Thursday, July 23, 2015

समाज जीवन की दो महत्वपूर्ण व्यवस्थायें कुआँ और तालाब - गोपाल उपाध्याय

प्रकृति के साथ सुन्दर समन्वय बनाते हुए जीवन जीने की कला हमारे पूर्वजों ने विकसित की और उसे दैनन्दिन संस्कारों के साथ निरन्तर जिया भी। आज जब हम कहते हैं, ‘‘जल है, तो कल है’’ या ‘‘जल ही जीवन है’’, तो अत्यन्त गर्व होता है कि, हमारे पूर्वजों ने जल के महत्व को बहुत पहले ही समझ लिया था और उसके अनुसार जल के साथ समाज का रिश्ता कैसा रहे,  इसकी उपयुक्त व्यवस्था भी बनाई और उसका घर-घर में स्वस्फूर्त पालन भी सुनिश्चिित किया।
हमारे समाज का मूल आधार परिवार है और परिवार की महत्वपूर्ण कड़ी दाम्पत्य जीवन की पवित्रता है। किसी भी भारतीय परिवार में जब विवाह संस्कार होता है, तो कन्या पूजन के साथ ही कुआँ पूजन का भी विधान है। जब तक कुआँ पूजन नहीं होता, तब तक विवाह भी सम्पन्न नहीं होता, ऐसी कुएँ के प्रति दृढ़ संस्कार व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। इसके कारण कुआँ स्वच्छ पेय जल स्रोत के रूप में सदैव जीवन्त रहते थे।
समय चक्र बदला, तो जहांँ व्यवस्थाओं में परिवर्तन हुआ वहीं संस्कारों की व्यवस्थायें भी केवल परम्परा बन कर रह गईं। उनके संस्कार के मूल तत्व पक्ष को भुला दिया गया। दैनन्दिनि जीवन में कँुओं का स्थान हैण्डपम्प ने ले लिया, अतः सामाजिक मानस में कुँओं की उपयोगिता घटती गई और वे पटते गए।
जल के प्रति सामाजिक संस्कार घटने से गाँवों में तालाबों के साथ भी कुँओं जैसा ही व्यवहार होने लगा और वह पटते-कटते-घटते व सिमटते चले गए। परिणामतः वर्षा जल का संचयन होना बन्द हो गया और भू-गर्भ जल स्तर घटने लगा, सोते और छोटी नदियाँ सूख र्गइंं। भयावह जल संकट खड़ा होता दिखाई देने लगा।
लोक भारती द्वारा गोमती अलख यात्रा-2015 के समय उपरोक्त विसंगतियों को निकट से देखा समझा गया और उसके अनुसार समाजिक सरोकार के साथ जल समस्या समाधान हेतु ‘‘जीवन्त कुआँ और पवित्र तालाब’’ सरंक्षण अभियान प्रारम्भ किया किया गया। इसमें संरक्षण के संकल्प के साथ कार्य करने वाले लोगों को समाज में प्रतिष्ठा दिलाने हेतु ‘‘भगीरथ’’ सम्मान से सम्मनित भी किया किया जाने लगा। प्रारम्भिक चरण के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं -
5 जुलाई, 2015, भगीरथ सम्मान - हरदोई जिले के भरावन क्षेत्र में तुलसीपुर घाट क्षेत्र के निकट चार  कुओं का संकल्प लेने वाले उन लोगों का भगीरथ सम्मान महन्त देव्यागिरी द्वारा किया गया, जिन्होनें संकल्प लेने के बाद अपने कुओं की सफाई की और जिनमें अब पानी है। उनमें से (1) सांरगपुर गाँव के कमलेश व (2) रमेश तथा (3) राजापुर गाँव में बैजनाथ, (4) तुलसीपुर गाँव में राम रतन के नाम प्रेरणा देने योग्य संकल्पवान भगीरथों के हैं।
इस अवसर पर क्षेत्र के कर्मठ कार्यकर्ता विनोद सिंह परमार ने आगामी एक वर्ष में 51 कुओं के पुर्नजीवन का संकल्प महन्त देव्यागिरि के आशीर्वाद के साथ लिया, जो अत्यन्त प्रेरक है। इस कार्य में सहयोग श्री प्रेम शंकर अवस्थी तथा डा॰ प्रज्ञज्योति जी करेंगे।
इसके अतिरिक्त तुलसीपुर गाँव के (1) श्री विकेश सिंह, - 9044230770, छावन गाँव के (2) संतोष अवस्थी व (3) निर्मल - 9918952270 तथा राजपुर गाँव के (4) राकेश कुमार, दुल्हा नगर के (5) रजनीश कुमार, गौढ़ी गाँव के (6) ब्रजकिशोर - 8188857312 जैसे वे संकल्पवान लोग हैं जिन्हें अपना कुँआ स्वच्छ करना है।
नैमिषारण में कुओं की सफाई का उत्साहजनक परिणाम - सीतापुर जिले के प्रसिद्ध तीर्थ नैमिषारण्य के आश्रमों में श्री प्रेमशंकर अवस्थी के प्रयत्न से दो कुओं की सफाई कराई गई, जिनमें से एक ट्रक से अधिक कूड़ा-कचरा निकाला गया। यहाँ उत्साह की बात यह है कि दोनो कुओं में 20 फुट से अधिक स्वच्छ जल आ गया है।
सुल्तानपुर (कूडेभार) -  (1) अनिल पाण्डे, औदहा-कुआँ, 8423527770 (2) मोहन त्यागी, फत्तेपुर - कुआँ, 9956141140 (3) हरित सिंह, गौतमपुर,-कुआँ (4) मुरारी सिंह, कोथरा खुर्द-कुआँ (5) दिनेश कुमार, अन्तरसभा कला, 2-कुआँ एवं 1-तालाब (6) रामयज्ञ दुबे, तिवारीपुर,-तालाब, 9559478087 (7) दिनेश कुमार-2 कुआँ, 1-तालाब, 9794711621 (8) राम प्रताप दुबे, सरैया भरथी-कुआँ, 9451685868 (9) शिवाकान्त मिश्रा, अगई, कुआँ-9451176863 (10) भगवान तिवारी- तिवारीपुर - कुआँ, 9559478087 सहित कुल 12 कुआँ व 3 पवित्र तालाबों का संकल्प लिया गया।
18 कुआँ व तीन पवित्र तालाबों का संकल्प -   बाराबंकी जिले में रेठ नदी की सहायक जमुरिया नदी क्षेत्र में एकदिवसंकलित एवं एक घाट को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया गया तथा संकल्पवान सभी लोगों को पूज्य महन्त देव्या गिरी द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिनका विस्तृत विवरण जमुरिया यात्रा विवरण में दिया गया है।