आज माँ गंगा के प्रकृति प्रदत्त शाश्वत, अविरल, निर्मल एवं पवित्र प्रवाह के स्वरूप को अक्षुण्य बनाए रखना समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए राष्ट्र धर्म है। माँ गंगा की सेवा राष्ट्र धर्म है। माँ गंगा की सेवा राष्ट्र की सेवा है। यह एक ऐसी धरोहर है जिस पर खाद्य-सुरक्षा, स्वच्छ पेय जल उपलब्धता, जैव विविधता, जलीय जीवों का अस्तित्व तटवासियों, नाविकों, पुराहितों, गंगा पुत्रों की आजीविका, धरा की उर्वरता आदि आश्रित हैं। इसी के दर्शन, आचमन व स्नान से व्यक्ति अपने को धन्य मानता है। इसी के तट पर भारत के प्रमुख नगर एवं तीर्थ बसे है जो देश के व्यापारिक केन्द्र भी है।
अतएव, मिशन गंगा में उपरोक्त विषयों एवं हित ग्राहियों (स्टेक होल्डर्स) के साथ-साथ स्वयं सेवी संस्थाओं, निकायों, समाजसेवियों, बुद्धजीवियों, साधु-सन्तों, विषय-विशेषज्ञों, सूचना प्रोद्योगिकी विशेषज्ञों, सम्बन्धित सरकारी विभागों के पदाधिकारियों को भी विभिन्न स्तरों एवं चरणों में जोड़ा जाय ताकि मिशन त्रुटि रहित हो।
इसी क्रम में कतिपय करणीय कार्य निम्न प्रकार है:-
1. योजनाएं चरण बद्ध एवं समय बद्ध बनें।
2. उपाय सशक्त क्रियात्मक एवं परिणाम परक हों।
3. योजनाओं को तात्कालिक, अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक वर्गों में आवश्यकता, महत्व एवं प्राथमिकताओं के आधार पर विभाजित कर कार्यान्वित किया जाय।
4. सभी हितग्राहियों हेतु प्रथक-प्रथक कार्यदल बनाए जाँय जो सौंपे गए कार्यों के प्रति उत्तरदायी हो।
5. पूर्व में चल रहे कार्यो-योजनाओं की समीक्षा की जाय तथा उसमें यथा अनुसार अपेक्षित संशोधन को समायोजित किए जा सकते हों का समायोजन करते हुए उन्हें गति प्रदान की जाय।
6. यह भी सुनिश्चित किया जाय कि सभी योजनाएं एक दूसरे की पूरक हों तथा इनसे किसी हितग्राही का अहित न हो।
7. आँकड़ों एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान में यथा आवश्यक आधुनिक संचार साधनों, टेक्नोलोजी का उपयोग किया जाय।
8. खाद्य सुरक्षा के अन्तर्गत कृषि फसलों के उत्पादन में नहरों के माध्यम से प्रयोग होने वाले सिंचाई जल के अपव्यय को रोका जाय व जल उपयोग की क्षमता बढ़ाई जाय ताकि इसमें 15 से 20 प्रतिशत जल की बचत हो सके जिससे पर्वो/तीर्थों पर जल की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध हो सके।
9. नदी के कैचमेन्ट क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका से मुक्ति पाने के लिए क्षेत्र में तालाब आदि जल संग्रह इकाइयों का प्राविधान करने के साथ ही साथ आकस्मिक योजनाएं ;ब्वदजपदहमदबल च्संदेद्ध भी बनाई जाय।
10. गंगा जल के प्रदूषण को हस्तक्षेपीय अपराध ;ब्वहदप्रंइसम व्ििमदबमद्ध बनाया जाय तथा इसे प्रदूषित करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं, फैक्टरियों, नालों आदि के प्रति कठोंर कार्यवाही की जाय तथा इसकी पुनरावृत्ति को रोका जाय। इस सम्बन्ध में ‘‘कोड आॅफ कण्डक्ट’’ बनाया जाय।
11. सभी सहायक नदियों/नालों हेतु भी समानान्तर योजनाएं बनाई एवं कार्यान्वित की जाय।
12. योजनाओं का नियमित एवं निरन्तर अनुश्रवण हो।
13. गंगा की पूरी लम्बाई में स्थानीय निगरानी चैकियाँ हों जो मिशन की सफलता हेतु सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन करें।
14. गंगा के तटों का सौन्दर्यीकरण हो, नदी के किनारों पर शोभाकार वृक्ष लगाए जाँय, करणीय कार्यों एवं न करणीय कार्यों के सम्बन्ध में सूचना पट, दीवार लेखन, माईक के द्वारा लोगों को जागृत किया जाय।
15. गंगा मिशन से मिलने वाले लाभों का मूल्यांकन हो, कार्य प्रणाली में पारदर्शिता हो, समय की माँग के अनुसार उसमें आवश्यक परिवर्तन की सम्भावना हो।
16. गंगा मिशन में राष्ट्र का प्रत्येक परिवार जुड़े ऐसा लक्ष्य हो। ु





