पर्यावरण के नाम पर हम एक तो हुए,
जो भी हैं अब इरादे चलो नेक तो हुए।
उठा कहीं से होगा यकीनन ये शुभ विचार,
हम ‘शान्त’ एक से चलो अनेक तो हुए।
पर्यावरण का अर्थ है,
होना प्रकृति के साथ।
जीना प्रकृति की गोद में,
सोना प्रकृति के साथ।
जल, अग्नि, वायु, माटी,
गगन के शरीर को।
हँसना प्रकृति के साथ है,
रोना प्रकृति के साथ।
वृक्षों को काटिए नहीं,
देते जो प्राण वायु।
जीता है श्वास-श्वास का कोना,
हरदम प्रकृति के साथ।
भूलों से भी न कीजिए,
कुदरत से छेड़छाड़।
अपना ये मन, ये तन-वदन,
धोना प्रकृति के साथ।
हमने तो जो भी चाहा,
प्रकृति ने दिया है ‘शान्त’।
पाया स्वभाव से है जो,
होना प्रकृति के साथ।
- ‘शान्तम्’ 10/3/2, इन्दिरा नगर, लखनऊ।
जो भी हैं अब इरादे चलो नेक तो हुए।
उठा कहीं से होगा यकीनन ये शुभ विचार,
हम ‘शान्त’ एक से चलो अनेक तो हुए।
पर्यावरण का अर्थ है,
होना प्रकृति के साथ।
जीना प्रकृति की गोद में,
सोना प्रकृति के साथ।
जल, अग्नि, वायु, माटी,
गगन के शरीर को।
हँसना प्रकृति के साथ है,
रोना प्रकृति के साथ।
वृक्षों को काटिए नहीं,
देते जो प्राण वायु।
जीता है श्वास-श्वास का कोना,
हरदम प्रकृति के साथ।
भूलों से भी न कीजिए,
कुदरत से छेड़छाड़।
अपना ये मन, ये तन-वदन,
धोना प्रकृति के साथ।
हमने तो जो भी चाहा,
प्रकृति ने दिया है ‘शान्त’।
पाया स्वभाव से है जो,
होना प्रकृति के साथ।
- ‘शान्तम्’ 10/3/2, इन्दिरा नगर, लखनऊ।





