स्वच्छता सदैव सर्वश्रेष्ठ है समाज मध्य,
हर सन्त, ग्रन्थ सत्य तथ्य नित्य गाता है।
तन, मन, सदन, चमन, हाट, बाट, पथ,
सभी साफ रहे, ज्ञान ज्ञाता बतलाता है।
स्वच्छता सदैव प्रफुल्लित करे तन, मन,
सुन्दर सुस्वास्थ्य की सफाई प्रदाता है।
साफ रहने व रखने की ही प्रवृत्ति बने,
यही वृत्ति गांँव, पुर भारत-सृजाता है।।(1)
सलिल सदैव सर सरिता का स्वच्छ रहे,
जलचर, थलचर, खग सुख पाते हैं।
तन की सुस्वच्छता से, सुन्दर सुस्वस्थ रहें,
रोग दोष दुख दूर भागते दिखाते हैं।
सज्जित सुस्वच्छ हो सदन सभी सज्जनों का,
स्वागत अतिथि सुर सम पाते हैं।
मंजु मन-मन्दिर मनोरम हो मानव का,
ममता ले माया पति महिमा दिखाते हैं।।(2)
आंँगन सदन द्वार, पथ सब साफ रहे,
पर्यावरण स्वच्छ स्वास्थ्य उपजाता है।
कूड़ा कचड़ा न दिखाई पड़े पथ पर,
मनुज प्रत्येक स्वच्छ भारत बनाता हो।
हाट, बाट, गली, कूचा, सर, सरितादि, वन,
साफ हो प्रत्येक थल, स्र्वग सम भाता है।
कीजिए सफाई खुद, मुख अन्य का न देख,
सपनों का भारत, अबोध छबि पाता है।।(3)
- चन्द्रा-मण्डप, 370/27 हाता नूरवेग,
संगम लाल वीथिका, सअसदतगंज,
लखनऊ-226003





