इस वर्ष हमने 15 अगस्त को 68वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया है। इस दिन देश के 14वें स्वतंत्र भारत में जन्में प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराया। श्री मोदी एक ऐसे प्रधानमन्त्री हैं जो विगत तीस वर्षों में पहली बार बहुमत के साथ सत्ता में आए हैं। मुख्य घटक भाजपा के पास लोक सभा में साधारण बहुमत के लिए आवश्यक 272 की संख्या से अधिक 282 सीटें हैं जो इस बात की द्योतक है कि समूचे राष्ट्र का सरकार को व्यापक समर्थन मिला है। इससे गठबन्धन की राजनीति की विवशताऐं दूर हो गई हैं।
अपने भाषण में श्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार वादों की नहीं बल्कि इरादों की है; वह सबका-साथ, सबका-विकास चाहते हैं; सशक्त भारत की ओर सशक्त कदम उठाना चाहते हैं। स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत बनाना चाहते हैं। उन्होंने जनता से अपील की है; कि जातीय और धार्मिक विवादों के झगड़ें को दस वर्षों के लिए दूर कर दें। मोदी ने ‘‘वी कैन’’ अर्थात् हम कर सकते हैं को अपने शासन का सूत्र वाक्य बनाया है। वह विकास के लिए समाज के सबसे निचले तबकों का जीवन स्तर सुधारना आवश्यक समझते हैं।
मोदी के लिए देश की जिन ज्वलन्त समस्याओं से निपटना है, वे हैं मंहगाई, बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, भुखमरी, आर्थिक असमानता, किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का अभाव, मंहगी होती कृषि आदि।
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए भी पी॰वी॰ नरसिंहराव के प्रधान मंत्रित्व काल में ‘‘इण्डिया विजन 2020’’ तैयार हुई जिसमें सामथर््य रखने वाले पाँच क्षेत्रों में बदलाव प्रस्तावित किया गया। यह क्षेत्र हैं कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा और स्वास्थ्य, सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी, ढ़ाँचागत विकास एवं महत्वपूर्ण प्रोद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता। यह दुर्भाग्य है कि दो दशकों से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के बावजूद प्रस्तावित बदलाव दृष्टि गोचर नहीं हुए हंै।
हमें इस पर भी चिन्तन-मनन करना चाहिए कि क्या हम अपने कत्र्तव्यों व दायित्वों का सही ढं़ग से निर्वहन करते हुए राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभा रहे हैं? भारत जैसे विशाल देश में सब कुछ सरकार नहीं कर सकती है।
नई सरकार ने वर्ष 2014-15 के अपने बजट में कोई बहुत बड़ा कदम न उठाकर छोटे-छोटे कदम उठाए हैं और ऐसे संकेत दिए है कि समस्याओं से जूझती अर्थव्यवस्था को अभी बड़े फैसलों की नहीं बल्कि हौसलों की जरूरत है जो बजट में परिलक्षित है। आम आदमी को बैंको के माध्यम से अर्थव्यस्था से जोड़ने हेतु जन-धन योजना एक साहसिक कदम है जिसके माध्यम से भारत के सभी परिवारों कों बैंक खाता उपलब्ध कराया जा सकेगा।
मोदी सरकार को नहीं भूलना चाहिए कि चुनाव के दौरान एवं सरकार के बनने के बाद जनता से जो अनगिनत वादे किए गए हंै उन पर खरा उतरने के लिए उनके पास समय सीमित है तथा उम्मीदें जितनी अधिक होती हैं उन्हें पूरा होते देखने के लिए जनता का धैर्य भी उतना ही कम होता है।
भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की है जिन्होंने स्वतंत्रता के पहले और आजाद होने के बाद के पल को नहीं देखा है तथा जो देश की शक्ति है और आने वाले दिनों में भारत को विश्व में शक्तिशाली राष्ट्र का दर्जा दिलवाने मंे अहम भूमिका अदा करने वाले हैं। अतएव, देश के विकास की योजनाओं में युवाओं की ऊर्जा का पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए। ु
- रामशरण





