गंगा पुकारे, मिलके चलो रे।
चलो चलो गंगा को बचाने चले चलो,
प्रण करके गंगा को बचाने चले चलो। ु
- (गीतकार, संगीतकार व गायक)