Tuesday, November 18, 2014

सांसद आदर्श ग्राम योजना एक दृष्टि - ब्रजेन्द्र पाल सिंह


ग्राम एक संस्कृति है, एक विचार है और अन्ततः व्यक्ति निर्माण की एक पाठशाला है। जहाँ वह व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से राष्ट्र और राष्ट्र से वसुधैव कुटुम्बकम् का पाठ सीखता है। हम जहांँ भी जायें, जहांँ भी रहें, अपने पूर्वजों की विरासत ‘ग्राम संस्कृति’ के विकास के लिए कार्य करें। हम अपने गाँव को न भूलें, उसे अपने जीवन का तीर्थ बनाएँ। अपने जीवन-तीर्थ रूपी गाँव को सजाएं, संवारें और भारत को विश्व का सिरमौर बनाने के लिए एक कदम आगे बढ़ाएँ।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्मदिन 11 नवम्बर को सांसद आदर्श ग्राम योजना की घोषणा करते हुए उŸाल दृष्टि का प्रयोग किया है। हम सभी जानते हैं कि यदि सूर्य की किरणों को एक लेंस (उŸाल लेंस) के माध्यम से एक बिन्दु पर केन्द्रित किया जाये, तो अग्नि प्रज्ज्वलित हो जाती है। इसी दृष्टि का प्रयोग करते हुए मोदी जी ने फैली हुई सांसद निधि की ऊर्जा को उसके संसदीय क्षेत्र के एक गाँव पर केन्द्रित करने की व्यवस्था बना दी है। इससे सांसद-निधि की ऊर्जा के साथ ही अनेक अन्य ऊर्जाएँ भी उस चयनित गाँव पर केन्द्रित होंगी और उससे राष्ट्र विकास की असीम-ऊर्जा प्रकट होगी।
यह ऊर्जाएँ हैं -
1. राष्ट्रीय विकास के एजेन्डे में ग्राम विकास का कार्य प्राथमिकता पर आ जायेगा, जिससे गाँव का बहुमुखी विकास होगा, आर्थिक समृद्धि के मार्ग खुलेंगे, रोजगार सृजन होगा और पलायन रूकेगा।
2. सांसदों, विधायकों को अपनी क्षमता प्रकट करने का अवसर मिलेगा। ग्राम का चयन उसकी प्रथम परीक्षा होगी।
3. केन्द्र व राज्य की ग्राम विकास की अनेक योजनाएंँ एक ग्राम पर केन्द्रित होकर प्रभावी परिणाम देंगी।
चुनौतियाँ भी हैं -
1. गाँव की समस्त शक्तियों को इस अभियान से जोड़ना, जिससे वह इस कार्य में अपने कार्य की अनुभूति कर गौरान्वित हो सकें।
2. गाँव से बाहर गई मानवीय ऊर्जा को भी अपने गाँव के प्रति प्रेरित करना और गाँव में उन्हें अपेक्षित सम्मान मिल सके ऐसा अनुकूल वातावरण बनाना।
3. वर्तमान पंचायत की चुनाव प्रकिृया के कारण गाँव में बढ़ती सामाजिक खाईं को पाटना।
4. वर्तमान प्रदूषित राजनीति और सरकारी नीतियों के कारण गावों में आई परावलम्बन की भावना का निवारण करना।
5. ग्राम संस्कृति के प्राण-तत्व, सबके प्रति अपनत्व के भाव का विकास करना।
मोदी जी की सांसद आदर्श ग्राम योजना समस्त चुनौतियों को पार कर सफल होगी, उसका भी कारण है। हम सबने बचपन में श्रंखला-निर्माण (चेन बनाना) खेल, अनेक बार खेला है। मोदी जी ने उसी खेल-भावना का प्रयोग करते हुए गाँधी जयन्ती पर ‘नव-मन्त्र’ के साथ ‘स्वच्छ भारत अभियान’ प्रारम्भ किया। उन्हांेने नौ राष्ट्रीय प्रतिभाओं को इस कार्य का एम्बेसडर बनाया, उनमें से अनिल अम्बानी ने राष्ट्र की जानी-मानी नौ हस्तियों को चुन कर श्रंखला निर्माण का कार्य प्रारम्भ कर दिया। श्रंखला निर्माण के खेल-खेल में यह अभियान समाज का अपना अभियान बन जायेगा, क्योंकि वास्तव में तो समाज के अन्तस में गंदगी के प्रति छिपी विरल भावना को ही एक बिन्दु पर केन्द्रित करने और उससे प्रकट होने वाली ऊर्जा के लिए ‘स्वच्छ भारत अभियान’ एक सशक्त उपक्रम है।
सांसद आदर्श ग्राम योजना उसकी ही अगली कड़ी है। अतः उसकी सफलता में हमारा भी योगदान हो सके, इस हेतु इस योजना के महत्वपूर्ण बिन्दुओं को जान लेना आवश्यक है। वे बिन्दु हैं -
लक्ष्य -
1. माँग आधारित सुविधा की सीढ़ी की उपलब्धता सुुनिश्चित कराना तथा वर्तमान सांसद काल में कम से कम तीन गाँव आदर्श गाँव बनाने का लक्ष्य है।
2. आदर्श गाँव का अर्थ, वह गाँव- स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, विकास एवं आपसी सौहार्दय का केन्द्र बने।
3. विज्ञान सार्वभौमिक है, पर स्थानीय तकनीकी को प्राथमिकता।
चयन -
1. शहरी इलाके के सांसद अपने निकट की किसी लोकसभा का कोई गाँव चुनेंगे।
2. लोक सभा सांसद को अपने क्षेत्र से गाँव चुनना होगा और राज्यसभा सांसद जिस राज्य से चुनकर आये हैं, उस राज्य से गाँव चुन सकते हैं।
3. सांसद अपना या अपनी पत्नी का गाँव नहीं चुन सकेंगे।
4. मैदानी इलाकों में 3000 से 5000 तक आबादी वाले गाँव को चुना जायेगा और जिन इलाकों में इतनी आबादी नहीं हैं, वहाँ ग्राम पंचायतों को ग्राम चुनने का अधिकार दिया जायेगा।
कार्य -
1. हर गाँव अपना आर्थिक एजेन्डा तय करेगा, ताकि उस गाँव में उत्पादित होने वाली चीजों का उत्पादन बढ़े।
2. गाँव में ढ़ांचागत विकास के साथ नैतिक विकास का साधन मुहैया होगा और कोशिश होगी रामराज की तर्ज पर व्यवस्था बन सके।
3. सबसे पहले छोटी अवधि वाले काम को प्राथमिकता देनी होगी, जैसे - गाँव की सफाई और हराभरा बनाने का काम, स्कूल और आंगनबाड़ी में गाँव के 100 फीसदी बच्चों का नामांकन, सबको स्वास्थ्य सुविधायें आदि।
4. हर गाँव अपना जन्म दिन मनायेगा, जिसमें गाँव से बाहर रह रहे किसी व्यक्ति को बुलाकर उसका सम्मान किया जायेगा।
5. गाँव के बुर्जुगों का भी सम्मान हो, गाँव में कोई स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी या शहीद हो उसके बारे में बच्चों को जागरूक किया जाये।
कार्यकाल -
1. तीन चरणों में आदर्श गाँव बनाने के लिए कार्य किए जायेंगे। छोटी अवधि वाले कामों को तीन महीने, मध्यम अवधि वाले काम एक साल में पूरे करने होंगे, वहीं लम्बी अवधि वाले कामों के लिए एक साल से अधिक समय रहेगा।
कार्यपद्धति -
1. ग्राम विकास से जुड़ी सभी योजनाऐं, इस गाँव में लाई जायेंगी।
2. सांसदों और जनता की स्पष्ट भूमिका होगी, कोई बिचैलिया नहीं होगा।
जिम्मेदारी -
1. इस योजना को अमल में लाने की जवाबदेही उस सांसद की होगी, जिसने उस गाँव का चयन किया है।
निगरानी -
1. देश भर में वर्कशाप आयोजित की जायेंगी, जिसमें खुद प्रधानमन्त्री सांसदो, अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों से वीडियो कान्फ्रेन्सिंग से बात करेंगे।
चुनौतियांँ -
1. सांसदों को अपनी योग्यता, योजना कुशलता व कार्यक्षमता सिद्ध करने का अवसर है।
2. राज्यों के सामने चुनौती है कि उनके भी अपने राज्य में विधायकों के लिए विधायक आदर्श ग्राम योेजना बनाई जाये, जिससे अतिरिक्त 6-7 हजार गाँव आदर्श गाँव बन सकें।
3. गाँव के निवासियों को योजना का सहभागी बनाना और उस कार्य को अपना समझना एक बड़ी चुनौती है।
पेशकश -
1. कारपोरेट जगत।, 2. स्वयंयेवी संस्थायें। ु