Thursday, July 23, 2015

समृद्ध भारत!

कहते हैं, भारत की रीढ़ गाँव और मस्तिष्क शहर हैं? पर! रीढ़ कमजोर रही तो, मस्तिष्क का क्या अर्थ। परन्तु, स्थिति यही है। अब तक की योजनाओं ने शहरों को ही पल्लवित-पुष्पित किया है। इसके निराकरण हेतु अभी हाल ही में नीति नियन्ताओं को सुझाव देते हुए कहा गया है, कि- ‘‘खेती को एक आधुनिक, भरपूर ज्ञान से सम्पन्न, टेक-सेवी, उद्यम गतिविधि’’ के रूप में लिया जाये। इसके अतिरिक्त गाँव में लघु उद्योग, अच्छी सड़कें, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुविधा युक्त घर, बैंकिंग एवं डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ युवाओं के लिए गाँव के निकट ही रोजगार के साधन विकसित किए जायें। यहीं से समृद्ध भारत का उदय होगा और विश्व में स्थापित होने के लिए, भारत का वैशिष्ट्य भाव ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ भी सिद्ध होगा।