Wednesday, July 22, 2015

सम्पादकीय- डाॅ॰ भारती पाण्डेय

‘‘हरियाली’’ सृष्टि का शाश्वत तत्व है। यह सनातन है। यह प्राणदायिनी है। यह अत्यन्त आनन्द प्रदायिनी है। इसका स्वभाव सरस व निर्मल है। यह जड़, चेतन, जीव, जन्तु, पेड़, पौधों की वत्सला है। यह दैहिक, दैविक एवं भैतिक जीवन की आद्याशक्ति है। लहलहाती फसलें, पेड़ व जंगल जीवन में समाये हुए हैं। विकास के दौर में भैतिकावादी समाज ने सर्वाधिक अन्याय प्रकृति के साथ किया। विकास के नाम पर पेड़-पौधों की बलि दी जा रही है। स्वतन्त्रता से पूर्व हमारा वनावरण 45 प्रतिशत था जो अब घअ कर मात्र 20 प्रतिश्त है, जबकि उत्तर प्रदेश में मात्र 6 प्रतिशत वनावरण शेष बचा है। पेड़ों की कटान से एक ओर ‘हरियाली’ पर आघात हो रहा है तो दूसरी ओर प्रकृति की कोप दृष्टि का भाजन समाज को भूस्खलन, चक्रवात एवं अकाल-सूखा जैसे दुष्परिणामों के रूप में झेलना पड़ रहा है। त्वरित लोलुपता ने आज मानव को अंधा बना दिया है। प्रकृति-मैत्रिय पोषणीय विकास हेतु हमें ईप्सा पर नियन्त्रण करना ही होगा। भारतीय चिन्तन एवं परम्परा पर आधृत पोषणीय अभ्युदय लोक भारती का निष्कंप सरोकार रहा है। इसी अनुक्रम में लोक भारती ने 4 जुलाई 2015 को लखनऊ स्थित ‘गाँधी प्रतिमा’ परिसर में पेड़ों के स्थानान्तरण से सम्बन्धित ‘पेड़ों का धरना’ देकर सरकार और समाज को जागरुक किया। ‘हरियाली’ गुहार लगा रही है कि सरकार मशीनों के माध्यम से पेड़ों का स्थानान्तरण कर पुनः स्थापित करे, न कि उनका कटान, जिसका संज्ञान प्रदेश के मुख्य सचिव के वक्तव्य में परिलक्ष्ति हो रहा है। ‘हरियाली’ चाहती है कि गाँवों से नगरों को अंधाधुंध पलायन थमे। ग्रामीण युवा नगरों की चकाचैंध की तरफ भाग रहा है। गाँवों का नम्र एवं पोषणीय जीवन उसे रास नहीं आ रहा है। गाँवों को भी नगरीय चकाचैंध से आप्लावित करने की अपवित्र चेष्टा से लोक भारती आहत व चिन्तित है।
अपनी ‘लोक सम्मान’ पत्रिका के माध्यम से हमारा सतत् प्रयास जैविक कृषि पद्धतियों को पुनः प्रतिष्ठित करने का है। ‘शून्य लागत कृषि’ की विचारणा के प्रचार-प्रसार हेतु लोक भारती प्रतिबद्ध एवं प्रयासरत है। इसके अतिरिक्त पेड़ों, नदियों, कुआँ, जलाशयों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को उठाना और तृणमूल स्तर पर कार्य-सम्पादन हमारी प्राथमिकता है। प्रस्तुत अँक से हम भारतीय लोक जीवन से जुड़ी ‘घाघ भड्डरी’ की कहवतों को भी एक स्तम्भ के रूप में प्रारम्भ कर रहे हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि भारतीय दृष्टि से प्राणित व सुविचारित लेखों के माध्यम से प्राकृतिक विकास को आत्म्सात करने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ कर सकें।
लोक सम्मान का आगामी अँक ‘युवा शक्ति’ विशेषांक के रूप में प्रकाशित होगा। हमारा प्रयास रहेगा कि हमारे भारत का भविष्य ‘युवा शक्ति’ से जुड़े समस्त पहलुओं पर सकारात्मक दृष्टि से युक्त पे्ररक कार्य, योजनायें, लेख, कहानी, कविता व विचार प्रकाशित हों, जिससे हम अपने राष्ट्र के सभी स्तम्भों में उनके प्रति कर्तव्य भावना जाग्रत कर ने की दिशा में सार्थक पहल कर सकें। सुधी पाठक जनों की भूमिका भी उसमें महत्वपूर्ण है, जिसके लिए वह स्वयं जाग्रत हैं।
शाश्वत हरियाली की हार्दिक मंगल कामनाओं के सहित प्रकृति केन्द्रित विकास की आकांक्षी।