Saturday, September 6, 2014

सुखी जीवन हेतु यह पंचकर्म अपनाएँ.सत्यदेव मिश्र

माँ जगदम्बे सीता ने हनुमान जी को आर्शीवाद दिया था, कि ‘अजर अमर गुणनिधि सुत होऊ’, करहु बहुत रघनायक छोहू।’ अतः हनुमान जी का जहाँ स्मरण होगा, वहांँ किसी न किसी रूप में वे  अवश्य उपस्थित होते हैं और कल्याण करते हैं, अतः दिन में एक बार ताली बजाकर हनुमान जी का स्मरण करें। इसके साथ ही अपने पंचतत्वों से निर्मित शरीर और उसके जीवन की सुख-शान्ति हेतु निम्न पंचकर्मों को अपनाऐं।
1. प्रातः दो मुट्ठी चना व 50 ग्राम गुण एक कागज पर लेकर, एकान्त में किसी पेड़ के नीचे रखकर हनुमान जी को याद करंे। वे किसी भी रूप में आकर उसको ग्रहण करेंगे, ऐसा निश्चित है। इसके साथ ही ग्यारह फलदार या छायादार पेड़ लगायें व उनकी सुरक्षा भी करें, जैसे - जामुन, अमरूद, केला, बरगद, नीम, पीपल, पाकड़ आदि।
2. सुबह उठते ही बासी पानी से अच्छी तरह से कुल्ला करके उस पानी को पी लें, तत्पश्चात् एक प्लेट में दो मुट्ठी चावल व एक कप पानी चिडि़यों हेतु एकान्त में खुली जगह पर रख दें, जहांँ वे निडर हो कर खा-पी सकें। वहीं पर एक कोने में चींटियों हेतु एक छोटा चम्मच चीनी रख दें, जहांँ किसी का पैर न पड़े।
3. दोपहर को दो रोटी या दो रोटी की लोई, पिछले दिन का बचा हुआ चावल जो चिडि़यों को दिया गया था, को लोई में रखकर गौ माता को खिला दें, तथा रात्रि में दो रोटी या डबलरोटी पालतू नहीं बाहरी कुŸो को खिलायें।
4. शाम के समय दो मुट्ठी लाई अथवा 100 ग्राम आट की गोलियां बनाकर बहते हुए पानी में मछलियों को खिलाएं।
5. यदि आप स्वस्थ हैं तो वर्ष में एक बार रक्तदान कर, किसी के जीवन को बचाने में सहायक बनें, वह व्यक्ति आपको जीवन भर सुख-समृद्धि का आर्शीवाद देगा। ु
- 31, पटेलनगर, आलमबाग, लखनऊ