Thursday, July 23, 2015

काटे जा रहे वृक्षों की पीड़ा - डाॅ॰ सुरेश पति त्रिपाठी

विकास की आँधी में आधुनिक तकनीकी से निर्माण की जा रही सड़कों के नाम पर उनके किनारे लगे वृक्षों को एक तरफ से काटा जा रहा है। कट रहे वृक्षों की पीड़ा हृदय विदारक है। गत माह में सुल्तानपुर रोड पर कई बार जाने का अवसर मिला, वहाँ देखा कि जिन सड़कों पर चलने से शीतलता मिलती थी, अब वे तप रहीं हैं। लगता है, सड़कों का सुहाग छिन गया है, उनकी उदासी मूक स्वर में रोती-बिलखती हुयी अपनी व्यथा प्रकट कर रहीं हैं। पशु-पक्षियों का आश्रय विनष्ट हो गया है।
वृक्ष प्राणवायु देते हैं, जल संरक्षण करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, अतिवृष्टि-अनावृष्टि की भयावहता का शमन करते हैं, यही नहीं भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में वृक्षों का विशेष योगदान रहता है। डाॅ0 महेन्द्र प्रताप सिंह की कविता ‘वन और मन’ में वृक्ष कहता है-
मैं हूँ तरूवर धरा तुम्हारे,
मैं हूँ सबका सभी हमारे।
जीवों की स्वास का मैं प्रदाता,
पेड़ को स्थान्तरित करने वाली हाइड्रोलिक मशीन
फूल-फल काष्ठ औषधि का दाता।
वृक्ष जो मानव जीवन के सर्वांगीण विकास की आधार शिला है, उन्हें निर्ममता से काट कर नष्ट करना मनुष्य ही नहीं प्राणि मात्र के जीवन के लिए खतरनाक है। सड़कांे को चैड़ी करने अथवा किसी सार्वजनिक प्रतिष्ठान को स्थापित करने में यदि वृक्ष बाधा बने हुए हैं तो उन्हें नयी तकनीकी द्वारा स्थानान्तरित करने की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिसकी सुविधा विकसित हो चुकी है। फिर भी किसी विषम परिस्थति में वृक्ष को काटना पड़े तो एक वृक्ष के स्थान पर कम से कम पाँच वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प किया जाना चाहिए।
हमारी संस्कृति व परम्परायें पूर्ण वैज्ञानिक हैं जहाँ वे वृक्ष जो वायु शोधक और अधिक मात्रा में आॅक्सीजन देने वाले हैं उनकी पूजा होती है- जैसे पीपल, नीम, तुलसी आदि। इसलिए हमें खाली स्थानों पर नीम, पीपल जैसे वृक्षों को लगाने और लगे हुए वृक्षों के संरक्षण के लिए जन मानस को संस्कारित करना चाहिए।
वृक्षों के संरक्षण व संर्वधन के अभियान में लोक भारती संस्था वर्षों से लगी हुयी है जो आषाढ़ पूर्णिमा (गुरुपूर्णिमा) से सावन की हरियाली तीज तक हरियाली पखवाड़ा मनाते हुए वृक्षों का भण्डारा करती है और फलदार तथा औषधीय वृक्षों को लगाने के लिए प्रेरित करने का सफल कार्यक्रम करती है। इसीक्रम में 4 जुलाई, 2015 को गाँधी प्रतिमा (जी॰पी॰ओ॰) के सामने वृक्षों के धरने का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शासन व आम नागरिकों को जागरुक करने का प्रभावी अभियान रहा। इस धरने द्वारा यह संदेश दिया गया कि वृक्ष अनुपातिक आधार पर लगाये जायें और उनकों काटने से रोका जाय, तभी जीवन स्वस्थ और सुरक्षित रह सकता है। इसकी सफलता में चन्द्र भूषण तिवारी, सन्त कबीरा, डा॰ पार्थ एवं अजय प्रकाश (हरियाली पखवारा संयोजक) सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं का का योगदान रहा।
वृ़क्ष धरने को सम्बोधित करते हुए मनकामेश्वर मन्दिर के श्रीमहन्त देव्या गिरी ने कहा कि ‘‘वृक्ष काटने वाले लोग पितृदोष के भागी होते हैं और वृक्ष लगाने वाले पितृ ऋण से मुक्त हो जाते हैं और घर में स्वतः समृद्धि आती है।’’ समापन पर आगन्तुकों को संतों द्वारा प्रसाद रूप में पौधे दिये गये।
अंत में यह चेतावनी है कि- ‘‘‘वृक्ष हमारा जीवन है, अतः हम अपने ही हाथों अपने जीवन का विनाश न करें।’ यह हमारा कर्तव्य है कि हम वृक्षों का संरक्षण करें और हरियाली क्षेत्र बढ़ाने के लिए पौधे लगायें व दूसरों को निरन्तर प्रेरित करते रहें।
- 53 मानस विहार, सर्वोदय नगर, लखनऊ।
मोबाइल: 9415787101