भारत राष्ट्र को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें एक ऐसे राष्ट्र का विजन लेकर आगे बढ़ते रहना है, जिसके बासिंदे गरीबी की रेखा के काफी ऊपर उठ चुके हों। उनकी शिक्षा और सेहत स्तरीय हो तथा उस राष्ट्र की सुरक्षा अचूक हो और तमाम बड़े क्षेत्रों में उस मुल्क की उत्पादन क्षमता ऐसी गुणवŸाा पूर्ण हो, जिससे देश में खुशहाली आये और कायम रहे।
इस तरह के विजन की रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया दो दशक के पहले ही तय हुई थी। कई टीमों ने दिन-रात परिश्रम करके इसे तैयार किया था। आइए, 1990 के दशक के अपने उन अनुभवों को आपसे साझा करता हूंँ, जो साल 2020 के भारत से जुड़े हैं। मुझे टेक्नोलोजी इन्फार्मेशन, फाॅरकास्टिंग ऐंड ऐसेसमेन्ट कौंसिल (टीआईएफएसी) की सदारत की जिम्मेदारी दी गई थी। यह एक स्वायŸा संस्था है, जो भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत 1988 में गठित हुई। राष्ट्रीय महत्व के विशिष्ट क्षेत्रों में इनोवेशन की सहायता और टेक्नोलाॅजी में विस्तार के लिए इसका गठन हुआ था। इसकी पहली ही बैठक में कौंसिल के सदस्यों नें फैसला किया कि साल 2020 तक भारत को आर्थिक रूप से विकसित राष्ट्र में बदलने की योजना यह परिषद तैयार करेगी।
यह वह समय था, जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री पी॰वी॰ नरसिंह राव द्वारा शुरू आर्थिक उदारीकरण का प्रभाव दिखने लगा था और कौंसिल के सदस्य इसे लेकर आशंकित थे कि बदलते आर्थिक व सामाजिक हालात में हम कैसे एक दीर्घकालिक योजना तैयार कर सकते हैं, जबकि बीस साल बाद के हालात बिल्कुल भिन्न होंगे। उस समय देश की अर्थव्यवस्था करीब पांँच-छह फीसदी की सालाना दर से बढ़ रही थी और हमें अगले दस वर्षों के लिए कम से कम दस फीसदी की विकास दर के बारे में सोचना था, ताकि लोकतान्त्रिक, बहुभाषी, बहुधार्मिक व बहुसांस्कृतिक आबादी का विकास हो पाए।
टीआईएफएसी की टीम ने दूसरे विभागों के साथ मिलकर दो वर्ष से भी अधिक समय तक इस पर काम किया और करीब पच्चीस रिपोर्टें तैयार की गईं। इनमे विविध क्षेत्रों जैसे कृषि-ख़ाद्य प्रसंस्करण, नागरिक उड्डयन, विद्युत, जल-मार्ग, सड़क-परिवहन, दूरसंचार, दूरदर्शन, खाद्यान्न और खेती, इंजीनियरिंग उद्योग, स्वास्थ्य-सेवा, जीव विज्ञान और जैव-प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित विजन शामिल थे।
बहरहाल, अब मै आपको बताता हूंँ कि साल 2020 का भारत आपको कैसा दिखना चाहिए?
¨ पहला, वह एक ऐसा देश हो, जहांँ शहरों और देहातों के बीच का अन्तर नाम मात्र का रह जाये।
¨ दूसरा, जहाँ बिजली और स्वच्छ पेयजल तक सबकी पहुँच हो और सबको ये दोनो समान रूप से मिलें।
¨ तीसरा, जहाँ देश के विकास में कृषि, उद्योग व सेवा क्षेत्र समान रूप से सहायक हों।
¨ चैथा, जहांँ सामाजिक या आर्थिक भेदभाव के कारण कोई मेधावी छात्र स्तरीय शिक्षा से वंचित न रहने पाए।
¨ पाचवाँ, भारत दुनियाँ भर के विद्वानों, वैज्ञानिकों व आविष्कारकों के लिए उपयुक्त गंतव्य हो।
¨ छठा, जहाँ सबको बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।
¨ सातवाँ, जहाँ गरीबी का पूर्ण उन्मूलन हो चुका हो, निरक्षरता मिट चुकी हो, बच्चों व औरतों के खिलाफ अपराध थम चुके हों।
¨ आठवाँ, समाज में कोई खुद को उपेक्षित न पाये।
¨ नौवाँ, भारत एक समृद्ध, स्वस्थ, सुरक्षित, आतंकवाद मुक्त, शान्त और खुशहाल राष्ट्र बने और वह वहनीय विकास के मार्ग पर सतत रहे।
¨ दसवाँ, भारत रहने के लिहाज से दुनियाँ की बेहतरीन जगहों में से एक हो और उसे अपने नेतृत्व पर गर्व हो।
इस सबके लिए हमें उन पाँच क्षेत्रों में बदलाव करना होगा, जिनमें यह देश सामथ्र्य रखता है और यह क्षेत्र हैं, कृषि एवं खाद्य-प्रसंस्करण, शिक्षा व सेहत, सूचना एवं संचार-प्रौद्योगिकी, ढ़ाँचागत विकास और अहम प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता।
इण्डिया विजन-2020 दस्तावेज पी॰वी॰ नरसिंह राव के शासनकाल में तैयार हुई। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमन्त्री अटल बिहारी बाजपेई को दिया गया, जिन्होंने संसद में इसको रखा और स्वतन्त्रता दिवस के अपने एक भाषण में इसका जिक्र भी किया कि साल 2020 से पहले भारत आर्थिक तौर पर विकसित राष्ट्र बन जायेगा। मेरे राष्ट्रपति काल के दौरान राज्यपालों के एक सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने भी यह घोषणा की थी कि उनकी सरकार देश को आर्थिक समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ाने का काम करेगी।
किसी भी राष्ट्रीय विजन को साकार करने में कम से कम पन्द्रह साल लग ही जाते हैं। लोकतान्त्रिक तरीके से निर्वाचित कम से कम तीन सरकारों को इस पर काम करना होता है। राष्ट्रीय दृष्टि को किसी एक पार्टी का एजेन्डा नहीं माना जा सकता, पार्टियों के घोषणा-पत्रों का हिस्सा हो सकती है। सत्ता में मौजूद एक पार्टी के कामकाज का तरीका पिछली पार्टी से अलग हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय विजन सबसे ऊपर होती है।
विजन 2020 किसी एक पार्टी या सरकार से ताल्लुक नहीं रखती। यह देश का सपना है। हमारे पास इस विजन को हासिल करने के लिए अब छह साल से भी कम समय बचा है। इसलिए देश को प्राथमिकता के साथ इसे लेना चाहिए और लक्ष्य को पाने के लिए इससे जुड़े सभी हितधारकों का मनोबल बढ़ाना चाहिए।
देश ने कृषि उत्पादन और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने में काफी प्रगति की है। भारत दुनियाँ का सबसे बड़ा मोबाइल फोन उपभोक्ता बन चुका है। आटोमोबाइल इण्डस्ट्री के क्षेत्र में हम दुनियाँ में तीसरा स्थान रखते हैं। इसके अलावा, ग्रामीण व शहरी विकास योजनाओं ने आधारभूत ढ़ाचों को विस्तार दिया है, जैसे स्वर्णिम चर्तुभुज सड़क मार्ग, मेट्रो शहरों में विश्वस्तरीय हवाई अड्डे वगैरह। साल 2012 में भारत की साक्षरता दर 74.04 फीसदी हो गई थी। इन तमाम तरक्कियों के बीच हमें यह भी देखना है कि 1990 के दशक में हमने क्या सोचा था और उसे पाने में अभी अन्तर क्यों है?
यह हमारी राजनैतिक व्यवस्था ही है, जो किसानों, वैज्ञानिकों, इन्जीनियरों, डाक्टरों, शिक्षकों, वकीलों और अन्य पेशेवर लोगों को हरित क्रान्ति, श्वेत क्रान्ति, स्पेस मिशन, साइन्स एण्ड टेक्नोलाॅजी मिशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेन्ट मिशन में देश को कामयाबी दिलाने के लिए जरूरी मदद मुहैया करती है। आज हम जो कुछ हैं अपनी इस राजनैतिक व्यवस्था की वजह से हैं। इसीलिए नौजवानों को राजनीति से दूर नहीं रखना चाहिए, बल्कि देश को सभी क्षेत्रों मे महान बनाने के लिए इसका नेतृत्व, मार्ग-दर्शन व प्रेरणा के वास्ते उन्हें आना चाहिए। युवाओं का मन इस भावना से ओत-प्रोत होता है कि, ‘मैं यह कर सकता हूंँ’ और उसे यकीन है कि ‘भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा।’ अगर आप यह महसूस करते हैं कि आप यह कर सकते हैं, तो निश्चित रूप से भारत पंचायत से लेकर संसद तक रचनात्मक नेतृत्व को पा जायेगा। ु
- पूर्व राष्ट्रपति





