Tuesday, November 18, 2014

छोटे काम बड़े परिणाम -सुधाकर सिंह


ग्राम आधारित काम - गाँव एक बड़ा परिवार है। हमारा यह परिवार देश की हर कसौटी पर खरा उतरे और देश के विकास में अपना सशक्त योगदान करने में समर्थ हो, इस हेतु गाँव में छोटे-छोटे अनेक काम हो सकते हैं, जिनको करने से बड़े परिणाम होंगे। उनमें से कुछ कामों के सम्बन्ध में संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है।
1. स्वच्छता अभियान - इस निमित्त व्यक्ति स्तर पर घर-घर की स्वच्छता एवं गली, विद्यालय, मन्दिर, तालाब, घाट आदि सार्वजनिक स्थानों के लिए सामाजिक सहभाग से स्वच्छता अभियान चलाने से नेतृत्व विकसित होगा, श्रम का महत्व स्थापित होगा, सहकार की भावना बढ़ेगी, स्वच्छता का संस्कार बनेगा, गाँव का गौरव बढ़ेगा और इस गाँव का नागरिक देश में कहीं भी जायेगा तो उसके द्वारा ऐसा कोई काम नहीं होगा जिससे गंदगी होती हो। गाँव स्वच्छता का ऐम्बेसडर बन जायेगा।
2. गाँव का उत्सव - वर्ष, दो वर्ष में गाँव को सामूहिक उत्सव मनाने की परम्परा प्रारम्भ करना चाहिए, जिसके लिए उस गाँव में मान्य कोई धार्मिक, सांस्कृतिक, परम्परागत, आस्थागत अवसर या आवश्यकता अनुसार कोई उपलक्ष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपने गाँव से बाहर गए अथवा रह रहे सभी लोगों को आमन्त्रित करना चाहिए, जिससे उस व्यक्ति का भी उपयोग गाँव के विकास में किया जा सके। इस आयोजन से निम्नांकित लाभकारी परिणाम आयेंगे। गाँव का उत्सव होने से घर, गाँव, गली, मोहल्ला सभी स्वच्छ होगा, कार्य विभाजन एवं दायित्व निर्धारण से सामजिक कार्य के प्रति आस्था एवं कार्यकुशलता बढ़ेगी। गाँव से बाहर रह रहे परिवारों एवं रिश्तेदारों के आने से गाँव के प्रति लगाव बढ़ेगा, कर्तव्य भाव जगेगा, अपनत्व बढ़ेगा, सामजिक विकास के नए-नए आयामों के संकल्प जगेंगे और दायित्वबोध के साथ व्यक्तित्व का विकास होगा।
उत्तराखण्ड में प्रेम बड़ाकोटी ने अपने गाँव में पिछले तीन वर्ष से ग्राम उत्सव प्रारम्भ किया है, जिससे वषों बाद अनेक लोगों ने अपने गाँव को देखा, उन परिवारों के बच्चों के मुण्डन आदि संस्कार अब गाँव में ही होने लगे हैं, गाँव का मन्दिर बन गया है, स्कूल की हालत अच्छी हो गई है, गाँव के प्रति गौरव भाव जागृत हुआ है और निरन्तरता के साथ ही सहभागिता बढ़ी है।
3. आस्था स्थल सुव्यवस्था - गाँव का जो भी आस्था स्थल हो, यदि नहीं है तो विकसित किया जाये और उसे सब प्रकार से सुसज्जित, संस्कार युक्त बनाया जाये, दैनिक/साप्ताहिक/मासिक या आवश्यकता अनुसार संस्कार जन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे गाँव में एक संस्कार युक्त स्थान पर सुनिश्चित समय पर परस्पर मिलने का अवसर बनेगा और संस्कारों को बल मिलेगा, गाँव सम्बन्धी कार्ययोजना बनाने ओर उसे क्रियान्वित करने के लिए उपयुक्त टीम उपलब्ध होगी।
4. विद्यालय सुव्यवस्था - विद्यालय के शिक्षकों से मित्रवत सम्बन्ध बनाकर, गाँव के शिक्षित व समय दे सकने वाले महिला, पुरूषों को जोड़कर, विद्यालय की स्वच्छता, सज्जा, बच्चों की व उनके बस्तों की स्वच्छता, हर कक्षा में सुचारू पढ़ाई सुनिश्चित करने हेतु सेवाभागी लोगों की व्यवस्था, बच्चों में स्वस्थ प्रतियोगी भाव जगाने हेतु शैक्षिक, सांस्कृतिक, शारीरिक कार्यक्रमों की योजना करना, अच्छे कायों हेतु सम्मानित करना उपयोगी होगा।
5. गौ आधारित खेती - सबसे पहले गाँव के प्रयोगधर्मी, लगनशील, परिश्रमी किसानों का चयन कर, उन्हें शून्य लागत प्राकृतिक (गौ आधारित) खेती का व्यावहारिक व सैद्धान्तिक प्रशिक्षण कराना, प्रारम्भ में स्वंय की आवश्यकता या छोटे खेत में प्रयोग प्रारम्भ कराना, क्रमशः अनुभव के आधार पर माॅडल विकसित कराना और पूरे गाँव से आगे क्षेत्र में संकुल विकास की योजना करनी चाहिए। इससे किसानों के घर में गाय आयेगी, हर घर को दूध उपलब्ध होगा, गाँव से पलायन रूकेगा, भूमि उर्वरा होगी, गुणवŸाा युक्त उत्पादन बढ़ेगा, किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, पर्यावरण शुद्ध होगा, जैवविविधता का संरक्षण होगा, जल का दोहन कम होगा, भूजल स्तर में वृद्धि होगी, सूखते भूजल स्रोत पुनः चलने लगेंगे, नदियांे को सजला व सुजला बनाने में महत्वपूर्ण योगदान होगा और स्वावलम्बी समाज का निर्माण होगा।
6. वृक्षारोपण - वृ़क्ष जीवनदाता हैं, इनसे हमे प्राणवायु, फल, फूल, औषधियाँ तथा जीवन निर्वाह सम्बन्धी अनेक वस्तुए उपलब्ध होती हैं, पर्यावरण, जैवविविधता एवं जल संरक्षण होता है और हमारे द्वारा उत्सर्जित कार्बनडाई आक्साइड जैसी गैसों का उपयोगी संतुलन तन्त्र बनता है, जिससे विश्व की समस्या बनी ग्लोबलवार्मिंग से निजात मिलती है। इसके लिए हर घर में रसोई वाटिका, हर खुली जगह पर पेड़, सड़कों के किनारे, खेत की मेड़ों पर, तालाबों, स्कूलों आदि स्थानों पर प्रतिवर्ष वृक्षारोपण अभियान चलाना चाहिए। इस हेतु जुलाई माह में गुरूपूर्णिमा से हरियाली तीज तक अट्ठारह दिवसीय ‘हरियाली पखचारा’ का आयोजन करना उपयोगी हो सकता है। इसके लिए आवश्यक पौध का चयन व उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु पौधशाला विकसित करना भी ठीक रहेगा। हम अपने गाँव को हरियाली की दृष्टि से 33 प्रतिशत लक्ष्य तक ले जा सकते हैं। गाँव क्षेत्र के लिए एक माॅडल बनेगा और गाँव की अनेक आवश्यकताए भी इससे पूरी होगी।
7. जल संरक्षण - ‘जल ही जीवन है’ सभी जानते हैं, परन्तु उसके महत्व को समझ कर व्यवहार नहीं करते। हमारी लापरवाही के कारण हमारे कुएँ सूख गए हें, भूगर्भ जल का स्तर निरन्तर नीचे गिर रहा है, तालाबों, झीलों एवं नदियों के जल स्रोत सूख गए है, परिणाम स्वरूप अनेक छोटी नदियांँ सूख गई हैं और अनेक नदियां सूखने की कगार पर हैं। हमने विकास क्रम में भ्रमित होकर कुछ ऐसे काम कर ड़ाले या अभी भी कर रहे हैं, जिसके कारण भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो गया है, जिसके कारण 100 फिट गहराई तक का पानी पीने योग्य नहीं रहा है। अभी भी समय है, जागने और गलतियों को सुधार कर अपनी भावी पीढ़ी का जीवन सुरक्षित करने का। इस हेतु हम करें - हमारे खेत का पानी बहकर बाहर न जाये, इस हेतु मेड़बंदी, गांव में कहीं भी बह रहे बरसाती पानी को रोकने के लिए छोटे बंधे और उस रूके हुए पानी को किसी तालाब या झील में पहुँचाने हेतु नाली या वहीं पर रिचार्जिंग वेल बनाना। कम पानी वाली फसलें लेना तथा पानी के समुचित उपयोग की विधियों का प्रयोग। रसायनिक खादों व रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना तथा तालाबों एवं जल स्रोतों को स्वच्छ रखना सीखना होगा। इसके लिए कार्यक्रम बनाए, आवश्यक अभियान चलाएं।
8. प्रतिभा सम्मान - ‘गांव की प्रतिभाओं को खोजना, उनका विकास हा,े इसकी योजना करना तथा उनका सम्मान करना जिससे नई पीढ़ी को भी उनसे प्रेरणा मिल सके तथा उनकी प्रतिभा का उपयोग गांव के हित में लग सके। इसमें अच्छी खेती, नए प्रयोग, अच्छी पढ़ाई, गांव या समाज हित का कोई काम, वरिष्ठ व समाज सेवी   जनों का सम्मान करना उपयोगी रहेगा।
9. व्यक्तित्व विकास - ‘युवकों के व्यक्तित्व विकास के लिए विभन्न प्रकार की शैक्षिक, संास्कृतिक, श्रमाधारित, खेलकूद आदि प्रतियोगिताएँ आयोजित करना।
10. शैक्षिक सुधार - ‘गांव का शैक्षिक स्तर वर्तमान विकास की कसौटी पर खरा उतर सके, इस हेतु बाल शिक्षा के लिए बाल संस्कार केन्द्र, जूनियर व माध्यमिक शिक्षा के लिए कोचिंग सेन्टर, मानसिक व शारीरिक विकास हेतु योग-व्यायाम केन्द्र संचालित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त गांव में अनेक लोग ऐसे रहते हैं, जिनके पास पर्याप्त समय रहता है, उनको गांव के विद्यालय के साथ जोड़ा जा सकता है।
11. समन्वय - ‘गांव में छोटी-छोटी बातो पर झगड़े होते हैं, मुकदमें प्रारम्भ हो जाते हैं। इससे गांव को बचाना, गांव की बहुत बड़ी सेवा होगी। यह कार्य तत्काल आपसी बातचीत, समन्वय एवं समझौते से हो सकता है। इससे गांव का सदभाव बना रहेगा।
12. परामर्श (कौन्सलिंग) - ‘गांव में पढ़ाई करते समय छात्रों व उनके अभिभावकों को वर्तमान की आवश्यकताओं और मांग का पता नहीं रहता, इसलिए क्या पढ़ने की आवश्यकता है, कौन सा कोर्स करना है, यह भी उन्हें  पता नहीं होता। इस कारण हाई स्कूल, इण्टर के बाद वह क्या पढ़ाई करे, यह उपयुक्त व्यक्तियों द्वारा उन्हें परामर्श देने की व्यवस्था की जा सकती है।ं इससे श्रम, समय की बचत के साथ ही भविष्य का मार्ग सुगम होगा। ु