Tuesday, November 18, 2014

लोक भारती कार्य की दिशायें .सामाजिक सेवा को समर्पित राष्ट्रीय संगठन - शोक सिंह


लोक भारती सामाजिक सहयोग से अनेक क्षेत्रों में प्रभावी कार्य कर रही है, जिनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है।
1. गौ आधारित खेती - सामान्यतः इस पद्धति को शून्य लागत प्राकृतिक खेती के नाम से जानते हैं। पिछले दो वर्ष से कई संस्थाओं के सहयोग से 13 स्थानों पर प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन किए, जिनमें उŸार प्रदेश, उŸाराखण्ड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार सहित कई अन्य प्रान्तों के लगभग 6000 प्रयोगधर्मी किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्र्ताओं, गन्ना उद्योगों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
बजाज ग्रुप (गन्ना मिल) के बाद अब उŸार प्रदेश गन्ना शोध संस्थान, शाहजहाँपुर द्वारा इस पद्धति के पांँच माॅडल केन्द्रों पर अध्ययन कार्य प्रारम्भ हुआ है, वहीं   कृषि विभाग, उ॰प्र॰ से सम्बन्धित ‘आत्मा’ द्वारा प्रदेश के सभी विकास खण्ड से चयनित 1000 किसानों के प्रशिक्षण की तैयारी चल रही है। लोकभारती की मुख्य भूमिका (1) प्रशिक्षण (2) अनुवर्ती कार्य (3) समन्वय (4) माॅडल केन्द्र व (5) प्रशिक्षक तैयार करना है।
2. ‘सरिता समग्र’ अभियान - लोक भारती द्वारा 22, 23 जनवरी, 2011 को लखनऊ में माँ गंगा समग्र चिन्तन गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें एक दिशा व दृष्टि बनी कि - ‘‘गंगा मांँ को अपने पावन स्वरूप में अविरल, निर्मल बनाये रखने के लिए उससे मिलने वाली सभी नदियों पर कार्य करना होगा।’’  इस गोष्ठी में एक दर्जन नदियों, जल व पर्यावरण पर कार्य करने वाले 250 प्रतिनिधियों के साथं गंगा व अन्य नदियों सम्बन्धी योजना बनी, कि- (1) विभिन्न नदियों, जल व पर्यावरण पर कार्य करने वाली संस्थाओं, व्यक्तियों एवं वैज्ञानिकों के मध्य समन्वय। (2) गंगा सम्बन्धी कार्य में सहभागिता (3) गोमती नदी पर स्वयं कार्य करना।
3. गोमती संरक्षण अभियान - सर्वप्रथम लखनऊ में गोमती तटों पर स्वच्छता कार्यक्रम, वृक्षारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम प्रारम्भ हुए। तत्पश्चात् 28 मार्च से 4 अपै्रल, 2011 को गोमती उद्गम माधौटाण्डा, पीलीभीत से गोमती-गंगा संगम स्थल, कैथी घाट (मारकण्डे आश्रम) वाराणसी तक 7 दिवसीय गोमती यात्रा का आयोजन, 33 स्थानों पर गोमती मित्र मण्डलों का गठन, नैमिषारण्य के चैरासी कोसी परिक्रमा पथ पर एक माह की यात्रा, 88 हजार ऋषियों की स्मृति में व्यापक वृक्षारोपण तथा 2020 तक गोमती को प्रदूषण मुक्त, सुजला करने का संकल्प महत्वपूर्ण कार्य हैं।
4. वृक्षारोपण व हरियाली पखवारा -गोमती संरक्षण अभियान के क्रम में नैमिषारण्य में सघन व व्यापक वृक्षारोपण अभियान के बाद धरती माँ के 33 प्रतिशत अपेक्षित वृक्षादन की दिशा में ‘हरियाली चादर विकास’ का कार्य प्रारम्भ हुआ। जिसके अन्र्तगत जुलाई माह के गुरूपूर्णिमा से हरियाली तीज तक 18 दिवसीय ‘हरियाली पखवारा’ में वृक्षारोपण का कार्य है। इसमें पंचवटी, नक्षत्र वाटिका, हरिशंकरी (पीपल, बरगद, पाकड़ एक थाले में लगाना) वृक्ष धर्मशाला, वृक्ष भण्डारा एवं हरियानी चूनर आदि मुख्य कार्य हैं।
5. तीर्थ व घाट सुव्यवस्था - चन्द्रिकादेवी लखनऊ के पालीथीन मुक्त, हरियाली से युक्त तीर्थ के सफल अभियान के बाद, नैमिष तीर्थ सीतापुर, प्राकृतिक वन एवं जल स्रोत स्थल धोबिया घाट, हरदोई, वृन्दावन, मथुरा में हरित पट्टी हेतु वृक्षारोपण तथा सौलानी देवी प्राकृति जल स्रोत, लखनऊ पर सघन वृक्षारोपण महत्वपूर्ण कार्य हैं। यह कार्य अन्यत्र तीर्थों पर भी प्रारम्भ होना है।
6. मेरा गाँव, मेरा तीर्थ - वर्ष 2011 स्वामी विवेकानन्द की सार्धशती से समग्र ग्राम विकास र्में नई दिशा के दो भाग कार्ययोजना में हैं- (1) नगरों में निवास कर रहे बन्धुओं द्वारा अपने गाँव के विकास के लिए कार्य करना। (2) नगरों में हम जहांँ निवास कर रहे हैं, उस कालोनी में ग्राम संस्कृति के विकास सम्बन्धी आयोजन, जिसका अर्थ है - परिवारिक भाव, एक दूसरे को जानना, सुख-दुख में सहभागी होना, सहयोग एवं सहकार।
7. आर्दश गाँव सहभागिता - जहाँ हमारा सम्पर्क है, सामाजिक सहकार के कार्य करना, जैसे गौ आधारित खेती, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, विद्यालय, सहकार, व्यक्तित्व विकास, सम्मेलन एवं स्वच्छता आदि।
8. स्वच्छता अभियान, 9. युवा कौशल विकास, 10.रसोई वाटिका, 11. लोक सम्मान, 12. ई-समाचार बुलेटिन, 13.औषधीय कृषि एवं 14. पर्यावरणीय परिसर विकास आदि। ु